रीवा में जच्चा-बच्चा की मौत का मामला गरमाया, GMH पर उठे गंभीर सवाल,लापरवाही के आरोपों के बीच जांच समिति गठित

रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा स्थित गांधी मेमोरियल अस्पताल (GMH) में गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत के मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बैकुंठपुर के हटवा गांव की रहने वाली 25 वर्षीय कल्पना मिश्रा की 26 अगस्त की रात इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद परिवार ने अस्पताल में इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। मामले को गंभीरता से लेते हुए अब जांच शुरू कर दी गई है। दो डॉक्टर और दो नर्सिंग स्टाफ को निलंबित किया जा चुका है। जानकारी के अनुसार, सरकार ने मामले की जांच के लिए सात लोगों की उच्चस्तरीय टीम भी गठित की है।
इलाज के दौरान मां और बच्चे की मौत
कल्पना मिश्रा गर्भवती थीं और इलाज के लिए गांधी मेमोरियल अस्पताल पहुंची थीं। 26 अगस्त की रात उनकी हालत बिगड़ गई और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उनके गर्भ में पल रहे बच्चे की भी जान नहीं बचाई जा सकी। घटना के बाद परिवार ने अस्पताल के इलाज और व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। परिजनों का आरोप है कि अगर समय पर सही इलाज और विशेषज्ञ डॉक्टर की निगरानी मिलती तो शायद मां और बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। हालांकि, मौत की असली वजह और इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
अस्पताल की ड्यूटी व्यवस्था पर उठे सवाल
मामले की पड़ताल के दौरान अस्पताल के कर्मचारियों से ड्यूटी व्यवस्था को लेकर सवाल किए गए। इस दौरान कैमरे पर कुछ कर्मचारियों ने प्रसूति रोग विभाग की ड्यूटी को लेकर जानकारी दी। अस्पताल में मौजूद CMO डॉ. सौरभ गोयल से भी इस बारे में सवाल किया गया। उन्होंने बताया कि डॉ. सोनल अग्रवाल की ड्यूटी रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक है। उन्होंने यह भी बताया कि डॉक्टर कंसल्टेंट हैं और जरूरत पड़ने पर ऑन कॉल आती हैं। इस जानकारी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जिस समय कल्पना की हालत गंभीर थी, उस दौरान विशेषज्ञ डॉक्टर अस्पताल में मौजूद थीं या नहीं।
जूनियर डॉक्टर ने भी बताई ऑन कॉल व्यवस्था
पड़ताल के दौरान Eclampsia Room के पास मौजूद जूनियर डॉक्टर अनिकेत सिंह से भी ड्यूटी को लेकर सवाल किया गया। उन्होंने भी बताया कि संबंधित डॉक्टर की ड्यूटी रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक रहती है और जरूरत पड़ने पर उन्हें बुलाया जाता है। इन बयानों के बाद अस्पताल की ड्यूटी व्यवस्था को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं। अब जांच में यह पता लगाना जरूरी होगा कि घटना वाली रात कौन-कौन से डॉक्टर और कर्मचारी ड्यूटी पर थे और मरीज को किस समय किस डॉक्टर ने देखा था।
CCTV और रिकॉर्ड से सामने आएगा सच
मामले की जांच में अस्पताल का ड्यूटी रजिस्टर, CCTV फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड और इलाज से जुड़े दस्तावेज अहम साबित हो सकते हैं। इन रिकॉर्ड से यह पता लगाया जा सकता है कि कल्पना के अस्पताल पहुंचने से लेकर उनकी मौत तक उनका इलाज किस तरह हुआ। कौन सा डॉक्टर उस समय मौजूद था, मरीज को कब देखा गया और उसकी हालत बिगड़ने के बाद क्या कदम उठाए गए, इन सभी सवालों के जवाब जांच में सामने आ सकते हैं।
मौत से पहले का वीडियो भी सामने आया
मामले में कल्पना का मौत से पहले का एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में वह अपनी मां से मदद की गुहार लगाती हुई नजर आ रही हैं। वीडियो में कल्पना कथित तौर पर कहती हैं, “इस तरह का इलाज जारी रहा तो ये लोग मुझे मार डालेंगे मां... मुझे बचा लीजिए, मुझे जान का खतरा है।” इस वीडियो के सामने आने के बाद परिवार के आरोप और गंभीर हो गए हैं। हालांकि, वीडियो में कही गई बातों और इलाज की वास्तविक स्थिति के बीच क्या संबंध है, यह जांच के बाद ही साफ हो सकेगा।
दो डॉक्टर और दो नर्सिंग स्टाफ निलंबित
मामले के सामने आने के बाद कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है। अब तक दो डॉक्टरों और दो नर्सिंग स्टाफ को निलंबित किया जा चुका है। इसके अलावा सरकार ने मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की है। जांच टीम अस्पताल की व्यवस्था, डॉक्टरों की मौजूदगी, इलाज में अपनाई गई प्रक्रिया और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच करेगी।



















