PU Special :मध्यप्रदेश में गरीबों के घर का सपना होगा आसान, बिल्डरों की जमीन पर बनेंगे सस्ते मकान, सरकार देगी रियायतें

मध्यप्रदेश की प्रस्तावित आवास नीति 2026 में डेढ़ लाख मकानों का लक्ष्य है। निजी जमीन, सरकारी रियायतों और बिल्डरों के निवेश से सस्ते घर बनेंगे।
मध्यप्रदेश में गरीबों के घर का सपना होगा आसान, बिल्डरों की जमीन पर बनेंगे सस्ते मकान, सरकार देगी रियायतें

अशोक गौतम, भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार गरीब और निम्न आय वर्ग के लिए नई आवास नीति तैयार कर रही है। प्रस्तावित किफायती आवास नीति 2026 में निजी बिल्डरों की भागीदारी बढ़ाने की योजना शामिल है। सरकार सरकारी जमीन के साथ निजी भूमि पर भी सस्ते मकान बनवाएगी। इसके लिए चार अलग-अलग मॉडल तैयार किए गए हैं। नई नीति में डेढ़ लाख मकानों की मंजूरी और निर्माण शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

शहरों में जमीन और मकानों की कीमतें लगातार आमदनी के मुकाबले बढ़ रही हैं। इसका असर गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। कई परिवारों के लिए अपना घर खरीदना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। सरकार अब इस चुनौती का समाधान निजी निवेश के जरिए तलाश रही है। इसमें बिल्डरों को सरकारी रियायतें देकर आवास निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

मध्यप्रदेश आवास नीति 2026 में जमीन, निर्माण और रजिस्ट्री से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। इसके अलावा कर्ज, किराये और झुग्गी पुनर्विकास को भी नीति में शामिल किया गया है। सरकार का उद्देश्य अलग-अलग आय वर्गों के लिए आवास उपलब्ध कराना है।

चार मॉडल से तैयार होंगे किफायती मकान

प्रस्तावित नीति में मकान बनाने के लिए चार मॉडल निर्धारित किए गए हैं। पहले मॉडल में सरकारी एजेंसियां अपनी जमीन पर आवासीय परियोजनाएं विकसित करेंगी। दूसरे मॉडल में सरकारी जमीन पर निजी बिल्डर पीपीपी के तहत निर्माण करेंगे। तीसरे मॉडल में बिल्डर अपनी निजी जमीन पर मिश्रित आवासीय परियोजनाएं विकसित करेंगे। चौथे मॉडल में सरकारी जमीन पर विकास अधिकार देकर निजी क्षेत्र निर्माण करेगा।

इन परियोजनाओं में गरीबों और निम्न आय वर्ग को प्राथमिकता देने का प्रस्ताव है। अनुमत निर्माण क्षेत्र का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा आरक्षित रहेगा। इसमें ईडब्ल्यूएस और एलआईजी श्रेणी के मकान शामिल किए जाएंगे। अन्य आय वर्गों के मकान और व्यावसायिक हिस्से भी परियोजनाओं में बन सकेंगे। इनसे होने वाली कमाई से किफायती मकानों की निर्माण लागत घटाई जाएगी। इस व्यवस्था से बिल्डरों और आवास खरीदने वाले परिवारों को लाभ पहुंचाने की योजना है।

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जमीन और निर्माण पर मिलेंगी रियायतें

नई नीति में निजी बिल्डरों को प्रोत्साहित करने के लिए एफएआर बढ़ाने का प्रस्ताव है। एफएआर यानी फ्लोर एरिया रेशियो से जमीन पर निर्माण क्षेत्र निर्धारित होता है। शहरों की अलग-अलग श्रेणियों के अनुसार आधार एफएआर दो, ढाई और तीन होगा। किफायती आवास परियोजनाओं में अधिकतम तीन एफएआर का लाभ मिल सकेगा।

इसके अलावा कॉलोनी विकास और भवन निर्माण अनुमति शुल्क में रियायतें प्रस्तावित हैं। लेआउट मंजूरी और अन्य संबंधित शुल्कों में भी छूट देने की योजना है। सरकार इन प्रोत्साहनों के जरिए निर्माण लागत घटाना चाहती है।

इससे किफायती आवास योजना के अंतर्गत मकानों की कीमत नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। हालांकि, वास्तविक लाभ अंतिम नियमों और स्वीकृत परियोजनाओं पर निर्भर करेगा।

