दस्तावेज वेरीफिकेशन में गड़बड़ी पर एसटीएफ ने जारी किए नोटिस, 100 से ज्यादा नगर पालिका-निगम कर्मी, पुलिस वाले घेरे में

भोपाल। बांग्लादेशियों के फर्जी दस्तावेजों से पासपोर्ट बनवाने में शामिल स्थानीय निकायों के कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ ही एक ही पता और एक ही गवाह होने के बावजूद अनदेखी कर वेरीफिकेशन करने वाले संबंधित थाना प्रभारियों से लेकर बीट ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों को एसटीएफ ने नोटिस जारी किए हैं। ऐसे 100 से ज्यादा कर्मचारियों को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।
मार्कशीट और निवास प्रमाण पत्र बनवाए
दरअसल, पासपोर्ट कांड में एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि पासपोर्ट बनवाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण और जरूरी आधार कार्ड तैयार कराने से पहले 10वीं की मार्कशीट, जन्म प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र बनवाए गए। इसके बाद इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मतदाता परिचय पत्र बनवाने के साथ ही पैन कार्ड तक बनवा लिए गए। इन सभी दस्तावेजों के आधार पर ही पासपोर्ट के लिए आवेदन किया गया। आवेदन में बौद्ध मठों या बौद्ध कॉलोनियों के पते दिए गए। साथ ही गवाह के रूप में मठ के प्रमुख का नाम दर्शाया गया।
प्रमाणीकरण करने वाले नेता भी नपेंगे
निवास और जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए स्थानीय पार्षद और सरपंच से प्रमाणीकरण कराया गया। इसी आधार पर स्थानीय निकायों से स्थायी निवास प्रमाण पत्र और जन्म प्रमाण पत्र बनवाए गए। इसके बाद बीएलओ के माध्यम से मतदाता सूची में नाम जुड़वाया गया, जिससे आधार कार्ड बनवाया गया। इस पूरी प्रक्रिया में शामिल नेताओं और कर्मचारियों से लेकर नगर पालिका व नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी भी जांच के दायरे में आए हैं। इन सभी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
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नोटिस जारी किए
पासपोर्ट बनवाने के लिए आधार सहित अन्य प्रमाणपत्र तैयार कराने में मदद करने वाले नगर निगम भोपाल, नगर पालिका डबरा और नगर पालिका आमला के संबंधित कर्मचारियों के साथ ही वेरीफिकेशन में लापरवाही बरतने वाले संबंधित थानों के तत्कालीन टीआई, बीट आरक्षक और प्रधान आरक्षक को नोटिस जारी किए गए हैं।
-राजेश सिंह भदौरिया, एसपी, एसटीएफ
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