सस्पेंड सीएसपी नेहा पच्चीसिया को फिलहाल राहत नहीं, जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप; 21 सितंबर को अगली सुनवाई

जबलपुर। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी। कुठला थाने में दर्ज एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिका में नेहा पच्चीसिया ने खुद को झूठा फंसाए जाने का दावा किया है और अंतरिम सुरक्षा के रूप में कोई सख्त कार्रवाई नहीं किए जाने की राहत मांगी है।
एफआईआर को चुनौती देने हाईकोर्ट पहुंचीं
जमीन घोटाले के मामले में नेहा पच्चीसिया ने कटनी के कुठला थाने में दर्ज हुई एफआईआर को चुनौती दी है। याचिका में दावा किया गया है कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। वह दो छोटे बच्चों की मां हैं, जिनके पालन-पोषण की जिम्मेदारी उसी पर है। इसी आधार पर याचिका में अंतरिम सुरक्षा के रूप में कोई सख्त कार्रवाई न किए जाने की राहत हाईकोर्ट से मांगी गई है।
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राज्य सरकार ने जांच में सहयोग नहीं करने की दलील दी
मामले पर हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे और अधिवक्ता प्रियांक अग्रवाल ने दलीलें रखीं। राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह और शासकीय अधिवक्ता अमित पांडे पेश हुए। रूपराह ने कहा कि याचिकाकर्ता जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं।
लुक आउट सर्कुलर की प्रक्रिया हुई शुरू
राज्य शासन की ओर से यह भी कहा गया कि नेहा पच्चीसिया के विदेश जाने की आशंका के चलते उनके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह भी दलील दी गई कि वह सह-आरोपियों के साथ मिलीभगत में हैं। इसके अलावा निचली अदालत से उनकी अग्रिम जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है।
आपत्तिकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप
सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े अधिवक्ता अवनीश तिवारी ने खुद को आपत्तिकर्ता आकाश लोधी का वकील बताते हुए याचिकाकर्ता पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल को जान से मारने की धमकी दी जा रही है और शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है।
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बिना वकालतनामा पक्ष रखने पर कोर्ट ने दी हिदायत
हालांकि, यह स्पष्ट होने पर कि अधिवक्ता अवनीश तिवारी ने कोई वकालतनामा दाखिल नहीं किया है, हाईकोर्ट ने उन्हें भविष्य में अधिक सतर्क रहने की हिदायत दी। कोर्ट ने बिना वकालतनामा के पक्ष न रखने को लेकर उन्हें सख्त चेतावनी भी दी। मामले में अब राज्य सरकार के जवाब के बाद 21 सितंबर को अगली सुनवाई होगी।




















