PU Special :मप्र के शहरों में अब जोन और कलर कोड से चलेंगे ई-रिक्शा, 10 पेज की नीति तैयार, फिटनेस-बीमा अनिवार्य, जुगाड़ और असेंबल्ड पर लगेगी रोक

विजय एस. गौर, भोपाल। प्रदेश के शहरों में ई-रिक्शा अब मनमाने ढंग से नहीं चल सकेंगे। प्रस्तावित ई-रिक्शा नीति में शहरों को अलग-अलग जोन में बांटकर प्रत्येक जोन के लिए अलग कलर कोड तय करने का प्रावधान किया गया है। ई-रिक्शा को निर्धारित जोन और रूट पर ही चलने की अनुमति होगी। इसके लिए फिटनेस सर्टिफिकेट, बीमा और अन्य जरूरी दस्तावेज अनिवार्य किए जाएंगे। असेंबल्ड या जुगाड़ से तैयार ई-रिक्शा के संचालन पर भी रोक लगाने का प्रावधान है।
10 पेज के ड्राफ्ट में 27 प्रमुख बिंदु
परिवहन आयुक्त की टीम ने करीब एक माह पहले ई-रिक्शा संचालन नीति का 10 पेज का ड्राफ्ट तैयार कर परिवहन विभाग को सौंप दिया है। इसमें 27 प्रमुख बिंदुओं के जरिए ई-रिक्शा के संचालन, रूट, सुरक्षा और निगरानी से जुड़े नियम प्रस्तावित किए गए हैं। शहरों में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या, यातायात जाम, दुर्घटनाओं और कुछ वाहनों के पलटने की घटनाओं को देखते हुए यह नीति तैयार की गई है।
रूट तय करने से पहले होगा यातायात का आकलन
प्रस्तावित नीति के मुताबिक जिला और सिटी सड़क सुरक्षा समिति शहर को अलग-अलग जोन में बांटकर ई-रिक्शा के लिए कलर तय करेगी। जिस जोन का जो कलर निर्धारित होगा, उसी के अनुसार ई-रिक्शा का संचालन किया जाएगा। इससे सड़क पर चल रहे ई-रिक्शा की पहचान और उनके निर्धारित क्षेत्र में संचालन की निगरानी आसान होगी। किसी सड़क या रूट पर ई-रिक्शा चलाने की अनुमति देने से पहले वहां यातायात का दबाव, सड़क की चौड़ाई और उसकी बनावट का आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर रूट निर्धारित होंगे। इसका उद्देश्य अधिक यातायात वाले मार्गों पर ई-रिक्शा की भीड़ और उससे होने वाले जाम को नियंत्रित करना है।
फिटनेस, बीमा और परमिट होंगे जरूरी
नई नीति लागू होने के बाद मौजूदा ई-रिक्शा के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट और बीमा कराना अनिवार्य होगा। यात्री वाहनों के लिए लागू नियमों के अनुरूप सिटी परमिट सहित जरूरी दस्तावेज भी रखने होंगे। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी और यातायात पुलिस वाहनों की जांच कर सकेंगे। नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई और जुर्माना किया जा सकेगा।
कंपनी-मेड ई-रिक्शा ही चलाने का प्रस्ताव
नीति में केवल निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले कंपनी-मेक ई-रिक्शा के संचालन का प्रावधान किया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर असेंबल किए गए या जुगाड़ से तैयार वाहनों के संचालन पर रोक लगेगी। हाईकोर्ट ने भी ई-रिक्शा के अस्थिर मॉडल और उनके पलटने से होने वाली दुर्घटनाओं के मुद्दे को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने राष्ट्रीय नीति में वाहन की स्थिरता और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
ये भी पढ़ें: MP के दो IAS अधिकारियों विवेक पोरवाल और संदीप जीआर के खिलाफ हाईकोर्ट का गिरफ्तारी वारंट
हाईकोर्ट ने 120 दिन में नीति अधिसूचित करने को कहा
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ की जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने 10 सितंबर को निशा गुर्जर विरुद्ध यूनियन ऑफ इंडिया मामले में ई-रिक्शा के नियमन को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार को 60 दिन में राष्ट्रीय नीति तैयार कर सभी राज्यों को उपलब्ध कराने को कहा है। मध्यप्रदेश में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक बदलाव कर राज्य की व्यापक नीति को 120 दिन में अधिसूचित करने के निर्देश दिए गए हैं। हाईकोर्ट ने माना कि ई-रिक्शा के रूट, संख्या और परमिट को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था जरूरी है। याचिका में करीब एक दशक से ई-रिक्शा के स्पष्ट नियमन के अभाव में यातायात अव्यवस्था का मुद्दा उठाया गया था।
ई-रिक्शा संचालन नीति का ड्राफ्ट परिवहन विभाग को सौंपा
हाईकोर्ट के आदेश के पालन में ई-रिक्शा संचालन नीति का ड्राफ्ट बनाकर परिवहन विभाग को सौंप दिया गया है। इसमें 27 प्रमुख बिंदुओं सहित 10 पेज का मसौदा है। शासन से नीति फाइनल होने के बाद इसे प्रदेशभर में लागू किया जाएगा।
-उमेश जोगा, आयुक्त परिवहन, ग्वालियर
ये भी पढ़ें: सात करोड़ के आभूषणों से होगा खजराना गणपति का दिव्य श्रृंगार, चढ़ाए जाएंगे हीरे जड़ित नए नेत्र




















