न्यूयॉर्क। मिशगन की एक लोकल एस्टेट सेल में महज 30 डॉलर (2,892 रुपए) में खरीदी गई पेंटिंग ने न्यूयॉर्क में 1,352,600 डॉलर ( 13 करोड़ ,4 लाख, 11हजार, 740 रुपए ) की चौंकाने वाली कीमत (45,086 गुना कीमत) पर बिककर सबको हैरान कर दिया। आर्ट एक्सपर्ट्स ने इसकी पहचान शिकागो की जानी-मानी सरियलिस्ट पेंटर गर्ट्रूड एबरक्रॉम्बी की 1951 में बनी खोई हुई कलाकृति के रूप में की है। एल्डरमैन मेरियम्स शेल्स नाम की यह आर्टवर्क लगभग 75 सालों से गायब थी और इस साल गर्मियों में अचानक फिर से सामने आई। 1 अक्टूबर को फ्रीमैन ऑक्शन हाउस की पोस्ट-वॉर एंड कंटेम्पररी आर्ट सेल में इस पेंटिंग ने एबरक्रॉम्बी के करियर का अब तक का सबसे बड़ा ऑक्शन वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया। यह फाइनल प्राइस एक्सपर्ट्स के शुरुआती अनुमान से कहीं ज्यादा था। नीलामी से पहले इसकी कीमत $150,000 से $250,000 के बीच आंकी गई थी। बोली $80,000 से शुरू हुई और इसे हासिल करने के लिए पांच टेलीफोन बिडर्स और कई ऑनलाइन बिडर्स के बीच जबरदस्त होड़ देखने को मिली। फ्रीमैन के मुताबिक, $1,352,600 की क्लोजिंग प्राइस में बायर्स प्रीमियम शामिल है, जबकि इसकी हैमर प्राइस $1.06 मिलियन रही। इसके साथ ही यह एबरक्रॉम्बी की पहली पेंटिंग बन गई है जिसने ऑक्शन में $1 मिलियन का आंकड़ा पार किया है।
अंधेरे कोने में रखी थी पेंटिंग
एस्टेट सेल में सिग्नेचर पर पड़ी कलेक्टर की नजरइस दुर्लभ खोज की कहानी जुलाई में शुरू हुई, जब रिकॉर्ड्स और मिड-सेंचुरी फर्नीचर के एक कलेक्टर मिशिगन की एक एस्टेट सेल में पहुंचे। तब तक वहां का ज्यादातर सामान बिक चुका था। गैराज की तरफ जाने वाले हॉलवे के एक अंधेरे कोने में उन्हें लगभग 8x11 इंच की एक छोटी सी पेंटिंग रखी दिखी। इस पेंटिंग में हल्के बैकग्राउंड पर सीपियों का एक समूह दर्शाया गया था। कलेक्टर का ध्यान तुरंत उस पर लिखे नाम ने खींचा, "एबरक्रॉम्बी" और साथ में साल 1951 दर्ज था। कलेक्टर ने इस पेंटिंग के लिए 30 डॉलर का भुगतान किया, क्योंकि उन्हें अंदाजा हो गया था कि यह सिग्नेचर किसी महत्वपूर्ण कलाकार का हो सकता है।
पेंटिंग के बारे में जानने के लिए की रिसर्च
बाद में उन्होंने इस पर और रिसर्च की तो उन्हें एबरक्रॉम्बी की प्रदर्शनी 'द होल वर्ल्ड इज ए मिस्ट्री' के बारे में जानकारी मिली, जो मिडवेस्ट में टूर कर रही थी। यह एग्जीबिशन 27 मार्च से 19 जुलाई, 2026 तक मिल्वौकी आर्ट म्यूजियम में आयोजित की गई थी और इसमें म्यूजियम और प्राइवेट कलेक्शन से ली गई लगभग 80 पेंटिंग्स को प्रदर्शित किया गया था। कलेक्टर की इस पड़ताल से एक सटीक कनेक्शन सामने आया।
पुराने दस्तावेज से पता चला कीमती है
एग्जीबिशन के कैटलॉग में 1952 के 'शिकागो ट्रिब्यून' की एक तस्वीर छपी थी, जिसमें 'एल्डरमैन मेरियम्स शेल्स' को उसके ओरिजिनल फ्रेम में दिखाया गया था। साथ में वे असली सीपियां भी थीं, जिनका चित्रण पेंटिंग में किया गया था। इस पुराने दस्तावेज ने यह साबित करने में मदद की कि एस्टेट सेल में मिली साधारण सी दिखने वाली पेंटिंग वही खोई हुई कलाकृति है जो दशकों से गायब थी। बाद में एबरक्रॉम्बी की एक्सपर्ट और रूजवेल्ट यूनिवर्सिटी में आर्ट हिस्ट्री की प्रोफेसर एमेरिटा डॉ. सुसान वेनिंगर ने इसकी प्रामाणिकता को कन्फर्म किया।
नौ सीपियां और एक अनोखी खूबी
1951 में बनी 'एल्डरमैन मेरियम्स शेल्स' में स्लेट-ग्रे सतह पर नौ सीपियों को कलात्मक तरीके से सजाया गया है। एक शंक्वाकार सीप गहरे रंग की दीवार पर धागे से लटकी हुई नजर आती है। इससे इस छोटी सी पेंटिंग में एक अजीब सा, हवा में तैरने जैसा सरियल एहसास पैदा होता है। इन सीपियों का कनेक्शन शिकागो के एल्डरमैन रॉबर्ट मेरियम से था। वे हाइड पार्क में रहते थे, यह वही इलाका था जहां एबरक्रॉम्बी भी रहती थीं और काम करती थीं।