किराये से मालिकाना हक तक पहुंचेगा सफर

औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के आवास के लिए विशेष व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। औद्योगिक क्षेत्रों की आवासीय जमीन का 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा आरक्षित होगा। इस जमीन पर किफायती आवास परियोजनाएं विकसित करने की योजना बनाई गई है।

बिल्डर मुख्य परियोजना से दो किलोमीटर के दायरे में भी आवास बना सकेंगे। श्रमिकों के लिए लंबे समय तक किराये पर मकान उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। इसके बाद उन्हें मकान का मालिकाना हक देने की व्यवस्था भी होगी।

इसी व्यवस्था को Rent to Own मॉडल कहा गया है। इसका उद्देश्य श्रमिकों को धीरे-धीरे किरायेदार से मकान मालिक बनाना है। अस्पतालों, कॉलेजों और आईटी पार्कों के आसपास भी किराये के मकान बनेंगे। इनमें कर्मचारी, विद्यार्थी और प्रवासी पेशेवर रह सकेंगे।

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भूमि पोर्टल पर मिलेगी सभी जानकारी

सरकार आवास योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए भूमि पोर्टल विकसित करेगी। इस पोर्टल पर उपलब्ध मकानों की संख्या और कीमतों की जानकारी मिलेगी। संबंधित बिल्डर और रेरा पंजीयन की जानकारी भी पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी। परियोजनाओं से जुड़ी मंजूरियों का विवरण भी यहां देखा जा सकेगा।

इस व्यवस्था से मकान खरीदने वालों को जरूरी जानकारी एक जगह मिलेगी। आवास योजना से जुड़ी अनुमतियों के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इससे अलग-अलग विभागों की मंजूरी लेने की प्रक्रिया आसान होगी।

नई नीति के प्रारूप में छह से नौ महीने का समय निर्धारित है। इस अवधि में करीब डेढ़ लाख मकानों की स्वीकृति देने की योजना है। साथ ही प्रस्तावित परियोजनाओं का निर्माण कार्य शुरू कराने का लक्ष्य रखा गया है।

झुग्गी बस्तियों के पुनर्विकास के लिए अथॉरिटी

सरकार झुग्गी बस्तियों के पुनर्विकास के लिए अलग व्यवस्था तैयार करेगी। इसके लिए स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। जहां संभव होगा, वहां निवासियों को उसी स्थान पर नए मकान मिलेंगे। इससे लोगों को अपने मौजूदा क्षेत्र से दूर नहीं जाना पड़ेगा।

सरकार इस अथॉरिटी के लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध कराएगी। पीपीपी मॉडल और विभिन्न सरकारी योजनाओं से आवास तैयार किए जाएंगे। इन परियोजनाओं का उद्देश्य झुग्गी बस्तियों में रहने वाले परिवारों को आवास देना है।

तीन महीने में नियमों में संशोधन का लक्ष्य

नीति लागू करने के लिए सरकार संबंधित नियमों में बदलाव की तैयारी कर रही है। अगले तीन महीने में भूमि विकास से जुड़े नियम संशोधित करने का लक्ष्य है। नगर तथा ग्राम निवेश के नियमों में भी बदलाव प्रस्तावित हैं। इसके साथ स्टाम्प शुल्क से जुड़े प्रावधानों में संशोधन करने की योजना है।

इन बदलावों के बाद डेढ़ लाख मकानों की मंजूरी देने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार इन परियोजनाओं का निर्माण कार्य भी शुरू कराना चाहती है। हालांकि, फिलहाल ये सभी प्रावधान प्रस्तावित नीति के प्रारूप का हिस्सा हैं।

क्या इन योजनाओं से गरीब परिवारों के लिए मकान खरीदना आसान होगा? इसका जवाब नीति के अंतिम स्वरूप और जमीन की उपलब्धता से मिलेगा।

आवास नीति का लाभ मिलने के लिए नियमों में संशोधन जरूरी होगा। इसके अलावा परियोजनाओं के लिए जमीन और बजट की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण रहेगी। सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था में निजी बिल्डरों की भागीदारी अहम होगी। अंतिम नीति जारी होने के बाद ही वास्तविक प्रावधान स्पष्ट हो सकेंगे।

Jitendra Shrivastava
By Jitendra Shrivastava

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