'जजों को अपनी सीमा में रहना चाहिए...', जस्टिस मेहता के आरोपों पर संजीव प्रकाश शर्मा का पलटवार

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश और रिटायर्ड जज संजीव प्रकाश शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता की ओर से लगाए गए आरोपों पर जवाए दिया है। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ की गई शिकायत के पीछे 'पेशेवर जलन' और रंजिश हो सकती है। शर्मा ने कहा कि जजों को अपनी सीमाओं का ध्यान रखना चाहिए और अगर किसी तरह की शिकायत थी तो उसे उचित संवैधानिक माध्यम से उठाया जाना चाहिए था।
जस्टिस मेहता पर हाईकोर्ट के काम में दखल का आरोप
एक इंटरव्यू में संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि जस्टिस संदीप मेहता को राजस्थान हाईकोर्ट के कामकाम में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं था। उन्होंने कहा कि अगर किसी जज को कोई शिकायत थी तो उसे सीधे भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखना चाहिए था, न कि मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर विवाद खड़ा करना चाहिए। शर्मा ने यह भी दावा किया कि उनके कार्यकाल के दौरान करीब 11 महीने तक वकीलों की कोई हड़ताल नहीं हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जस्टिस मेहता ने राजस्थान के वकीलों को हड़ताल और विरोध प्रदर्शन के लिए उकसाया।
रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने के आरोप को किया खारिज
संजीव प्रकाश शर्मा ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया होता तो सबसे पहले अपने माता-पिता और भाई के वर्षों से लंबित मामलों का निपटारा करवाते। बूंदी दौरे और अधिकारियों के तबादलों से जुड़े आरोपों पर उन्होंने कहा कि 800 से ज्यादा रूटीन ट्रांसफर हुए थे। उनके मुताबिक, किसी खास व्यक्ति को फायदा पहुंचाने का आरोप बेबुनियाद है।
'अपने साढ़े नौ साल के कार्यकाल में 88 हजार से ज्यादा केस निपटाए'
शर्मा ने कहा कि केस ट्रांसफर करने की शक्ति मुख्य न्यायाधीश के पास होती है और यह जनहित या वकीलों की मांग के आधार पर किया जाता है। उन्होंने उदयपुर से जुड़े मामले का भी जिक्र करते हुए कहा कि इसे तीन जजों के हटने के बाद ही सुना गया था। उन्होंने अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए दावा किया कि साढ़े नौ साल में उन्होंने 88 हजार से ज्यादा मुकदमों का निपटारा किया। शर्मा ने कहा कि जजों की पहचान उनके फैसलों से होती है, सोशल मीडिया या बयानों से नहीं।
अगस्त में जस्टिस मेहता ने CJI को लिखी थी चिट्ठी
अगस्त में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर संजीव प्रकाश शर्मा पर अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप लगाया था और उनके ट्रांसफर की मांग की थी। इसके बाद वकीलों का विरोध बढ़ा और शर्मा को छुट्टी पर जाना पड़ा था। अब शर्मा ने इन आरोपों पर अपना पक्ष सामने रखा है।




















