BRICS में भारत का कूटनीतिक दांव सफल, ईरान-UAE मतभेद के बावजूद बनी सहमति

BRICS देशों ने भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली घोषणा को सर्वसम्मति से मंजूर किया। ईरान और UAE के मतभेदों के बावजूद भारत ने सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई। घोषणा में पश्चिम एशिया संकट, गाजा हिंसा, फिलिस्तीनी अधिकार, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक व्यापार पर रुख सामने आया। BRICS ने कूटनीति, शांति और व्यापारिक स्थिरता पर जोर दिया।
BRICS में भारत का कूटनीतिक दांव सफल, ईरान-UAE मतभेद के बावजूद बनी सहमति
BRICS देशों ने भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली घोषणा को सर्वसम्मति से मंजूर किया।

भारत को BRICS के मंच पर बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। शनिवार को BRICS देशों ने नई दिल्ली घोषणा को सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया। पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच मतभेद थे, इसके बावजूद भारत सभी देशों को एक राय पर लाने में सफल रहा। BRICS में संयुक्त घोषणा के लिए सभी सदस्य देशों की सहमति जरूरी होती है। ऐसे में किसी एक देश की असहमति से पूरी घोषणा रुक सकती थी। अंतिम मसौदे पर शनिवार दोपहर सहमति बनी और इसके कुछ घंटे बाद करीब 4:30 बजे घोषणा जारी की गई।

पश्चिम एशिया संकट पर क्या कहा गया?

नई दिल्ली घोषणा में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता जताई गई। BRICS ने सभी पक्षों से संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की, जिनसे हालात और बिगड़ सकते हैं। समूह ने कहा कि संकट का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकाला जाना चाहिए। साथ ही नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की बात भी कही गई। हालांकि, घोषणा में ईरान पर अमेरिका के हमलों या खाड़ी के कुछ अरब देशों पर ईरानी हमलों का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया गया।

भारत ने कैसे बनाई सहमति?

सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम एशिया संकट से जुड़े मुद्दे पर शुरुआत में ईरान और UAE का रुख काफी सख्त था। भारत ने दोनों देशों को अपने क्षेत्रों पर हुए हमलों की सीधी निंदा की मांग से पीछे हटने के लिए तैयार किया। इसके साथ ही रूस की ओर से संघर्षों से जुड़े कुछ संदर्भों को नरम करने की मांग को भी ध्यान में रखा गया। भारत ने ईरान की पश्चिम एशिया के प्रमुख देशों के साथ संबंध सुधारने की कोशिशों को भी सहमति बनाने के लिए इस्तेमाल किया। BRICS नेताओं ने पश्चिम एशिया संकट को बातचीत और कूटनीति के जरिए हल करने की भारत की सोच का समर्थन किया।

रूस-यूक्रेन युद्ध का भी नहीं किया विरोध

नई दिल्ली घोषणा में रूस-यूक्रेन युद्ध की भी आलोचना नहीं की गई। इसके बजाय संघर्षों को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाने पर जोर दिया गया। भारत की कोशिश रही कि घोषणा किसी एक देश के खिलाफ सीधा राजनीतिक संदेश बनने के बजाय सभी सदस्य देशों के लिए स्वीकार्य रहे।

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व्यापार और टैरिफ पर अमेरिका को संदेश

BRICS ने अमेरिका का नाम लिए बिना व्यापार से जुड़े कदमों पर चिंता जताई। समूह ने मनमाने टैरिफ, गैर-टैरिफ उपायों और संरक्षणवाद का विरोध किया। BRICS के मुताबिक, ऐसे कदम वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुंचा सकते हैं, सप्लाई चेन में बाधा डाल सकते हैं और पहले से मौजूद आर्थिक असमानताओं को और बढ़ा सकते हैं। समूह ने वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और ऊर्जा की सुचारू आवाजाही बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत बताई।

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गाजा हिंसा पर इजरायल की आलोचना

नई दिल्ली घोषणा में गाजा में जारी हिंसा को लेकर इजरायल पर कड़ी टिप्पणी की गई। BRICS ने पिछले साल अक्टूबर में हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद गाजा में जारी हिंसा पर गंभीर चिंता जताई। समूह ने गाजा से फिलिस्तीनियों को जबरन विस्थापित करने वाली किसी भी नीति को रोकने की मांग की। घोषणा में कहा गया कि ऐसी किसी भी व्यवस्था से बचना चाहिए, जो फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों को नुकसान पहुंचाए, कब्जे को वैध बनाए या उसे लंबे समय तक जारी रखे।

फिलिस्तीनी अधिकारों पर जोर

BRICS ने कहा कि इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष का स्थायी और न्यायपूर्ण समाधान केवल शांतिपूर्ण तरीकों से ही संभव है। इसके लिए फिलिस्तीनी लोगों के वैध अधिकारों को पूरा करना जरूरी है। घोषणा में आत्मनिर्णय और वापसी के अधिकार का भी उल्लेख किया गया। BRICS ने क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए बातचीत और कूटनीति के प्रयास तेज करने की जरूरत बताई।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...Read More

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