PU Special :स्मृति शेष: मप्र में पचमढ़ी के पास बच्चों का स्कूल खोलना चाहते थे नाना पाटेकर, हिल स्टेशन देखकर हो गए थे फिदा

नरेश भगोरिया,भोपाल। पर्दे पर किरदार को जीवंत करने वाले अभिनेता नाना पाटेकर नहीं रहे। गुरुवार को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। क्रांतिकारी की तरह बयानी और वैसा ही जीवन जीने वाले नाना अपने सीने में एक कोमल हृदय रखते थे। विदर्भ और मराठवाड़ा के कर्जदार किसानों के लिए मदद करते हुए हमने उन्हें देखा है। उन्होंने महाराष्ट्र के किसानों के लिए अपनी तरफ से जो बन पड़ा वो किया। आर्थिक मदद की, दूसरे प्रयास भी किए।
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बच्चों के प्रति दिखा खास लगाव
अक्टूबर 1999 में तरकीब फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्होंने मप्र में काफी वक्त गुजारा था। जब वे पचमढ़ी में शूटिंग के लिए आए थे, तब मेरा नाना पाटेकर से मिलना हुआ था। दशहरे की छुट्टी के दिन (तब दशहरे के दिन अखबार की छुट्टी हुआ करती थी) दूर से पचमढ़ी पहुंचकर इंटरव्यू की बात शायद नाना को जंच गई और वे आराम से बातचीत के लिए तैयार हो गए। उन्होंने कहा कि आज मेरा पचमढ़ी के बच्चों के साथ शेड्यूल है, पहले उनसे बात कर लूं फिर बैठते हैं, तुम भी वहीं आ जाओ। जब मैं अपने साथी और आज के स्टैंडअप कॉमेडियन उदय दाहिया के साथ पचमढ़ी के नालंदा विद्यापीठ पहुंचा तो नाना बच्चों के साथ क्रिकेट खेल रहे थे। काफी देर तक वे बच्चों से बात करते रहे। पूर्व सांसद रामेश्वर नीखरा और नालंदा विद्यापीठ के संचालक दादा एपी तिवारी भी मौजूद थे। नाना ने बच्चों से पूछा-क्या अच्छा लगता है, क्या बनना चाहते हो? फिल्म देखते हो या नहीं और तमाम बातें। करीब डेढ़ घंटे बाद उन्होंने मुझसे बातचीत शुरू की।
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बड़ा कलाकार होना बड़ी बात नहीं
बातचीत के दौरान नाना ने पहले फिल्म के बारे में थोड़ी जानकारी दी। बातचीत में मैंने पूछा-आप तो बहुत बड़े कलाकार हैं, आगे और क्या सपना है? तब नाना बोले बड़ा कलाकार होना बड़ी बात नहीं है, हम जरूरतमंदों के लिए क्या कर सकते हैं, यह बड़ी बात है। नेम, फेम ये सब तो मिल जाएगा, लेकिन दूसरों की मदद के बाद जब संतोष मिलता है, तब जीवन सार्थक होता है। आज मैं बच्चों के साथ था, तो मेरा दिन बन गया। मैं चाहता हूं यहीं पचमढ़ी के आसपास बच्चों के लिए एक स्कूल खोलना चाहता हूं। यह इतनी खूबसूरत जगह है, मेरा तो तमन्ना है कि बच्चों के लिए स्कूल बने तो मैं उनके साथ रहूं भी।
राजनीति में कभी नहीं जाऊंगा
नाना पाटेकर ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि वे राजनीति में कभी नहीं आएंगे। उनका मानना था कि लोगों की मदद के लिए जरूरी नहीं कि राजनीति में जाया जाए। लोगों के लिए काम करने के बहुत से तरीके हैं। हुआ भी यही। नाना किसानों के मुद्दों को उठाते रहे। उनकी मदद भी की, लेकिन कोई पॉलिटिकल मोर्चा नहीं बनाया।
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