Naresh Bhagoria
20 Jan 2026
अशोक गौतम,भोपाल। इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे पानी पीने से 18 से ज्यादा मौतों के बाद अब नगरीय विकास एवं आवास विभाग वर्षों पुरानी पाइपलाइनों का सर्वे करा रहा है। इसकी रिपोर्ट निकायों को दो हफ्ते के अंदर देना है। इसके बाद जहां की पाइपलाइन पुरानी हो गई हैं, वहां नई पाइपलाइन डाली जाएगी। इसके अलावा एक और बदलाव किया जा रहा है। अब आयरन और सीमेंट के बजाय सभी जगह प्लास्टिक (HDPE) की पाइपलाइन डाली जाएगी। निजी कॉलोनियों को भी इस नियम को फॉलो करना होगा।
निकायों को आयरन व सीमेंट की पाइपलाइन को 10-15 साल बाद बदलना था। जबकि केंद्र ने शहरों में सीवेज और पानी की पाइपलाइन बदलने के लिए अमृत-1 और अमृत 0.2 योजना लॉन्च की थी। इसमें निकायों को पुरानी पाइप लाइन बदलने के लिए प्रस्ताव देना था, लेकिन निकायों ने नहीं दिया, जिसके परिणामस्वरूप इंदौर के भगीरथपुरा सहित कई शहरों में दूषित और गंदा पानी सप्लाई की शिकायतें बढ़ रही हैं।
भोपाल, इंदौर, जबलपुर व ग्वालियर सहित अन्य बड़े शहरों के पुरानी कॉलोनियों में सीमेंट और आयरन की ही पाइप लाइनें लगाई गई हैं, क्योंकि 20 साल पहले न तो प्लास्टिक की पाइपलाइन लगती थी और न ही बाजार में इनकी सप्लाई थी। कई जगह यह पाइपलाइनें नालों से होकर गुजरती है, जिससे पाइपलाइन टूटी होने के कारण नाले और पीनी का पानी आपस में मिलते रहते हैं। महंगी होने के कारण निकाय इन्हें डालने से परहेज करते थे। वहीं बड़े शहरों में कॉलोनाइजरों ने कॉलोनियां डेवलप की है, इन्होंने कॉलोनियों की लागत कम करने के लिए ज्यादातर सीवेज लाइन सीमेंट गुणवत्ता विहीन पाइपलाइनें डाली है।
इसकी मुख्य वजह है कि प्लास्टिक की पाइपलाइन की लाइफ 35-50 साल के लिए होती है, जबकि सीमेंट और आयरन की पाइप लाइन की लाइफ 10 से 12 साल होती है। आयरन और सीमेंट की पाइप लाइन शहरों में उस समय डाली गई थीं, जब पीएचई के पास पानी सप्लाई और सीवेज नेटवर्क का जिम्मा था।
जबलपुर के रेलवे स्टेशन, घमापुर और पुराने भोपाल में 30 साल से अधिक समय की पाइपलाइन है। आधारताल और गोहलपुर जैसे इलाकों में लोग नालों से होकर गुजरने वाली फूटी पाइपलाइनों से पानी पीने को मजबूर हैं। जबलपुर के अशोक नगर निवासी रामेश्वर विश्वकर्मा ने बताया कि लीकेज के कारण घरों में गंदा पानी आता है। इसी पानी को मजबूरी में पीते हैं।
भोपाल के 24 से अधिक वार्डों में करीब 600 किमी लंबी पेयजल पाइपलाइनें सीवेज लाइनों के साथ-साथ बिछी हैं। यहां इंदौर जैसे चोक होकर इंटर कनेक्ट होने की संभावना बनी रहती है। नवीबाग, इमाबाड़ा, अशोक गार्डन और गोविंदपुरा क्षेत्र जैसे घनी आबादी वाले इलाकों के करीब 4 लाख लोग रोज इसी जोखिम भरे पानी पर निर्भर है।
पुरानी पाइप लाइनों का सर्वे रिपोर्ट बुलाया गया है, इनकी जगह पर नए नेटवर्क तैयार होगा। आयरन और सीमेंट की पाइप लाइन की जगह पर प्लास्टिक (HDPE) की लाइनें डाली जाएंगी। इनकी ड्यूरिबिलिटी ज्यादा होती है, लीकेज होने पर इन्हें आसानी से दुरुस्त किया जा सकता है।
प्रदीप एस. मिश्रा, ENC, नगरीय विकास एवं आवास विभाग