Naresh Bhagoria
9 Jan 2026
प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। कड़ाके की ठंड ने सिर्फ तापमान ही नहीं गिराया, बल्कि दिल के मरीजों की चिंता भी बढ़ा दी है। अस्पतालों में हार्ट अटैक, ब्लड प्रेशर और अन्य कार्डियक समस्याओं के मरीजों की संख्या भी बढ़ गई। इसका सीधा असर दवा बाजार पर पड़ा। दिसंबर महीने में प्रदेश का दवा बाजार लगभग 15 हजार करोड़ रुपए का रहा, जिसमें से सबसे ज्यादा करीब 1500 करोड़ की दिल से जुड़ी दवाइयों की बिक्री दर्ज की गई।
देश में दिसंबर में 2.38 लाख करोड़ का बाजार रहा, जिसमें 33,115 करोड़ सिर्फ दिल की दवाओं की बिक्री हुई। फार्मा ट्रेड से जुड़े जानकारों के अनुसार, दिसंबर में कार्डियक मेडिसिन मार्केट में करीब 13 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई। यह आंकड़े इंडियन फार्मास्यिुटिकल मार्केट की रिपोर्ट से सामने आए। इधर अस्पतालों में भी हार्ट की ओपीडी भी बढ़ गई है। एम्स में आम दिनों में रोज जहां 125 से 150 मरीज आते हैं, वहीं दिसंबर में यह संख्या बढ़कर 200 हो गई। हमीदिया अस्पताल में दिसंबर में कार्डियक ओपीडी में 4500 हजार से ज्यादा मरीज पहुंचे।
ठंड से फेफड़ों और पेट में भी गंभीर असर होता है। ठंड के संपर्क में आने से सांस के मरीजों को अस्थमा और फाइब्रोसिस की समस्या बढ़ जाती है। यही कारण है कि दिसंबर में रेस्पिरेटरी मेडिसिन की बिक्री भी 13 फीसदी तक बढ़ गई। इस दौरान पेट से संबंधित यानी गेस्ट्रो मेडिसिन की खपत भी 11.9 फीसदी तक बढ़ गई है।
ठंड के मौसम में ब्लड वेसेल्स सिकुड़ जाती हैं, जिससे बीपी बढ़ने और हार्ट अटैक का खतरा रहता है। ऐसे में मरीजों को दवाइयों के साथ अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है। यही वजह है कि कार्डियक मेडिसिन की मांग अचानक बढ़ जाती है।
डॉ. आरएस मीणा, कार्डियक एक्सपर्ट
मौसम के अनुसार दवा मार्केट बदलता रहता है। ठंड के मौसम में कार्डियक मेडिसिन का बाजार अमूमन बढ़ जाता है। इसी तरह गर्मियों में एंटीबायोटिक और अन्य दवाओं की बिक्री बढ़ जाती है।
तुलसी ललवानी, दवा निर्माता