Manisha Dhanwani
23 Jan 2026
Shivani Gupta
22 Jan 2026
Manisha Dhanwani
22 Jan 2026
सुकमा। नक्सलवादियों को सरेंडर के लिए तैयार करने वाली छत्तीसगढ़ सरकार अपने वादे पूरे करने में पीछे नहीं हट रही है। सरकार ने सरेंडर करने वाले नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उन्हें रोजगार से जोड़ रही है। ऐसा ही प्रयास सुकमा जिले में किया गया है। जिले में शांति का मार्ग अपनाने वाले आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास को गति देने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक सराहनीय कदम उठाया है।
कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के निर्देश एवं जिला पंचायत सीईओ मुकुन्द ठाकुर की उपस्थित में पुनर्वास केंद्र में विशेष शिविर आयोजित कर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के लाभों से सरेंडर करने वाले नक्सलियों को जोड़ा गया। मनरेगा कार्ड धारक परिवारों को उनके ही गांव में 100 दिनों का वैधानिक रोजगार उपलब्ध कराया जाता है, साथ ही 261 रुपए दैनिक मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित किया जाता है।
शिविर के दौरान सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों ने योजना का लाभ लेने और जॉबकार्ड बनवाने हेतु सहमति व्यक्त की। प्रशासन की पारदर्शी और प्रोत्साहनात्मक प्रक्रिया के फलस्वरूप 62 पुरुष एवं 43 महिला, कुल 105 आत्मसमर्पित नक्सलियों के जॉबकार्ड बनाकर वितरण किए गए। इसके अतिरिक्त आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहन देते हुए आजीविका डबरी निर्माण, बकरी शेड, मुर्गी शेड, सूअर शेड जैसे हितग्राहीमुखी कार्यों की प्रक्रियाओं और लाभों की भी जानकारी दी गई, जिससे आत्मसमर्पित युवक और महिलाएं भविष्य में स्थायी आय के साधन विकसित कर सकें। शिविर के दौरान पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ और राजनांदगांव में हाल ही में महाराष्ट्र मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ जोन के केंद्रीय समिति सदस्य रामधेर मज्जी सहित 12 माओवादी नेताओं ने हथियार पुलिस के सामने डालकर मुख्यधारा में वापसी की थी। इस सरेंडर ने राज्य में कानून और व्यवस्था को मजबूत करने का नया मोड़ ला दिया। गौरतलब है कि इन नक्सलियों से सरेंडर करने की अपील राजनांदगांव जिले की एसपी अंकिता शर्मा ने की थी।
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में 30 नवंबर को 37 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। इनमें 12 महिलाएं भी शामिल थीं। सरेंडर करने वालों में से 27 नक्सली ऐसे थे जिन पर कुल 65 लाख रुपये का इनाम घोषित था। सभी नक्सलियों ने ‘पूना मारगेम’ (पुनर्वास से सामाजिक एकीकरण तक) पहल के तहत पुलिस और CRPF अधिकारियों के सामने हथियार डाल दिए थे।