दो भाईयों के नवाचार की कहानी: 10 हजार पौधों से शुरुआत की, अब हर महीने 15 लाख पौधों का उत्पादन कर रहे

भोपाल। साल 2018 में 2 हजार वर्गफीट जगह में पॉलीहाउस नर्सरी विकसित कर 10 हजार पौधों से शुरुआत की गई थी। अब 2 एकड़ जमीन में हर महीने करीब 15 लाख पौधों का उत्पादन हो रहा है। नर्सरी में गुलाब, जरबेरा, गेंदा और नौरंगा सहित विभिन्न फूलों के पौधों के साथ बैंगन, टमाटर, मिर्च, गिलकी, लौकी और खीरा जैसी सब्जियों के हाईब्रिड पौधे तैयार किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के किसान भी इनसे पौधे मंगवा रहे हैं। नवाचार और मेहनत से दोनों भाइयों ने गांव के 20 बेरोजगार युवाओं को रोजगार भी दिया है।
परंपरागत खेती में लाभ कम मिला तो आया अलग करने का विचार
हेमंत और ओम कुशवाह बताते हैं कि गेहूं, सोयाबीन और धान की परंपरागत खेती में लाभ अधिक नहीं हो रहा था। ऐसे में विचार आया कि कुछ अलग किया जाए। दोनों भाइयों ने सोशल मीडिया से खेती में नवाचार करने की जानकारी जुटाई और 2017-18 में कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के संपर्क में आने के बाद नर्सरी व्यवसाय को समझना शुरू किया। विभाग की ओर से आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नियमित भाग लिया और सब समझने के बाद 2 हजार वर्गफीट जगह में पॉली नर्सरी विकसित कर दी। पौधों की मांग बढ़ने से साल 2024 में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच) योजना से जुड़कर 45 लाख रुपये का लोन लिया और नर्सरी का विस्तार किया।
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अब हर महीने 15 लाख पौधों का हो रहा उत्पादन
नर्सरी का विस्तार होने के बाद अब 2 एकड़ जमीन में हर महीने बीजों से 15 लाख पौधों का उत्पादन हो रहा है। नर्सरी में गुलाब, जरबेरा, गेंदा और नौरंगा सहित विभिन्न फूलों के पौधे तैयार किए जा रहे हैं। इसके साथ ही बैंगन, टमाटर, मिर्च, गिलकी, लौकी और खीरा जैसी सब्जियों के हाईब्रिड पौधों का भी उत्पादन हो रहा है। इन पौधों की मांग मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान सहित अन्य राज्यों तक है और अलग-अलग राज्यों के किसान फूलों और सब्जियों के पौधे मंगवाकर खेती कर रहे हैं।
सोशल मीडिया के माध्यम से देशभर के किसान कर रहे संपर्क
दोनों भाइयों का नवाचार और मेहनत देश भर में सराहा जा रहा है। सोशल मीडिया और मोबाइल के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों से किसान उनसे संपर्क कर पौध खरीद रहे हैं। इससे दोनों भाइयों की लाखों की आमदनी हो रही है। वहीं, उनके नवाचार से अब तक गांव के 20 बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिल चुका है। पौधों की मांग बढ़ने से नर्सरी व्यवसाय लगातार आगे बढ़ रहा है और खेती को व्यवसाय के रूप में अपनाने का रास्ता भी मजबूत हुआ है।
खुद कुआं खोदकर पानी की व्यवस्था की
रतुआ रतनपुर गांव के पास की जमीन सिंचित नहीं थी। बिना पानी के पौधों का उत्पादन करना आसान नहीं था और बोरिंग कराने के लिए एक से डेढ़ लाख रुपये का बजट नहीं था। ऐसे में दोनों भाइयों ने खुद कुएं की खुदाई की। कुएं से पानी आया, जिससे जमीन में पानी देने की सुविधा हो गई। हेमंत कुशवाह बताते हैं कि आधुनिक तकनीक सीखने और उसे खेत में अपनाने से खेती में नए अवसर खुलते हैं। लगातार प्रशिक्षण प्राप्त कर नई तकनीकों को सीख रहे हैं और उन्हें अपनी नर्सरी में समय-समय पर लागू करते रहते हैं।
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प्रशिक्षण और सरकारी योजना से आसान हुई नवाचार की राह
दोनों भाइयों ने 10 हजार पौधों से शुरुआत की थी और वर्तमान में लगभग 15 लाख पौधे हर महीने तैयार कर रहे हैं। नर्सरी लगभग 2 एकड़ में है और 2 पॉलीहाउस लगभग 4 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में हैं। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच) योजना से 45 लाख रुपये का लोन लेकर नर्सरी का विस्तार किया गया। इससे 20 युवाओं को रोजगार मिला और पौधों की पहुंच मध्यप्रदेश के साथ महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान तक हुई। दोनों भाइयों का कहना है कि सही तकनीक, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर किसान खेती को एक सफल व्यवसाय में बदल सकते हैं और एक सफल कृषि उद्यमी बन सकते हैं।




















