Naresh Bhagoria
27 Jan 2026
बस्ती। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से इंसाफ की एक मजबूत मिसाल सामने आई है। जिला उपभोक्ता आयोग ने रेलवे की लापरवाही को गंभीर मानते हुए विभाग पर 9 लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना ठोका है। यह फैसला 7 साल पुराने मामले से जुड़ा है, जिसमें ट्रेन की देरी ने एक छात्रा के भविष्य पर गहरा असर डाला था। लेटलतीफी के चलते वह अपने जीवन की सबसे अहम परीक्षा में शामिल ही नहीं हो सकी।
आयोग ने इसे सिर्फ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि छात्रा के अधिकारों का उल्लंघन माना और रेलवे को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। और रेलवे के खिलाफ बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है।
दरअसल, नीट की छात्रा से जुड़ा यह मामला 2018 का है। बस्ती की रहने वाली छात्रा समृद्धि मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम NEET देने के लिए घर से निकली थी। उसे लखनऊ स्थित जय नारायण पीजी कॉलेज के परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचना था। इसके लिए उसने बस्ती से इंटरसिटी सुपरफास्ट ट्रेन का टिकट लिया था। जहां ट्रेन का निर्धारित समय सुबह 11 बजे लखनऊ पहुंचने का था।
छात्रा रिपोर्टिंग टाइम को ध्यान में रखते हुए पूरी तैयारी के साथ ट्रेन में सवार हुई थी, क्योंकि उसे 12.30 बजे तक परीक्षा केंद्र में रिपोर्ट करना था। लेकिन ट्रेन करीब ढाई घंटे की देरी से लखनऊ पहुंची। इस अप्रत्याशित देरी की वजह से समृद्धि समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सकी और उसे NEET देने का मौका ही नहीं मिला। एक झटके में उसका पूरा साल खराब हो गया और मेहनत पर पानी फिर गया।
ट्रेन की लगातार देरी से हुए नुकसान के बाद छात्रा ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। उसने अपने वकील प्रभाकर मिश्रा के माध्यम से 20 लाख रुपये के मुआवजे की मांग करते हुए मामला दर्ज कराया। इस पर रेल मंत्रालय, रेलवे के महाप्रबंधक और स्टेशन अधीक्षक को नोटिस जारी किए गए। सुनवाई के दौरान रेलवे ने यह तो स्वीकार किया कि ट्रेन लेट हुई थी, लेकिन देरी की ठोस वजह साफ तौर पर नहीं बता पाया। आयोग ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए रेलवे को निर्देश दिया कि वह 45 दिन के भीतर छात्रा को 9 लाख 10 हजार रुपये की मुआवजा राशि का भुगतान करे।
7 साल तक चले इस केस के बाद आखिरकार छात्रा को न्याय मिला है। उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जज अरमजीत वर्मा और सदस्य अजय प्रकाश सिंह ने मामले में रेलवे को दोषी ठहराया। जिसके बाद आयोग ने रेलवे पर 9 लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया, जो सीधे छात्रा को दिया जाएगा। दूसरी ओर आयोग ने यह भी साफ किया कि अगर तय समयसीमा के भीतर मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया, तो रेलवे को इस राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। इस फैसले को रेलवे की जवाबदेही तय करने वाली एक अहम नजीर माना जा रहा है।