रीवा में डिलीवरी के बाद मां-बच्चे ने तोड़ा दम! 4 कर्मचारी सस्पेंड, अब 5 सदस्यीय कमेटी खोलेगी इलाज का राज

रीवा। रीवा के गांधी मेमोरियल अस्पताल में 25 वर्षीय कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत के बाद अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। परिवार ने इलाज में देरी और स्टाफ के व्यवहार को लेकर शिकायत की और अस्पताल परिसर में प्रदर्शन किया। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए दो डॉक्टरों और दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित कर दिया। मौत की असली वजह और इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं, इसकी जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है। समिति को तीन दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रसव के दौरान मां और बच्चे की मौत से मचा हंगामा
बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के हटवा गांव की रहने वाली कल्पना मिश्रा को प्रसव के लिए गांधी मेमोरियल अस्पताल लाया गया था। अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक उन्हें 26 अगस्त की सुबह करीब 2:38 बजे प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में भर्ती किया गया। उसी रात करीब 11:55 बजे महिला और उनके बच्चे की मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार के लोग अस्पताल पहुंचे और इलाज को लेकर सवाल उठाए।
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परिवार ने लगाया इलाज में लापरवाही का आरोप
परिजनों का आरोप है कि महिला को समय पर जरूरी उपचार नहीं मिला और नर्सिंग स्टाफ का व्यवहार भी ठीक नहीं था। इसी को लेकर अस्पताल के मुख्य गेट के बाहर धरना दिया गया। प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई की मांग उठी। हालांकि, इलाज में वास्तव में लापरवाही हुई या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई मामले की चर्चा
घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें महिला रोते हुए मदद मांगती दिखाई दे रही है। वीडियो में महिला के कथित शब्दों को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने वीडियो साझा कर सरकार से मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की। वीडियो की परिस्थितियों और इलाज के पूरे क्रम की पुष्टि जांच के जरिए की जानी है।
दो डॉक्टर और दो नर्सिंग अधिकारी निलंबित
मामले में शुरुआती कार्रवाई करते हुए स्त्री रोग विभाग की डॉ. सोनल अग्रवाल और एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. निधि पांडे को निलंबित किया गया है। परिवार के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर दो नर्सिंग अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई है। प्रशासन ने साफ किया है कि जांच में यदि अन्य कर्मचारी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
गंभीर हालत में अस्पताल पहुंची थी महिला
प्रशासन के अनुसार महिला को अस्पताल लाए जाने के समय प्लेटलेट की संख्या काफी कम थी और रक्तचाप भी अधिक था। मेडिकल रिकॉर्ड में गंभीर प्री-एक्लेम्पसिया, थ्रोम्बोसाइटोपेनिया और HELLP सिंड्रोम जैसी जटिलताओं का उल्लेख किया गया है। अस्पताल का पक्ष है कि निर्धारित चिकित्सा प्रक्रिया के अनुसार इलाज शुरू किया गया था। अब जांच समिति इन सभी पहलुओं की समीक्षा करेगी।
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तीन दिन में सामने आएगी जांच की तस्वीर
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। समिति को तीन दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त और एनएचएम के प्रबंध निदेशक को सौंपनी है। महिला और बच्चे की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम भी कराया गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।



















