भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य सभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने के बाद 18 लोगों की मौत पर न्यायिक जांच की मांग की है। सिंह ने कहा कि जब तक 2-4 मौत के बारे में पता चला सब शांत बैठे रहे, लेकिन जब मृतकों की संख्या बढ़ी तो सब एक दूसरे को टोपी पहनाने लगे। सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए अपनी मांग रखी।
पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने लिख कि 'इंदौर मेरे बचपन का शहर, मेरे राज्य का सबसे विकसित शहर और देश का सबसे स्वच्छ शहर है। राज्य की आर्थिक राजधानी मे इसकी गिनती होती है और उसी इंदौर शहर में 18 लोग गंदा पानी पीने से मर जाते हैं। आंकड़ा जब तक 2/4 मौत का रहा किसी ने सांस नहीं ली लेकिन मौतों की गिनती बढ़ने लगी तो जिम्मेदारी की टोपी सब दूसरे को पहनाना शुरू कर दिए। मंत्री अफ़सर को, अफसर मेयर को, मेयर व्यवस्था को और व्यवस्था..घंटा की लड़ाई पर उलझ गई।'
दिग्विजय सिंह ने लिखा कि 'प्रभारी मुख्यमंत्रीजी से कोई सवाल नहीं पूछ रहा कि हर दूसरे दिन शहर में आते हैं और वो महज मौत का मुआवजा देकर चुप क्यों हो गए? कुछ ट्रांसफ़र और मुआवजे से शहर का कलंक नहीं धुलता। मैं इस हादसे की न्यायिक जांच की मांग करता हूं। पब्लिक के सामने सुनवाई हो और हाईकोर्ट के सिटिंग जज से इसकी जांच करायी जाए। मौत के मुआवजे से जिंदगी नहीं लौटती। गलतियों पर पर्दा डालने की बजाय गलतियों की ज़िम्मेदारी तय हो और उन्हें दण्डित किया जाए। जय सिया राम।'
दिल्ली में कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इंदौर में दूषित पानी से 18 लोगों की मौत के मामले में कहा कि हम मांग करते हैं कि इस लापरवाही की तत्काल जांच की जाए और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा इसके लिए आदेश दिया जाए। साथ ही, भाजपा सरकार को जवाबदेह ठहराने के लिए सुप्रीम कोर्ट स्तर की स्वतंत्र जांच कराई जाए। केवल इसी तरह के हस्तक्षेप से इस भयावह विफलता के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह त्रासदी दशकों से चली आ रही व्यवस्थागत विफलता को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत अभियान जैसे प्रमुख कार्यक्रमों के बावजूद, भाजपा सरकार स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित करने में बार-बार विफल रही है।