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मछली पकड़ने वाले जहाज से बना समुद्री खोज का प्लेटफॉर्म: एरिक श्मिट के जहाज फाल्कोर ने 13 लाख किमी समुद्र का बनाया नक्शा

गूगल के पूर्व CEO एरिक श्मिट और वेंडी श्मिट ने 1981 के पुराने जहाज को रिसर्च वेसल में बदला, 1000+ वैज्ञानिकों ने किया इस्तेमाल, अब इटली में गाइया ब्लू के नाम से कर रहा है काम
मछली पकड़ने वाले जहाज से बना समुद्री खोज का प्लेटफॉर्म: एरिक श्मिट के जहाज फाल्कोर ने 13 लाख किमी समुद्र का बनाया नक्शा
फाल्कोर

न्यूयॉक। गूगल के पूर्व CEO एरिक श्मिट और उनकी पत्नी वेंडी श्मिट ने एक पुराने फिशरी प्रोटेक्शन वेसल को समुद्र विज्ञान के लिए समर्पित एक परोपकारी रिसर्च प्लेटफॉर्म में बदल दिया। साल 2022 तक इस जहाज पर 1,000 से अधिक वैज्ञानिकों ने काम किया और समुद्र तल के 13 लाख वर्ग किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र की मैपिंग की।

1981 का है जहाज, रेनोवेट करने में लगे 2 साल

श्मिट ओशन इंस्टीट्यूट के मुताबिक, फाल्कोर नाम का यह जहाज मूल रूप से 1981 में मत्स्य सुरक्षा के लिए बनाया गया था। श्मिट दंपत्ति ने 2009 में श्मिट ओशन इंस्टीट्यूट की स्थापना के समय इसे खरीदा था। यह संस्थान समुद्री रिसर्च और नई खोजों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाया गया है। दो साल तक चले बड़े रेनोवेशन और मॉडिफिकेशन के बाद, फाल्कोर को दुनिया के पहले फुल-टाइम परोपकारी रिसर्च शिप में तब्दील कर दिया गया। यह पूरे साल वैज्ञानिकों को बिना किसी शुल्क के उपलब्ध था।

इटली की नेशनल रिसर्च काउंसिल को दान किया

जहाज को रिटायर करने के बजाय, श्मिट ओशन इंस्टीट्यूट ने फाल्कोर को इटली के सबसे बड़े रिसर्च संगठन कॉन्सिग्लियो नाजियोनाले डेले रिसेर्चे (CNR) को दान कर दिया। CNR के अंतर्गत देशभर में 88 संस्थान और समुद्री विज्ञान से जुड़े 450 से अधिक शोधकर्ताओं का नेटवर्क काम करता है। CNR के अधीन आने के बाद जहाज का नाम बदलकर 'गाइया ब्लू' कर दिया गया है और अब यह भूमध्य सागर सहित अन्य समुद्री क्षेत्रों में रिसर्च ऑपरेशन चला रहा है। श्मिट ओशन इंस्टीट्यूट की सह-संस्थापक वेंडी श्मिट ने कहा कि एक दशक की शानदार खोजों और वैज्ञानिक उपलब्धियों के बाद, वह और एरिक फाल्कोर के लिए CNR  से बेहतर भविष्य की कल्पना नहीं कर सकते थे। उन्होंने भरोसा जताया कि यह संस्था समुद्री खोज, ओशन साइंस को आगे बढ़ाने और समुद्र के अद्भुत रहस्यों को लोगों तक पहुंचाने की इस जहाज की विरासत को जारी रखेगी।

जहाज से होती नई खोजों को देखना चाहते हैं

एरिक श्मिट ने भी इसी भावना को दोहराया। उन्होंने CNR के वैज्ञानिक अनुभव और प्रतिभाशाली शोधकर्ताओं में निवेश के ट्रैक रिकॉर्ड का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें यह संगठन फाल्कोर के लिए एक आदर्श नया घर लगता है। उन्होंने कहा कि वह यह देखने के लिए उत्साहित हैं कि समुद्र में फाल्कोर के निरंतर संचालन से भविष्य में और कौन-कौन सी नई खोजें सामने आएंगी।

वैज्ञानिक समुदाय के लिए लाभकारी

CNR की अध्यक्ष प्रोफेसर मारिया चियारा कैरोजा ने इस दान को CNR और इटली के पूरे वैज्ञानिक समुदाय के लिए बेहद लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि इससे उन अंतरराष्ट्रीय रिसर्च संस्थानों और विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग को मजबूती मिलेगी, जो भूमध्यसागरीय बेसिन पर अध्ययन कर रहे हैं। यह क्षेत्र मानव सभ्यता के सबसे प्राचीन केंद्रों में से एक है और मानवीय गतिविधियों से काफी प्रभावित रहा है। उन्होंने आगे कहा कि यह जहाज इटली के वैज्ञानिकों को यूरोपीय और अन्य वैश्विक प्रोजेक्ट्स के तहत कई वर्षों तक समुद्र में रिसर्च करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करेगा।

1000 से अधिक वैज्ञानिकों को दी जगह

संस्थान के अनुसार, अपने कार्यकाल के दौरान फाल्कोर ने कुल 81 वैज्ञानिक अभियान पूरे किए और 1,056 अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों को अपने डेक पर जगह दी। विभिन्न महासागरों में समुद्री अनुसंधान परियोजनाओं का समर्थन करते हुए इस जहाज ने पृथ्वी के 12 से अधिक चक्कर के बराबर दूरी तय की। इस जहाज की मदद से कई महत्वपूर्ण खोजें भी संभव हुईं, जिनमें ऑस्ट्रेलिया की ग्रेट बैरियर रीफ में मिली 500  मीटर ऊंची कोरल रीफ, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पास गहरे समुद्र में खोजा गया कोरल गार्डन और बहुत दुर्लभ ग्लास ऑक्टोपस का अनोखा फुटेज फुटेज शामिल है।

बड़े जहाज के साथ जारी है समुद्री मिशन

फाल्कोर को दान करने के बाद श्मिट ओशन इंस्टीट्यूट ने समुद्री रिसर्च से अपना कदम पीछे नहीं खींचा, बल्कि एक और भी बड़े और आधुनिक जहाज के साथ अपने मिशन को आगे बढ़ाया। संस्थान ने फाल्कोर (टू)' नामक नया रिसर्च वेसल तैयार किया। उसे 2022 की शुरुआत में लॉन्च किया गया था और इसमें अत्याधुनिक समुद्री तकनीक लगाई गई है। 110 मीटर लंबा यह नया जहाज पुराने फाल्कोर से काफी बड़ा है। इस नए जहाज ने संस्थान के मुख्य उद्देश्य को बरकरार रखा है- दुनिया का एकमात्र ऐसा चैरिटी-आधारित रिसर्च जहाज संचालित करना, जो अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है।

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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