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Peoples Update Special :जो हाथ कभी गेंद पकड़ने को लपकते थे, आज सहारे के लिए ढूंढते हैं पिता की उंगली

अक्टूबर 2025 में कोल्ड्रिफ कफ सिरप के सेवन से छिंदवाड़ा और बैतूल जिले में 30 बच्चों की जान चली गई थी। उस दौरान कई बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। कुछ बच्चों को दिखना बंद हो गया था। परासिया में 5 साल के एक बच्चे की आंखों की रोशनी जहरीले कफ सिरप ने छीन लीं, ऐसे में उसके परिजन भी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
जो हाथ कभी गेंद पकड़ने को लपकते थे, आज सहारे के लिए ढूंढते हैं पिता की उंगली
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    श्याम साहू, छिंदवाड़ा। 'मेरा बेटा बच गया, लेकिन अब मेरी उंगली पकड़कर चलता है। डॉक्टर कहते हैं कि अब खतरा नहीं, लेकिन मैं खुद को कैसे समझाऊं कि मेरा बेटा जिंदा होकर भी पहले जैसा नहीं रहा।' यह कहते हुए बेटे का हाथ कसकर थाम लेते हैं। वह कहते हैं- 'बेटे के जो हाथ कभी गेंद पकड़ते थे, आज मेरी उंगली ढूंढते हैं। उसकी जब भी नींद खुलती है, वह सिहर उठता है। माता-पिता के बिना एक पल भी नहीं रह पाता। पहले गली में दौड़ता था, अब खड़ा होता है तो  पहले पूछता है—पापा, आप यहीं हो न?' 5 साल के बेटे कुनाल की दास्तां सुनाते-सुनाते पिता टिंकू यदुवंशी फफक- फफक कर रोने लगे।

    115 बाद जिंदगी की जंग जीती

    छिंदवाड़ा जिले के परासिया के जाटाछापर में रहने वाला कुनाल जहरीले कफ सिरप के कहर से 115 दिन बाद जिंदगी की जंग जीतकर घर तो आ गया, लेकिन उसकी आंखों की रोशनी चली गई। वह केजी-2 में पढ़ता था, जब यह घटना हुई। पिता टिंकू बताते हैं-कुनाल चल सकता है, लेकिन बिना सहारे के नहीं। एक कदम आगे बढ़ाने से पहले मेरा या मां का हाथ चाहिए। खिलौने अब उसके लिए बस आवाज हैं। दूसरे बच्चे खेलते हैं, तो चुपचाप बैठकर उनकी आवाजें सुनता है। वह कहते हैं-घर लौटने के बाद कुनाल ने सबसे पहले पूछा—पापा, मैं अपनी मर्जी से कब खेल पाऊंगा? यह सवाल याद कर मेरा दिल टूट जाता है। सीढ़ी चढ़नी हो या दरवाजा पार करना, वह रुक जाता है। कहता है कि पापा पहले आप चलो। मां दिनभर उसके आसपास रहती है। मैं काम पर जाता हूं, लेकिन मन घर में लगा रहता है। हम उसकी आंखें बन गए हैं। कुनाल के मामा फौज में हैं। जब भी वह घर आते, कहता था मैं बड़ा होकर मामा की तरह सेना में जाकर देश सेवा करूंगा, लेकिन अब नींद से डर जाता है। 

    8 लाख खर्च हुए, 4.25 लाख सरकारी मदद मिली

    कुनाल के पिता टिंकू बताते हैं-बेटे के इलाज में जमा पूंजी खर्च हो गई। दो भैंस बेच दी, उधार लिया। इलाज पर करीब 8 लाख खर्च हुए। इसमें 4.25 लाख रुपए की सरकार से मदद मिली। उनकी मांग है कि सरकार सभी प्रभावित परिवारों को एक-एक करोड़ मुआवजा दे और मासूमों की जान से खेलने वाले दोषियों को फांसी की सजा दी जाए। 

    रिधोरा के प्रतीक के पेट में है इंफेक्शन

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    जहरीले कफ सिरप की चपेट में रिधोरा का डेढ़ साल का बच्चा प्रतीक पवार भी आ गया था। वह घर तो लौट आया है, लेकिन अभी पूरी तरह स्वस्थ नहीं है। प्रतीक के पिता संजय पवार बताते हैं-बेटे के इलाज में 8 लाख खर्च हो गए, लेकिन संतोष की बात है कि बेटा 114 दिन बाद ठीक होकर घर आ गया। सरकार से 2.5 लाख की सहायता मिली थी। अभी प्रतीक के पेट में इंफेक्शन है। इलाज के लिए हर आठ दिन में नागपुर चेकअप के लिए ले जाना पड़ता है।

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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