सिरोही में शंकराचार्य सदानंद सरस्वती के चातुर्मास्य आराधना महोत्सव में उमड़ रहे श्रद्धालु
सोहागपुर। राजस्थान के सिरोही जिले के रेवदर क्षेत्र स्थित मनोरमा गोलोकतीर्थ, नंदगांव, अब्दुवारण्य, केसुआ में विराजमान जगतगुरु शंकराचार्य परम पूज्य ब्रह्मचारी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज के सानिध्य में आयोजित चातुर्मास्य आराधना महोत्सव में देश और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। यह धार्मिक आयोजन ‘सुरभि हरिहर चातुर्मास्य आराधना’ के अंतर्गत किया जा रहा है। महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं को महाराज श्री के सानिध्य में सत्संग, दर्शन और विभिन्न धार्मिक आयोजनों का लाभ मिल रहा है।
देशभर से पहुंच रहे श्रद्धालु
महाराज श्री के शिष्य एवं करणपुर, सोहागपुर निवासी हरगोविंद पुरविया ने बताया कि चातुर्मास्य आराधना के दौरान शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज के सानिध्य और सत्संग का लाभ उनके शिष्यों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्राप्त कर रहे हैं। जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज के दर्शन और सत्संग के लिए देश और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु सिरोही पहुंच रहे हैं। धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की उपस्थिति बनी हुई है।
पूजन, प्रवचन और भजन-कीर्तन के आयोजन
आयोजन के दौरान पूजन-अर्चन, धार्मिक प्रवचन, भजन-कीर्तन, यज्ञ और संत समागम सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। श्रद्धालु इन आयोजनों में शामिल होकर धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव कर रहे हैं। आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए भंडारे और प्रसाद वितरण की भी व्यवस्था की गई है।
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कई वर्षों से आध्यात्मिक जागृति का केंद्र
आयोजन संयोजक स्वामी श्री सद्बुद्धानंद जी ने बताया कि ‘सुरभि हरिहर चातुर्मास्य आराधना’ पिछले कई वर्षों से क्षेत्र में आध्यात्मिक जागृति और धार्मिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता कर रहे हैं।
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मानव सेवा और गौ सेवा का भी संदेश
आयोजन समिति के अनुसार चातुर्मास्य आराधना महोत्सव केवल धार्मिक आस्था और परंपराओं तक सीमित नहीं है बल्कि इसके माध्यम से मानव सेवा, गौ सेवा और धर्म जागरण का संदेश भी दिया जा रहा है। महोत्सव के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक और सामाजिक मूल्यों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी के साथ सिरोही का यह धार्मिक आयोजन आस्था और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बना हुआ है।






















