रीवा GMH में जच्चा-बच्चा की मौत से मचा हड़कंप, इलाज पर उठे गंभीर सवाल; 6 सदस्यीय जांच समिति गठित, विशेषज्ञ टीम अस्पताल पहुंची

रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा स्थित गांधी मेमोरियल अस्पताल (GMH) में गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत का मामला गंभीर होता जा रहा है। 25 वर्षीय कल्पना मिश्रा की इलाज के दौरान मौत के बाद अस्पताल की व्यवस्था और इलाज की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। परिवार ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए अब विशेषज्ञों की टीम ने जांच शुरू कर दी है। इस जांच में डॉक्टरों की ड्यूटी, मरीज को मिले इलाज, मेडिकल रिकॉर्ड और अस्पताल की पूरी व्यवस्था को देखा जाएगा।
6 सदस्यीय जांच टीम ने शुरू की पड़ताल
कल्पना मिश्रा की मौत की निष्पक्ष जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम श्याम शाह मेडिकल कॉलेज पहुंची है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जांच दल में स्वास्थ्य सेवाओं के जेडी डॉ. जीएस परिहार, हमीदिया अस्पताल भोपाल की एचओडी डॉ. रेखा बादवानी, डॉ. सवाना सुल्ताना, जबलपुर मेडिकल कॉलेज से डॉ. श्वेता शेषकार और डॉ. शैलेन्द्र नेमा तथा एनएचएम भोपाल से डॉ. पंकज गुडोलिया शामिल हैं। इसके अलावा भोपाल मेडिकल कॉलेज के गायनी विभाग की एचओडी और एक प्रोफेसर भी देर रात फ्लाइट से रीवा पहुंचे। जांच टीम अब मामले से जुड़े दस्तावेज और अस्पताल की व्यवस्थाओं की जानकारी जुटा रही है।
26 अगस्त को अस्पताल में भर्ती हुई थीं कल्पना
कल्पना मिश्रा, पति अमित मिश्रा, ग्राम हटवा, थाना बैकुंठपुर, जिला रीवा की रहने वाली थीं। उन्हें प्रसव से जुड़ी समस्या के चलते 26 अगस्त को सुबह करीब 2:38 बजे गांधी स्मारक चिकित्सालय के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उसी दिन रात करीब 11:55 बजे कल्पना और उनके गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। मां और बच्चे की एक साथ मौत की खबर सामने आने के बाद परिवार में मातम छा गया। परिजनों ने अस्पताल की इलाज व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए लापरवाही का आरोप लगाया।
परिवार ने इलाज में लापरवाही के लगाए आरोप
परिवार का कहना है कि कल्पना की हालत गंभीर थी और उन्हें समय पर उचित इलाज मिलना चाहिए था। परिजनों ने यह भी सवाल उठाया कि गंभीर स्थिति के दौरान क्या विशेषज्ञ डॉक्टर लगातार अस्पताल में मौजूद थीं? हालांकि, इलाज में वास्तव में लापरवाही हुई या नहीं, इसका अंतिम फैसला जांच पूरी होने के बाद ही होगा। विशेषज्ञ टीम अब मेडिकल रिकॉर्ड और दूसरे दस्तावेजों की जांच कर रही है।
डॉक्टरों की ड्यूटी को लेकर भी उठे सवाल
मामले की पड़ताल के दौरान अस्पताल की ड्यूटी व्यवस्था को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। अस्पताल में मौजूद CMO डॉ. सौरभ गोयल से डॉक्टरों की ड्यूटी के बारे में जानकारी ली गई। उन्होंने बताया कि डॉ. सोनल अग्रवाल की ड्यूटी रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक थी। उनके मुताबिक, वह कंसल्टेंट डॉक्टर हैं और जरूरत पड़ने पर ऑन कॉल अस्पताल आती हैं। इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि जिस समय कल्पना की हालत गंभीर हुई, उस वक्त संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टर अस्पताल में मौजूद थीं या नहीं।
जूनियर डॉक्टर के बयान से भी बढ़े सवाल
अस्पताल के Eclampsia Room के पास मौजूद जूनियर डॉक्टर अनिकेत सिंह से भी ड्यूटी व्यवस्था के बारे में जानकारी ली गई। उन्होंने भी बताया कि संबंधित डॉक्टर की ड्यूटी रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक रहती है और जरूरत पड़ने पर उन्हें बुलाया जाता है। अब जांच टीम के सामने अहम सवाल यही है कि घटना वाली रात अस्पताल में कौन-कौन से डॉक्टर मौजूद थे? कल्पना को किस समय किस डॉक्टर ने देखा? उनकी हालत बिगड़ने के बाद क्या मेडिकल प्रक्रिया अपनाई गई? इन सवालों के जवाब अस्पताल के रिकॉर्ड और अन्य सबूतों से मिलने की उम्मीद है।
CCTV और मेडिकल रिकॉर्ड से खुलेगा पूरा मामला
जांच में CCTV फुटेज, ड्यूटी रजिस्टर, मेडिकल रिकॉर्ड और इलाज से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इन रिकॉर्ड से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि कल्पना के अस्पताल पहुंचने के बाद उनका इलाज किस तरह किया गया। उनकी हालत कब बिगड़ी, उस समय कौन डॉक्टर ड्यूटी पर था और उन्हें किस तरह की मेडिकल मदद दी गई—इन सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। अगर इलाज में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने में ये रिकॉर्ड अहम भूमिका निभा सकते हैं।
मौत से पहले का वीडियो भी आया सामने
इस मामले में कल्पना का मौत से पहले का एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में वह अपनी मां से मदद मांगती हुई दिखाई दे रही हैं। वीडियो में कल्पना कथित तौर पर कहती हैं, “इस तरह का इलाज जारी रहा तो ये लोग मुझे मार डालेंगे मां... मुझे बचा लीजिए, मुझे जान का खतरा है।” वीडियो सामने आने के बाद परिवार के आरोप और गंभीर हो गए हैं। हालांकि, वीडियो में कही गई बातों और इलाज की वास्तविक स्थिति के बीच क्या संबंध था, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
दो डॉक्टर और दो नर्सिंग स्टाफ निलंबित
मामले में अस्पताल प्रशासन और सरकार की ओर से कार्रवाई भी की गई है। अब तक दो डॉक्टर और दो नर्सिंग स्टाफ को निलंबित किया जा चुका है। निलंबित कर्मचारियों में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की डॉ. सोनल अग्रवाल, एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. निधि पांडेय, नर्सिंग स्टाफ साधना वर्मा और सीमा मुजालदे शामिल हैं।



















