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एक ही समय पर 4 देशों के साथ भारतीय सेना का शक्ति प्रदर्शन: अमेरिका, UAE, कजाखस्तान और मंगोलिया से चल रहे वॉर-गेम्स

राजस्थान से लेकर औली और चौबटिया तक चला मिलिट्री एक्सरसाइज का महा-अभियान, भारतीय सैन्य कूटनीति के नए युग का संकेत
 एक ही समय पर 4 देशों के साथ भारतीय सेना का शक्ति प्रदर्शन: अमेरिका, UAE, कजाखस्तान और मंगोलिया से चल रहे वॉर-गेम्स
KAZIND' का 9वां संस्करण ओस्केमेन में चल रहा है।

नई दिल्ली। भारतीय सेना ने एक ही समय में चार देशों की सेनाओं के साथ सैन्य अभ्यास किया है। अमेरिका के साथ भारत का द्विपक्षीय युद्धाभ्यास 'युद्ध अभ्यास' का 22वां संस्करण राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज और उत्तराखंड के औली में आयोजित किया गया। इस अभ्यास में अलास्का की 11वीं एयरबोर्न डिवीजन के आर्कटिक-ट्रेंड अमेरिकी जवानों ने हिस्सा लिया, ताकि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में संयुक्त अभ्यास किया जा सके। इसके कुछ ही दिन बाद, उत्तराखंड के चौबटिया में UAE के साथ 'एक्सरसाइज माउंटेन गार्डियन 2026' शुरू हुई। यह अभ्यास पहाड़ी युद्ध और ड्रोन ऑपरेशन पर फोकस था, जिसमें भैरव बटालियन और UAE की माउंटेन इन्फैंट्री बटालियन की टुकड़ियों ने भाग लिया। वहीं उत्तर में, कजाकिस्तान के साथ 'KAZIND' का 9वां संस्करण ओस्केमेन में चल रहा है, जिसमें मुख्य रूप से गढ़वाल राइफल्स के 60 जवान शामिल हैं। इसके साथ ही, इस सप्ताह पिथौरागढ़ में मंगोलिया के साथ 'एक्सरसाइज नोमैडिक एलिफेंट' का 18वां संस्करण संपन्न हुआ।

दिख रहा बदली भारतीय कूटनीति का तालमेल

इन वॉर-गेम्स का लगभग एक साथ आयोजन भारतीय सैन्य कूटनीति के विस्तार को दर्शाता है। दशकों तक भारत की रक्षा साझेदारियां शीत युद्ध के दौर की गुटनिरपेक्षता की नीति से निर्धारित होती थीं, जिसके चलते औपचारिक सैन्य जुड़ाव सीमित रखा जाता था। अब यह तस्वीर काफी बदल चुकी है। द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास अब विदेश नीति के एक प्रैक्टिकल टूल बन गए हैं, जो भारत को कई देशों की सेनाओं के साथ इंटरऑपरेबिलिटी विकसित करने में मदद कर रहे हैं।

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अमेरिका से गहरे होते सैन्य संबंध

अमेरिका के साथ मिलिट्री एक्सरसाइज़ भारत के गहरे होते डिफेंस-टेक्नोलॉजी रिश्तों को साबित करती है। वहीं, UAE के साथ होने वाली एक्सरसाइज़ इन दो रणनीतिक साझेदारों के बीच बढ़ते डिफेंस रिश्तों को दिखाती है। काज़िंद  (KAZIND) भारत को सेंट्रल एशिया से जोड़े रखती है,  तो 'नोमैडिक एलिफेंट' (Nomadic Elephant)  मंगोलिया के साथ सहयोग बनाए रखती है। मंगोलिया चीन और रूस के बीच बसा देश है जो लगातार अपनी साझेदारियों में विविधता लाने की कोशिश करता रहा है।

जान पाते हैं दूसरे देश की सेना को

भारत की ज़मीन पर इन एक्सरसाइज़ को आयोजित करने के अपने फायदे हैं। इससे बड़ी संख्या में भारतीय सैनिकों को इन सेनाओं की रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाओं के साथ-साथ उनके उपकरणों के बारे में जानने का मौका मिलता है। इससे भारत को एक्सरसाइज के इलाके और लक्ष्यों को नियंत्रित करने और अपनी रणनीतियों को परखने के लिए एक्सरसाइज़ को अपनी जरूरत के हिसाब से ढालने की सुविधा मिलती है। ये एक्सरसाइज आने वाली सेनाओं के सामने भारत का आत्मविश्वास और क्षमता भी दिखाती हैं, जिससे भारत की स्थिति सिर्फ एक भागीदार के तौर पर नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार के तौर पर मजबूत होती है।

रूस के साथ अभ्यास सर्दियों में होगा

सेना के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रूस के साथ भारत की हर दो साल में होने वाली एक्सरसाइज 'इंद्र' (Indra)  इस साल के आखिर में होगी। हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं की गई है। यह मिलिट्री संबंध इन्हीं साझेदारियों तक सीमित नहीं हैं। सेना नियमित रूप से फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम और जापान जैसी अन्य प्रमुख सेनाओं के साथ भी एक्सरसाइज़ करती है। नौसेना की बात की जाए तो  अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ मालाबार (Malabar) जैसी अपनी अलग एक्सरसाइज करती हैं।

मिलती हैं नई जानकारियां

इनसे भारतीय सैनिकों को अलग-अलग उपकरणों, रणनीतियों और युद्ध के माहौल से परिचित होने का मौका मिलता है। साथ ही कई स्तरों पर आपसी तालमेल (interoperability)  बनाने और विदेशी सेनाओं के सामने अपने देश में बने सिस्टम को प्रदर्शित करने का मौका मिलता है। ऐसे देश के लिए जिसकी रणनीतिक आजादी की परीक्षा अक्सर उसके पड़ोसी देशों द्वारा ली जाती है, इतने अलग-अलग तरह के साझेदारों के साथ एक ही समय में एक्सरसाइज करने की क्षमता यह दिखाती है कि भारत ने दुनिया के मंच पर अपने लिए कितनी जगह बनाई है।

 

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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