PU Special :चाबी छोड़ दी, दस्तावेज देर से दिए...लापरवाही बताकर वाहन चोरी क्लेम खारिज, उपभोक्ता आयोग पहुंच रहे मामले

पल्लवी वाघेला, भोपाल। वाहन चोरी हुआ तो परेशानी सिर्फ वाहन जाने की नहीं होती, असली भागदौड़ उसके बाद शुरू होती है। पुलिस में रिपोर्ट, बीमा कंपनी को सूचना और फिर क्लेम की प्रक्रिया। इसी दौरान बीमा कंपनी यदि यह कहकर क्लेम खारिज कर दे कि उपभोक्ता ने पर्याप्त सावधानी नहीं बरती, तो परेशानी बढ़ जाती है। ऐसे मामले अब सीधे उपभोक्ता आयोग पहुंच रहे हैं। भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग में इस साल जून 2026 तक वाहन चोरी से जुड़े 7 मामले सुनवाई में रहे। इनमें 3 मामलों में फैसला उपभोक्ता के पक्ष में आया। वहीं मप्र राज्य उपभोक्ता आयोग में भी ऐसे 2 मामलों में उपभोक्ताओं के पक्ष में निर्णय हुआ है।
केस-1: डुप्लिकेट चाबी बताकर क्लेम खारिज किया
करोंद निवासी मुसीफ अहमद ने श्रीराम फाइनेंस कंपनी की नीलामी में एक फोर व्हीलर गाड़ी खरीदी थी। उसे मूल चाबी उपलब्ध नहीं कराई गई थी और केवल डुप्लिकेट चाबी उपभोक्ता के पास मौजूद थी। कुछ समय बाद उपभोक्ता का वाहन चोरी हो गया। कंपनी ने इसे उपभोक्ता की लापरवाही करार देकर कहा कि वाहन में चाबी लगी छोड़ी गई थी। उपभोक्ता ने अपने पास रखी चाबी दिखाई और बताया कि चाबी वाहन में नहीं लगी थी, लेकिन कंपनी ने इसे डुप्लिकेट चाबी कहकर क्लेम खारिज कर दिया। मामले में आयोग ने उपभोक्ता को क्लेम देने के आदेश दिए हैं।
केस-2: जांच के बाद क्लेम खारिज कर दिया
राज्य उपभोक्ता आयोग ने जिला उपभोक्ता आयोग खंडवा के निर्णय को बदलते हुए उपभोक्ता के हक में फैसला सुनाया है। मामले में उपभोक्ता का वाहन बाजार क्षेत्र से चोरी हो गया। उपभोक्ता ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ ही बीमा कंपनी को भी सूचना दी और क्लेम प्रस्तुत किया। बीमा कंपनी ने जांच के बाद क्लेम यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वाहन की सुरक्षा को लेकर उपभोक्ता ने अपेक्षित सावधानी नहीं बरती थी। कंपनी का तर्क था कि पॉलिसी की शर्तों के अनुसार वाहन की सुरक्षा की जिम्मेदारी बीमाधारक की भी है। राज्य आयोग ने अपने फैसले में कहा कि वाहन चोरी की घटना उपभोक्ता के नियंत्रण में नहीं थी। इस आधार पर क्लेम देने से पूरी तरह इंकार नहीं किया जा सकता। मामले में उपभोक्ता को क्लेम के साथ ही क्षतिपूर्ति के रूप में 15 हजार रुपए भी दिलाए गए।
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इन वजहों से निरस्त हो सकता है क्लेम
- चोरी की तत्काल सूचना बीमा कंपनी को नहीं देना
- पुलिस में एफआईआर कराने में देरी
- वाहन की चाबी सुरक्षित नहीं रखना
- वाहन किसी अन्य व्यक्ति को देकर चोरी होना
- आरसी या अन्य दस्तावेजों में विसंगति
- पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन
- जांच के दौरान बीमा कंपनी को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराना
इन बातों का रखें ध्यान
- बीमा कंपनी से क्लेम रिजेक्शन का लिखित कारण मांगें।
- पॉलिसी की संबंधित शर्त को ध्यान से पढ़ें।
- एफआईआर और बीमा कंपनी को दी गई सूचना का रिकॉर्ड रखें।
- सभी दस्तावेजों और पत्राचार की कॉपी सुरक्षित रखें।
- कंपनी के निर्णय से असंतुष्ट होने पर संबंधित शिकायत निवारण/उपभोक्ता मंच का रास्ता अपनाया जा सकता है।
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स्पष्ट कारण देना जरूरी
वाहन चोरी के मामले में बीमा कंपनी को सिर्फ यह कह देना पर्याप्त नहीं है कि उपभोक्ता ने लापरवाही की है। कंपनी को यह स्पष्ट करना होता है कि पॉलिसी की किस शर्त का उल्लंघन हुआ और उसका चोरी की घटना से क्या सीधा संबंध है। दूसरी ओर उपभोक्ता को भी वाहन चोरी होते ही पुलिस और बीमा कंपनी को सूचना देने, एफआईआर की कॉपी सुरक्षित रखने तथा सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने में देरी नहीं करनी चाहिए।
-सरिता राजानी, एडवोकेट




















