PU Special :गणेशोत्सव पर भोपाल में बनेगा 34 किमी का ‘गणराज पथ’, 5 प्रमुख मंदिरों के होंगे दर्शन

भोपाल में 14 सितंबर से शुरू हो रहे गणेशोत्सव पर करीब 34 किमी का ‘गणराज पथ’ श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण होगा। इस मार्ग में शहर के 5 प्रमुख गणेश मंदिर शामिल हैं।
गणेशोत्सव पर भोपाल में बनेगा 34 किमी का ‘गणराज पथ’, 5 प्रमुख मंदिरों के होंगे दर्शन
भोपाल में बनेगा 34 किमी का ‘गणराज पथ’

मनोज चौरसिया, भोपाल। गणेशोत्सव को लेकर राजधानी भोपाल में तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच गई हैं। 14 सितंबर से शुरू हो रहे गणेशोत्सव के लिए शहर के अलग-अलग इलाकों में गणेश मंदिरों और झांकी पंडालों को सजाने-संवारने का काम चल रहा है। कई झांकी पंडालों में गणेश प्रतिमाओं की स्थापना का सिलसिला भी शुरू हो गया है। भोपाल में कई प्रसिद्ध गणेश मंदिर हैं, लेकिन शहर के पांच प्रमुख मंदिर ऐसे हैं, जहां गणेशोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। अगर कोई श्रद्धालु एक ही दिन में इन पांचों प्रमुख गणेश मंदिरों के दर्शन करना चाहे तो उसे शहर में करीब 34 किलोमीटर का सफर तय करना होगा। सामान्य यातायात की स्थिति में यह दूरी पूरी करने में करीब 70 मिनट यानी लगभग डेढ़ घंटे का समय लग सकता है। इन पांच मंदिरों को जोड़ने वाले इस मार्ग को ‘गणराज पथ’ के रूप में देखा जा सकता है। यह यात्रा पुराने शहर के छोला गणेश मंदिर से शुरू होकर पिपलानी, तुलसी नगर और हबीबगंज होते हुए कोलार स्थित प्रसिद्ध दगडू शेठ गणेश मंदिर तक पहुंचती है।

छोला गणेश मंदिर से शुरू होगा गणराज पथ

गणराज पथ की शुरुआत छोला गणेश मंदिर से होती है। वर्ष 1980 में स्थापित इस मंदिर में 11 फीट ऊंची सिद्धि विनायक गणेश की प्रतिमा विराजमान है।

तीन मंजिला यह मंदिर रंगीन कांच की सजावट के लिए भी जाना जाता है और पुराने शहर के प्रमुख गणेश मंदिरों में शामिल है। गणेशोत्सव के दौरान यहां श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पहुंचती है और मंदिर में विशेष धार्मिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।

पिपलानी गणेश मंदिर की भी खास पहचान

गणराज पथ का अगला प्रमुख पड़ाव पिपलानी गणेश मंदिर है। इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1975 में हुई थी। यहां जयपुर से प्रतिमा मंगाकर स्थापित की गई थी। मंदिर सफेद संगमरमर से निर्मित है। मंदिर में प्रत्येक संकष्टी चतुर्थी पर सुबह से लेकर चंद्रोदय तक मेला आयोजित होता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर भगवान गणेश के दर्शन और पूजा-अर्चना करते हैं।

तुलसी नगर में दक्षिण भारतीय शैली का शिखर

इसके बाद गणराज पथ तुलसी नगर स्थित महाराष्ट्र भवन तक पहुंचता है। करीब 20 साल पहले यहां गणेश प्रतिमा स्थापित की गई थी। मंदिर का शिखर दक्षिण भारतीय शैली में बनाया गया है। गणेशोत्सव के दौरान यहां विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस वजह से उत्सव के दिनों में मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है।

हबीबगंज गणेश मंदिर में विराजमान महागणेश

गणराज पथ का अगला प्रमुख पड़ाव हबीबगंज गणेश मंदिर है। वर्ष 1982 में स्थापित यह मंदिर भोपाल का एकमात्र महागणेश मंदिर बताया जाता है।

मंदिर में स्थापित गणेश प्रतिमा की ऊंचाई 5 फीट है। करीब 43 वर्ष पुराने इस मंदिर में गणेशोत्सव के दौरान विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर शहर के प्रमुख गणेश स्थलों में शामिल है।

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कोलार का दगडू शेठ गणेश मंदिर

गणराज पथ का अंतिम प्रमुख पड़ाव कोलार स्थित दगडू शेठ गणेश मंदिर है। यहां वर्ष 2010 में गणेश प्रतिमा स्थापित की गई थी। बैरागढ़ चीचली-कोलार रोड पर स्थित यह मंदिर पुणे के प्रसिद्ध दगडू शेठ गणपति मंदिर की तर्ज पर बनाया गया है। मंदिर में स्थापित गणेश प्रतिमा को जयपुर के कलाकारों ने तैयार किया है। गणेशोत्सव के दौरान यहां भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

झांकी पंडालों में प्रतिमाओं की स्थापना शुरू

गणेशोत्सव के लिए भोपाल के अलग-अलग इलाकों में झांकी पंडालों को तैयार करने का काम भी तेजी से चल रहा है। कई पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमाओं को विराजमान करने का सिलसिला शुरू हो गया है। आयोजन समितियां सजावट, धार्मिक कार्यक्रम और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़ी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं।  गणेशोत्सव के दौरान शहर के प्रमुख गणेश मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में एक ही दिन में पांच प्रमुख मंदिरों के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के लिए छोला से कोलार तक का करीब 34 किलोमीटर का मार्ग खास धार्मिक यात्रा का रूप ले सकता है।

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परिक्रमा से मनोकामना पूर्ण होने की मान्यता

भोपाल के इन प्रमुख गणेश मंदिरों की परिक्रमा और दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था है। पंडित जगदीश शर्मा के अनुसार, शहर में विराजित इन गणेश मंदिरों की परिक्रमा करने से मनोकामना पूर्ण होने की मान्यता है। गणेशोत्सव के दौरान इस ‘गणराज पथ’ का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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