Manisha Dhanwani
25 Jan 2026
Garima Vishwakarma
24 Jan 2026
Garima Vishwakarma
24 Jan 2026
Manisha Dhanwani
24 Jan 2026
Shivani Gupta
23 Jan 2026
प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच जारी टकराव अब सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस बीच शिविर में हुए हंगामे पर शंकराचार्य ने पहली बार खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन पर हमला इसलिए किया जा रहा है क्योंकि वे खुलकर गो-रक्षा की बात कर रहे हैं।
शंकराचार्य ने कहा कि वे भाजपा की आंखों की किरकिरी बन चुके हैं, लेकिन किसी भी दबाव या उत्पीड़न के आगे झुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि जितना अधिक उन पर जुल्म होगा, उतनी ही दृढ़ता से वे अपने कदम आगे बढ़ाएंगे।
दरअसल, शनिवार देर रात खुद को ‘कट्टर सनातनी सेना’ बताने वाले संगठन के 8 से 10 युवक भगवा झंडे लेकर शंकराचार्य के शिविर के पास पहुंच गए थे। युवक ‘आई लव बुलडोजर बाबा’ और ‘योगी जिंदाबाद’ जैसे नारे लगाते हुए शिविर में घुसने की कोशिश करने लगे। इस दौरान शंकराचार्य के शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई और करीब 15 मिनट तक माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
बताया जा रहा है कि इस संगठन का नेतृत्व सचिन सिंह नाम का व्यक्ति कर रहा था। घटना के बाद सुरक्षा को देखते हुए शंकराचार्य के शिष्यों ने शिविर को चारों ओर से घेर लिया और भीतर जाने वाले सभी रास्तों को बंद कर दिया।
अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की की घटना के बाद करीब 15 मिनट तक शिविर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। बताया जा रहा है कि हंगामा करने वाले समूह का नेतृत्व सचिन सिंह नाम का व्यक्ति कर रहा था। हालात बिगड़ते देख शंकराचार्य के शिष्यों ने तुरंत सतर्कता बरतते हुए पूरे शिविर को चारों ओर से घेर लिया और अंदर आने वाले सभी रास्तों को बंद कर दिया।
वहीं इस मामले में शंकराचार्य के शिविर प्रभारी ने स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि कुछ असामाजिक तत्व लाठी-डंडे और झंडे लेकर शिविर में पहुंचे और जबरन अंदर घुसकर मारपीट पर आमादा हो गए। शिविर में मौजूद सेवकों ने समझाइश देकर उन्हें बाहर तो निकाल दिया, लेकिन स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी और किसी बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। शिविर प्रभारी ने प्रशासन से शंकराचार्य की सुरक्षा पुख्ता करने की मांग की है।
18 जनवरी को माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में सवार होकर स्नान के लिए जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें रोक दिया और पैदल जाने का निर्देश दिया। इस बात को लेकर विरोध हुआ, जिसके बाद शंकराचार्य के शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। घटना से आहत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शिविर के बाहर धरना शुरू कर दिया, जिससे मेला क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया।
इस प्रकरण के बाद मेला प्रशासन ने 48 घंटे के भीतर शंकराचार्य को दो अलग-अलग नोटिस जारी किए। पहले नोटिस में उनके द्वारा ‘शंकराचार्य’ पदवी के उपयोग को लेकर आपत्ति जताई गई, जबकि दूसरे नोटिस में मौनी अमावस्या के दिन हुए पूरे घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण मांगा गया। प्रशासन ने नोटिस में यह भी चेतावनी दी कि नियमों के उल्लंघन की स्थिति में उन्हें हमेशा के लिए माघ मेले से प्रतिबंधित क्यों न कर दिया जाए।