Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

Starlink की भारत में एंट्री का रास्ता हुआ साफ, स्पेक्ट्रम आवंटन को मिली मंजूरी

भारत में Starlink, OneWeb और Reliance Jio की सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं का रास्ता साफ होता दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सचिवों के समूह ने TRAI की स्पेक्ट्रम आवंटन सिफारिशों को मंजूरी दी है। अब प्रस्ताव कैबिनेट के पास जा सकता है। मंजूरी के बाद कंपनियों को शुरुआत में 5 साल के लिए स्पेक्ट्रम मिलने की उम्मीद है।
Starlink की भारत में एंट्री का रास्ता हुआ साफ, स्पेक्ट्रम आवंटन को मिली मंजूरी
भारत में Starlink, OneWeb और Reliance Jio की सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं का रास्ता साफ होता दिख रहा है।

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने की तैयारी कर रही Starlink, OneWeb और Reliance Jio जैसी कंपनियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, इंटर-मिनिस्ट्रियल पैनल यानी सचिवों के समूह ने सैटेलाइट स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर TRAI की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है। हालांकि, अभी इस बारे में सरकार की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि अब यह प्रस्ताव केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा जा सकता है।

कब तक शुरू हो सकती है सर्विस?

सूत्रों के अनुसार, सचिवों के समूह से मंजूरी मिलने के बाद अगला कदम कैबिनेट की मंजूरी है। कैबिनेट से अंतिम मुहर लगते ही स्पेक्ट्रम आवंटन के नियम लागू किए जा सकेंगे। Starlink, OneWeb और Reliance Jio के पास पहले से GMPCS जैसे जरूरी सैटेलाइट लाइसेंस मौजूद हैं। ऐसे में स्पेक्ट्रम के नियमों और फीस को लेकर कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही इन कंपनियों के लिए भारत में कमर्शियल सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने का रास्ता काफी आसान हो जाएगा।

ये भी पढ़ें: बदहाल शिक्षा व्यवस्था को लेकर स्कूली छात्राएं ने 30 KM पैदल चलकर पहुंची कलेक्ट्रेट, एक छात्रा बेहोश होकर गिरी,मचा हड़कप

5 साल के लिए मिलेगा स्पेक्ट्रम

TRAI की सिफारिशों के मुताबिक, कंपनियों को शुरुआत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड स्पेक्ट्रम 5 साल के लिए दिया जा सकता है। बाजार की स्थिति और कंपनियों के प्रदर्शन को देखते हुए इस अवधि को आगे 2 साल तक बढ़ाने का विकल्प भी रखा जा सकता है। यानी यह व्यवस्था अधिकतम 7 साल तक चल सकती है।

20 साल के लाइसेंस की मांग

Starlink जैसी ग्लोबल कंपनियां लंबे समय के लाइसेंस की मांग कर रही थीं। वहीं, TRAI ने सैटेलाइट इंटरनेट के शुरुआती और तेजी से बदलते बाजार को देखते हुए स्पेक्ट्रम की अवधि 5 साल रखने का सुझाव दिया है। इसका मकसद यह देखना है कि भारत में यह बाजार किस तरह आगे बढ़ता है और कंपनियां सुरक्षा से जुड़े नियमों का कितना पालन करती हैं। तकनीक में तेजी से बदलाव को देखते हुए सरकार भविष्य में नियमों को भी आसानी से अपडेट कर सकेगी।

Breaking News

कंपनियों से लिया जाएगा स्पेक्ट्रम शुल्क

TRAI ने कंपनियों से उनके Adjusted Gross Revenue यानी AGR का करीब 4 से 5 फीसदी हिस्सा स्पेक्ट्रम शुल्क के तौर पर लेने का सुझाव दिया है। इसके जरिए सरकार सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के इस्तेमाल पर शुल्क वसूल करेगी। साथ ही, सरकार इस अवधि में यह भी देख सकेगी कि घरेलू और विदेशी कंपनियां भारतीय डेटा सिक्योरिटी और दूसरे सुरक्षा नियमों का कितनी गंभीरता से पालन करती हैं।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...Read More

Latest Posts