नेपाल की बाढ़ में अपनों से बिछड़ी ‘लिली’, मलबे के बीच आज भी तलाश रही अपने लोगों को

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही ने इंसानों के साथ-साथ बेजुबान जानवरों की जिंदगी भी पूरी तरह बदल दी है। त्रिशूली नदी के आसपास और ढूंगे बाजार में बाढ़ के बाद तबाही के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं। जगह-जगह मलबा फैला है और कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इसी मलबे के बीच एक फीमेल डॉग ‘लिली’ अपने उन लोगों को तलाश रही है जिनसे उसे रोज खाना और अपनापन मिलता था।
दिन होते ही मलबे में लौट आती है लिली
स्थानीय बच्चों गोलू और खुशी के मुताबिक वे इन दिनों लिली का ध्यान रख रहे हैं। रात के समय लिली बच्चों के साथ रुकती है लेकिन सुबह होते ही वह फिर ढूंगे बाजार के मलबे की ओर चली जाती है। वह मलबे के आसपास लगातार घूमती है और जगह-जगह सूंघकर कुछ तलाशने की कोशिश करती रहती है। ऐसा लगता है जैसे वह उन लोगों की तलाश कर रही हो जिनके बीच उसने अपना पूरा जीवन बिताया था।
होटल मालिक का भी इंतजार
स्थानीय बच्चों का कहना है कि लिली उस होटल के मालिक को भी तलाश रही है, जो उसे नियमित रूप से खाना खिलाते थे। बाढ़ के बाद से होटल मालिक समेत कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। लिली का बार-बार उसी इलाके में लौटना और मलबे के आसपास घूमते रहना स्थानीय लोगों के लिए भी भावुक कर देने वाला दृश्य है। वह न तो पहले की तरह खेलती है और न ही लोगों के बीच पहले जैसी चंचल दिखाई देती है।
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बाढ़ ने सिर्फ घर और बाजार नहीं उजाड़े
ढूंगे बाजार की तस्वीरें बताती हैं कि प्राकृतिक आपदा का असर सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं रहता। जिन जानवरों का जीवन स्थानीय लोगों के साथ जुड़ा होता है, उनके लिए भी अचानक आई ऐसी तबाही बेहद मुश्किल स्थिति पैदा कर देती है। लिली के लिए यह बाजार सिर्फ रहने की जगह नहीं था, बल्कि यही उसका परिवार और परिचित दुनिया थी। बाढ़ के बाद उस दुनिया का बड़ा हिस्सा मलबे में बदल गया और उसके अपने लोग उससे दूर हो गए। फिलहाल स्थानीय बच्चे उसकी देखभाल कर रहे हैं। लेकिन लिली की नजरें अब भी उसी मलबे में किसी परिचित चेहरे और अपनेपन की तलाश करती नजर आती हैं। उसकी खामोशी नेपाल की बाढ़ से हुई उस तबाही की एक ऐसी तस्वीर बन गई है जिसमें इंसानों के साथ बेजुबान जानवरों का दर्द भी साफ दिखाई देता है।




















