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PU Special :अब रेरा बनाएगा वसूली का प्लान, आदेश के बाद भी 90% मकान खरीदारों को नहीं मिला पैसा; 312 करोड़ की वसूली अटकी

रेरा से राहत का आदेश मिलने के बाद भी प्रदेश के करीब 90 प्रतिशत मकान खरीदारों को उनका पैसा नहीं मिल पाया है। रेरा के आदेशों के बावजूद करीब दो हजार कॉलोनाइजरों और बिल्डरों से 312 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली अटकी हुई है।
अब रेरा बनाएगा वसूली का प्लान, आदेश के बाद भी 90% मकान खरीदारों को नहीं मिला पैसा; 312 करोड़ की वसूली अटकी
अब रेरा बनाएगा वसूली का प्लान

अशोक गौतम,भोपाल। मकान खरीदारों के पक्ष में फैसला होने के बाद भी उन्हें मुआवजे के लिए वर्षों तक इंतजार करना पड़ रहा है। भोपाल, इंदौर सहित 20 जिलों के कलेक्टरों को वसूली के लिए पत्र लिखे गए हैं, लेकिन करीब 90 प्रतिशत मामलों में वसूली नहीं हो पाई। अब रेरा कलेक्टरों पर निर्भरता कम कर वसूली की कमान खुद संभालने की तैयारी कर रहा है। रेरा महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली की बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर नई कार्ययोजना तैयार कर रहा है, ताकि वसूली और लंबित मामलों के निराकरण की गति बढ़ाई जा सके।

पांच साल बाद भी नहीं मिली पांच लाख की क्षतिपूर्ति

कोलार निवासी रमेश ने सात साल पहले रातीबड़ में राधे इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉलोनाइजर से मकान खरीदा था। अनुबंध और वादे के मुताबिक आवास नहीं मिलने पर मामला रेरा पहुंचा, जहां सुनवाई के बाद कॉलोनाइजर को रमेश को पांच लाख रुपए क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया गया। इसके बावजूद पांच साल बीतने के बाद भी उन्हें यह राशि नहीं मिली।

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20 जिलों के कलेक्टरों को लिखा पत्र

रमेश अकेले नहीं हैं। प्रदेश में ऐसे सैकड़ों मकान खरीदार हैं, जिन्हें रेरा के आदेश के बाद भी क्षतिपूर्ति नहीं मिल पाई है। रेरा ने ऐसे करीब दो हजार कॉलोनाइजरों और बिल्डरों से 312 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली के लिए भोपाल, इंदौर सहित 20 जिलों के कलेक्टरों को पत्र लिखा है। हालांकि, कलेक्टरों के स्तर पर करीब 90 प्रतिशत मामलों में वसूली नहीं हो पाई।

अब रेरा खुद बनाएगा एक्शन प्लान

मकान खरीदारों को जल्द राहत देने के लिए रेरा अब वसूली की नई कार्ययोजना तैयार कर रहा है। इसके तहत कलेक्टरों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय रेरा खुद वसूली की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा और कलेक्टरों से केवल आवश्यक प्रशासनिक सहयोग लिया जाएगा। इससे रेरा के आदेशों के क्रियान्वयन और वसूली की गति बढ़ाने की कोशिश होगी।

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महाराष्ट्र-गुजरात मॉडल का अध्ययन

रेरा वसूली और शिकायतों के निराकरण के लिए महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली की बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर रहा है। इन राज्यों में शिकायतों के तुरंत निराकरण, शिकायत फॉर्मेट में बदलाव, रेरा में प्रोजेक्ट पंजीयन की समय-सीमा कम करने और आदेशों के बेहतर क्रियान्वयन पर काम किया गया है। प्रदेश में अभी 300 से अधिक प्रोजेक्टों का पंजीयन लंबित है, जबकि करीब 450 शिकायतें भी लंबित हैं।

ऑनलाइन सिस्टम से पंजीयन की प्रक्रिया होगी आसान

मकान लेने वालों की शिकायतों की सुनवाई कर जल्द उनके निराकरण के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, रेरा के फैसलों और आदेशों का पालन हो और कॉलोनाइजरों पर अधिरोपित राशि मकान खरीदारों को दी जाए, इसके लिए कुछ नए सिस्टम तैयार किए जाएंगे। कॉलोनाइजरों को प्रोजेक्ट पंजीयन के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े, इसके लिए ऑनलाइन सिस्टम तैयार किया जाएगा।

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चार माह पहले शिकायत, अब तक सुनवाई नहीं

रेरा अध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि मकान खरीदारों की शिकायतों की सुनवाई कर जल्द उनके निराकरण के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, रतहरा, जिला रीवा निवासी प्रवेश मिश्रा ने कहा कि उन्होंने भागवत बिल्डर के खिलाफ रेरा में चार माह पहले शिकायत की थी। बिल्डर ने समय पर आवास नहीं दिया, लेकिन रेरा में अभी तक इसकी सुनवाई नहीं हुई और न ही उन्हें कोई राहत मिली है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...

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