MP हाईकोर्ट ने पटवारियों की याचिका की खारिज, स्वामित्व योजना में रजिस्ट्री कराने का रास्ता साफ

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने स्वामित्व योजना के तहत निजी आबादी भूमि के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेजों का निष्पादन करने के लिए पटवारियों को अधिकारी नियुक्त करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि प्रदेश के सभी 55 जिलों में लागू सरकारी आदेश को केवल सात जिलों के पटवारियों की ओर से चुनौती देना उचित नहीं है। खासकर तब, जब याचिका प्रतिनिधिक क्षमता में दायर की गई हो और उसका असर प्रदेश के सभी पटवारियों पर पड़ सकता हो।
55 जिलों में लागू आदेश को सात जिलों के पटवारियों ने दी थी चुनौती
जस्टिस विशाल मिश्रा की सिंगल बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई। याचिका प्रांतीय पटवारी संघ, भोपाल की ओर से दायर की गई थी। इसमें राज्य सरकार के 13 अगस्त 2026 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत स्वामित्व योजना के अंतर्गत संबंधित क्षेत्रों के पटवारियों को दस्तावेजों के निष्पादन के लिए अधिकारी नियुक्त किया गया था।
सरकार ने कहा- 20 हजार से ज्यादा रजिस्ट्रियां हो चुकी हैं
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रुपराह और उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने 2 जून 2026 को स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के लिए निर्देश जारी किए थे। इसी के तहत राज्य सरकार ने पटवारियों को दस्तावेजों के निष्पादन के लिए नामित किया है। सरकार ने कोर्ट को बताया कि आदेश जारी होने के बाद अब तक 20 हजार से अधिक रजिस्ट्रियां निष्पादित की जा चुकी हैं।
पहले भी दायर हुई थी याचिका
सरकार की ओर से यह दलील भी दी गई कि इसी मामले में पहले याचिका दायर की गई थी, जिसे 25 सितंबर 2026 को वापस ले लिया गया था। साथ ही याचिकाकर्ता यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि सरकारी आदेश से पटवारियों को वास्तव में क्या नुकसान हो रहा है। सरकार ने कहा कि मध्यप्रदेश में कुल 55 जिले हैं, जबकि संघ ने केवल सात जिलों के पटवारियों की ओर से याचिका दायर की। बाकी जिलों के पटवारी इस व्यवस्था के तहत काम कर रहे हैं और वहां आदेश को चुनौती नहीं दी गई है। इन दलीलों और मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।




















