जबलपुर, भोपाल और इंदौर के मास्टर प्लान में देरी पर हाईकोर्ट नाराज, अफसरों से मांगा व्यक्तिगत शपथ पत्र

जबलपुर। भोपाल, इंदौर और जबलपुर शहर के मास्टर प्लान अब तक न बन पाने पर मप्र हाईकोर्ट ने गुरुवार को कड़ी नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक रूसिया की डिवीजन बेंच ने नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के डायरेक्टर से कहा है कि वे व्यक्तिगत शपथ पत्र देकर बताएं कि मास्टर प्लान क्यों नहीं बन पा रहा है? मामले पर अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।
यह याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव की ओर से दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि जबलपुर शहर बिना किसी वैध मास्टर प्लान के विकास के दौर से गुजर रहा है। पिछला मास्टर प्लान 2021 में ही अपनी अवधि पूरी कर चुका है, लेकिन पिछले 5 साल से नया प्लान तैयार नहीं किया गया, जो अवैधानिक है।
शहर का दायरा बढ़ा, पर नीति पुरानी
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आखिरी मास्टर प्लान 1 अक्टूबर 2008 को लागू हुआ था। तब शहर का विकास क्षेत्र 245 वर्ग किमी (109 गांव) था। वर्ष 2014 की अधिसूचना के बाद दायरा बढ़कर 400 वर्ग किमी (171 गांव) हो गया है, जिससे पुराना मास्टर प्लान पूरी तरह अप्रासंगिक हो चुका है।
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पूरे शहर को है नए प्लान का इंतजार
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने डिवीजन बेंच को बताया कि नया मास्टर प्लान न होने के कारण शहर में सभी विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसके कारण लोग अपनी जमीन विकसित ही नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा 2014 में जोड़े गए 60 गांवों को भी विकास का इंतजार है।
बड़े शहरों में क्यों रुका है मास्टर प्लान?
वैसे यह याचिका सिर्फ जबलपुर शहर के मास्टर प्लान को लेकर दाखिल की गई है। सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने कहा कि सिर्फ जबलपुर ही नहीं, भोपाल और इंदौर के मास्टर प्लान भी अभी तक अटके हुए हैं। ऐसे में जरूरी है कि नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव और टीएनसीपी के डायरेक्टर अपने व्यक्तिगत शपथ पत्र देकर इस देरी का कारण बताएं।
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