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शाहिद खान, भोपाल। आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस पानी को आप साफ समझ कर पी रहे हैं, यूनिसेफ इंडिया को उसके साफ होने पर शक है। यह शक उसने आज से पांच साल पहले शहरी जल-व्यवस्था की गंभीर तस्वीर पेश करती अपनी रिपोर्ट के जरिए नगर निगम से जाहिर कर दिया था, जिसे निगम ने नजरअंदाज कर दिया। रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि भोपाल की करीब 20 लाख आबादी को मिलने वाले पानी की शुद्धता की कोई ठोस गारंटी नहीं है। क्योंकि जिन वॉटर फिल्टर प्लांटों में पानी फिल्टर किया जा रहा है, वह उम्रदराज हो चुके हैं । रिपोर्ट की हरेक बात तब सच साबित हुई, जब पीपुल्स समाचार की टीम कांग्रेस पार्षदों के साथ श्यामला हिल्स फिल्टर प्लांट पहुंची।

यहां पता चला कि श्यामला हिल्स के दोनों फिल्टर प्लांट 1945-47 के बीच बने थे और आज अधिकतम 60 प्रतिशत क्षमता पर ही काम कर पा रहे हैं। वर्षों से इन प्लांटों की नियमित सफाई तक नहीं की गई है। पानी की शुद्धता जांचने और केमिकल डोज तय करने के लिए नियम अनुसार जहां प्रशिक्षित केमिस्ट की नियुक्ति होनी चाहिए, वहां यह काम अनुमान के आधार पर किया जा रहा है।

मप्र अकाउंटेंट जनरल (एमपीएजी) की रिपोर्ट में गंदा पानी सप्लाई होने का खुलासा होने के बाद नगर निगम अब अपने सभी फिल्टर प्लांट का टेक्निकल ऑडिट कराने का दावा किया था, जो कभी हुआ ही नहीं। पुराने हो चुके प्लांट्स में बरसों से इनकी सफाई तक नहीं हुई है। ऐसे में इन टैंक को कैमिकल ट्रीटमेंट की जरूरत महसूस की जा रही है। प्रोजेक्ट अमृत के तहत बड़े तालाब पर 6 करोड़ 75 लाख लीटर क्षमता के नए फिल्टर प्लांट के निर्माण की अनुमति ही इस आधार पर मिली थी कि पुराने प्लांट बंद किए जाएंगे। भौंरी में तीन एमजीडी क्षमता का नया प्लांट चालू हो गया। मनुआभान की टेकरी पर 12 एमजीडी क्षमता का प्लांट भी चालू हो चुका है।
यूनिसेफ इंडिया की रिपोर्ट है कि देश के 15 शहरों में 5 करोड़ लोगों को पीने का साफ पानी नहीं मिल रहा है। यदि हम पानी सप्लाई को लेकर भोपाल के हालात की बात करें तो यहां भी पानी की शुद्धता की कोई गारंटी नहीं है। बूढ़े हो चुके फिल्टर प्लांट और जर्जर पाइपलाइन से करीब 20 लाख की आबादी को शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है। कोलार से सप्लाई वाली 12 लाख से अधिक आबादी को तो साफ पानी मिलना नामुमकिन सा ही है, क्योंकि लाइन में इतने लीकेज हैं कि उसमें गंदगी मिल जाती है। बड़े तालाब के फिल्टर प्लांट बूढ़े हो चुके हैं, और वहां अनट्रेंड स्टाफ काम कर रहा है।

भोपाल के 15 वॉटर फिल्टर प्लांटों से 25 लाख आबादी को सप्लाई होने वाले पानी की शुद्धता की जांच करने की 4 कैमिस्टों के कंधों पर है। सैंपल कलेक्शन का काम ड्रायवर पंकज जांगड़े से कराया जा रहा है। इधर, लेब असिस्टेंट अशोक की नजर कमजोर है। प्रमोद खारे साल 2018 से कोलार फिल्टर प्लांट के प्रभारी हैं। वहीं सैय्यद सिराज हसन भी सालों से बैरागढ़ फिल्टर प्लांट का जिम्मा संभाल रहे हैं। यह दोनों ही सीनियर कैमिस्ट हैं। हालांकि निगम के पास बड़ी संख्या में असिस्टेंट कैमिस्ट हैं और कुछ विनियमित कर्मचारी हैं, जो कैमिस्ट का ही काम संभाल रहे हैं। लेकिन सीनियर कैमिस्टों की निगम में कमी है।
तीन साल पहले बड़ी जील में मछलियां मरने की वजह से पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (पीसीबी) ने मौके पर जांच की थी। जांच रिपोर्ट में बताया गया था कि ईदगाह फिल्टर प्लांट से निकला वेस्ट वॉटर कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर से होते हुए और श्यामला हिल्स फिल्टर प्लांट का बैक वॉटर सीएम हाउस के पीछे से होते हुए पहाड़ी से झरने के रूप में गिरकर झील में पहुंचता है। पीपुल्स समाचार की टीम ने जब इसकी पड़ताल की तो पता चला कि आज भी श्यामला हिल्स का बैक वॉटर बड़ी झील में मिल रहा है।
रविंद्र साहू झूमरवाला ने गोविंदपुरा विधानसभा के बरखेड़ा पठानी क्षेत्र स्थित टंकी पर चढ़कर निरीक्षण किया। वीडियो भी बनाया। इस दौरान टंकी के अंदर और आसपास गंदगी मिली। झूमरवाला ने कहा कि इसी टंकी से रोजाना हजारों लोगों को पीने का पानी सप्लाई होता है। दूषित पानी से संक्रमण और गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं।

नगर निगम नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने प्लांट के निरीक्षण के बाद कहा कि भोपाल में भाजपा शासित नगर निगम हर मोर्चे पर असफल रही है। समूचे राजधानी क्षे़त्र में पानी की किल्लत के साथ ही दूषित पानी की सप्लाई जहां एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। जकी ने कहा कि वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट चालू नहीं था। सिर्फ कागजी कार्रवाई ही देखने को मिली। रिपोर्ट भी नहीं मिली कि पानी का नियमित सैंपल लिया जाता है। उनका आरोप है कि केमिस्ट ग्रेजुएशन पास है। यह रसायन शास्त्र में ग्रेजुएट होना जरूरी है। पानी की गुणवत्ता भी सही नहीं मिली। पानी को फिल्टर करने में जो दिशा-निदेर्शों का पानी जरूरी होता है, वह भी नहीं दिखा।
इस पर प्लांट प्रभारी जेड ए खान ने बताया कि प्लांट 60 साल से भी ज्यादा पुराना है। बैक वॉटर चैंबर जर्जर है जिससे बैक वॉटर लीक कर रहा है। नए बैक वॉटर चैंबर के लिए टेंडर किए गए हैं।
श्यामला हिल्स-1 : क्षमता- 4.5 एमजीडी, आबादी को सप्लाई- 1.5 लाख
श्यामला हिल्स-2 : क्षमता- 2 एमजीडी, आबादी को सप्लाई- 65 हजार
अरेरा हिल्स : क्षमता- 5 एमजीडी, आबादी को सप्लाई- 1.65 लाख
पुल पुख्ता : क्षमता- 2 एमजीडी, आबादी को सप्लाई- 50 हजार
बादल महल : क्षमता- 1 एमजीडी, आबादी को सप्लाई- 30 हजार