PU Special :एमपी में नगर निकायों के विकास का नया मॉडल, अब बजट खर्च के साथ सामाजिक और पर्यावरणीय नतीजों का भी होगा आकलन

अशोक गौतम, भोपाल। इस पहल के तहत नगर निकायों को अपनी आय बढ़ाने के नए रास्ते तलाशने और विकास के लिए निजी निवेश जुटाने के सुझाव दिए जाएंगे। भोपाल और इंदौर सहित आसपास के शहरी क्षेत्रों में निवेश योग्य परियोजनाओं की पहचान कर उन्हें पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाएगा। इसके ड्राफ्ट इसी महीने जारी किए जाने की तैयारी है।
नगर निकायों के लिए स्वैच्छिक होगी बीआरएसआर व्यवस्था
सरकार ने नगरीय निकायों में बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट (बीआरएसआर) के सिद्धांतों को स्वैच्छिक रूप से अपनाने की पहल की है। मूल रूप से यह सूचीबद्ध कंपनियों के लिए सेबी का ईएसजी रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क है, लेकिन मध्यप्रदेश में इसे स्थानीय जरूरतों के अनुसार तैयार किया जा रहा है। इसमें वित्तीय व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण, श्रमिक कल्याण, नागरिक सेवाओं और सुशासन से जुड़े आंकड़ों को एक साझा रिपोर्टिंग ढांचे में शामिल किया जाएगा।
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नागरिक सेवाओं से लेकर कर्मचारियों तक का होगा आकलन
कंपनियों के लिए तैयार बीआरएसआर व्यवस्था में मध्यप्रदेश के नगर निकायों के संदर्भ में नागरिक, सेवा उपयोगकर्ता, वार्ड, निगम कर्मचारी, ठेकेदार, सार्वजनिक परिसंपत्तियां और नगरीय सेवाएं रिपोर्टिंग का आधार बनेंगी। प्रत्येक प्रमुख आंकड़े के लिए डेटा का स्रोत और जिम्मेदार अधिकारी तय किया जाएगा। इसके साथ ही आंकड़ों की गणना, सत्यापन और अनुमोदन की प्रक्रिया भी निर्धारित होगी, ताकि रिपोर्ट में पारदर्शिता बनी रहे।
भोपाल-इंदौर में निवेश परियोजनाओं की बनेगी सूची
भोपाल और इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं वाली परियोजनाओं की पहचान कर उन्हें एक पोर्टल पर प्रदर्शित करने की योजना है। निवेशक इन अवसरों को देखकर अपने प्रस्ताव सरकार के सामने रख सकेंगे। इससे शहरी विकास की योजनाओं में निजी निवेश को जोड़ने और परियोजनाओं के लिए नए वित्तीय संसाधन जुटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
भोपाल में कचरा प्रबंधन और जमीन के बेहतर इस्तेमाल पर जोर
भोपाल में संभावित परियोजनाओं के तहत वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा और जल सहित अन्य संसाधनों के बेहतर उपयोग पर ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा झुग्गी क्षेत्रों का पुनर्विकास, बहुमंजिला आवास, नए बाजार, कॉलोनियां और सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इसके लिए भीमनगर, भेल क्षेत्र और शिवाजीनगर सहित अन्य संभावित विकास क्षेत्रों को चिह्नित किया जा रहा है।
इंदौर इकोनॉमिक रीजन-2047 के विकास की तैयारी
इंदौर की योजना में आसपास के जिलों को जोड़कर इंदौर इकोनॉमिक रीजन-2047 विकसित करने का प्रस्ताव है। इसमें निवेश, रोजगार, उद्योग और हॉर्टिकल्चर को बढ़ावा देने के साथ जल स्रोतों के संरक्षण और वर्षाजल संचयन पर जोर रहेगा। हुकुमचंद मिल की जमीन का विकास, रिंग रोड के आसपास व्यावसायिक-औद्योगिक कॉम्प्लेक्स, उज्जैन में धार्मिक पर्यटन, धार-पीथमपुर में औद्योगिक हब और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जुड़े आर्थिक क्षेत्रों को विकसित करने की संभावनाएं शामिल हैं।
क्रेडिट रेटिंग के साथ विकास मॉडल की भी होगी पहचान
नगर निकायों की क्रेडिट रेटिंग उनकी कर्ज चुकाने की क्षमता बताती है, जबकि बीआरएसआर से उनके विकास मॉडल की जिम्मेदारी, पारदर्शिता और टिकाऊपन का आकलन होगा। कचरा प्रबंधन, सीवेज के पानी का दोबारा उपयोग, ऊर्जा संक्रमण और कार्बन क्रेडिट जैसे क्षेत्रों में भी इससे नई परियोजनाओं के लिए वित्तीय आधार तैयार किया जा सकेगा। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया कि बीआरएसआर रिपोर्ट तैयार की जा रही है और निकायों को अपनी आय के स्रोत चुनकर उनके आधार पर काम करना होगा, ताकि भोपाल, इंदौर और आसपास के निकाय विकास के साथ कमाई के नए रास्ते भी अपना सकें।




















