PU Special :90 दिन में तैयार होगी सोयाबीन की नई किस्म RV-124, कृषि विवि ग्वालियर के वैज्ञानिकों ने वैरायटी तैयार की

मध्य प्रदेश के किसानों के लिए राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर के वैज्ञानिकों ने सोयाबीन की नई किस्म राज विजय सोयाबीन-124 तैयार की है। यह किस्म 90 से 95 दिन में पककर तैयार हो जाती है और इसकी खासियत कम समय में फसल तैयार होने के साथ रोगों से लड़ने की क्षमता है।
90 दिन में तैयार होगी सोयाबीन की नई किस्म RV-124, कृषि विवि ग्वालियर के वैज्ञानिकों ने वैरायटी तैयार की
90 दिन में तैयार होगी सोयाबीन की नई किस्म RV-124,

आशीष शर्मा, ग्वालियर। सोयाबीन की इस किस्म की औसत उपज करीब 1,986 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर और अधिकतम उपज क्षमता 2,084 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है। यह वर्षा आधारित खेती के लिए उपयोगी है और मौसम के अंतिम चरण में आने वाले सूखे से फसल को बचाने में मदद कर सकती है। इसकी बनावट मशीन से कटाई के लिए भी अनुकूल है, जिससे किसानों का समय और श्रम बच सकता है।

90 से 95 दिन में पककर तैयार होगी सोयाबीन की नई किस्म

राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर के वैज्ञानिकों ने राज विजय सोयाबीन-124 किस्म तैयार की है, जो 90 से 95 दिन में पककर तैयार हो जाती है। सोयाबीन की दूसरी किस्मों की परिपक्वता अवधि 90 से 145 दिन तक होती है, जबकि इस नई किस्म की जल्द परिपक्वता किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। इसे डॉ. जगेन्द्र सिंह, डॉ. लेखराम, डॉ. एसआर रामगिरि एवं डॉ. एके सक्सेना ने तैयार किया है।

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प्रति हेक्टेयर 2,084 किलोग्राम तक उपज क्षमता

राज विजय सोयाबीन-124 की औसत उपज लगभग 1,986 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर और अधिकतम उपज क्षमता 2,084 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक दर्ज की गई है। यह किस्म समय पर बोई गई वर्षा आधारित परिस्थितियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। कम समय में पकने के कारण फसल को मौसम के अंतिम चरण में आने वाले टर्मिनल सूखे से बचाने और उपलब्ध नमी का बेहतर उपयोग करने में मदद मिल सकती है।

कई प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता

सोयाबीन की यह नई किस्म पीला चित्वर्न, चारकोल रॉट, लीफ स्पॉट और झुलसा रोग सहित कई प्रमुख रोगों के प्रति बहु-रोग प्रतिरोधकता प्रदर्शित करती है। इसके बीज मध्यम आकार के होते हैं और 100 बीजों का वजन लगभग 10.64 ग्राम है। बीज चमकीले पीले रंग के होते हैं, जबकि उनका हिलम काले रंग का होता है।

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मशीन से कटाई के लिए अनुकूल है किस्म

राज विजय सोयाबीन-124 के पौधों का वृद्धि स्वरूप अर्ध-सीधा होता है, फूल सफेद होते हैं और तने और फलियों पर रोएं पाए जाते हैं। इसकी प्रमुख विशेषताओं में मशीन से कटाई के लिए उपयुक्त होना शामिल है, क्योंकि पौधे में पहली फली मिट्टी की सतह से लगभग 10 से 15 सेंटीमीटर की ऊंचाई पर बनती है। इससे व्यावसायिक स्तर पर मशीन से कटाई करने में सुविधा मिलती है और समय तथा श्रम की बचत हो सकती है।

वर्षा आधारित क्षेत्रों में दूसरी फसल की संभावनाएं

नई किस्म की शीघ्र परिपक्वता से वर्षा आधारित क्षेत्रों में उपलब्ध नमी का बेहतर उपयोग किया जा सकता है और दूसरी फसल लेने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के अनुसार, किसान इस किस्म के बीज कृषि विश्वविद्यालय से प्राप्त कर सकते हैं। कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर के डीआरएस डॉ. आरए कौशिक ने बताया कि आरवीएस-124 की खासियत 90 से 95 दिन में पकना और रोगों से लड़ने की अधिक क्षमता है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...

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