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Peoples Update Special :बिजली चोरी और तकनीकी लॉस से मध्यप्रदेश को 2,665 करोड़ का नुकसान

मप्र में ATNC Loss रोकने में मध्य और पूर्व क्षेत्र बिजली कंपनियां फिसड्डी साबित हो रही हैं। 533 करोड़ यूनिट की नुकसान से औसत विद्युत खरीदी लागत 5 रुपए प्रति यूनिट के अनुसार 2,665 करोड़ रुपए का नुकसान मप्र को हुआ है।
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बिजली चोरी और तकनीकी लॉस से मध्यप्रदेश को 2,665 करोड़ का नुकसान
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    संतोष चौधरी,भोपाल। मप्र में विद्युत वितरण कंपनियां लाख कोशिशों के बाद भी तकनीकी और वाणिज्यिक हानि (ATNC Loss) रोक नहीं पा रही हैं। इसमें बिजली चोरी भी शामिल है। इसके चलते कंपनियों को वित्तीय वर्ष 2024-25 में तय मापदंडों से 533 करोड़ यूनिट ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा है। अब इस नुकसान की दो तिहाई भरपाई कंपनियां करेंगी, जबकि बाकी एक तिहाई का भार उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई बिजली दरों के रूप में उठाना पड़ेगा।

    सत्यापन याचिका में हुआ खुलासा

    इस 533 करोड़ यूनिट की औसत विद्युत खरीदी लागत 5 रुपए प्रति यूनिट के अनुसार 2,665 करोड़ रुपए होती है। ATNC लॉस के चौंकाने वाले आंकड़ों का खुलासा मप्र पॉवर मैनेजमेंट कंपनी और प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा मप्र विद्युत नियामक आयोग में दायर की गई सत्यापन याचिका 2024-25 में हुआ है। 

    कंपनियों ने स्वीकारा

    बिजली चोरी और तकनीकी हानियों को रोकने में मध्य क्षेत्र और पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनियां फिसड्डी हैं। केंद्र ने आरडीएसएस स्कीम के तहत एटीएनसी लॉस को 12 से 15 प्रतिशत करने का लक्ष्य तय किया है।

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    बीते सालों में विद्युत हानि (%)

    कंपनी          2022-23  2023-24

    पूर्व क्षेत्र             27.33    28.04

    मध्य क्षेत्र          22.89    25.70

    पश्चिम क्षेत्र       12.60    12.33

    कंपनी का प्रदर्शन बेहतर 

    सत्यापन याचिका के अनुसार, पश्चिम क्षेत्र कंपनी इंदौर ने बेहतर प्रदर्शन किया है। उसे निर्धारित लक्ष्य 13.40 के मुकाबले मात्र 8.87 प्रतिशत हानि वास्तविक रूप से हुई है। इससे उसे 164 करोड़ यूनिट यानी 820 करोड़ रुपए की बचत हुई। इसे रेग्युलेशन के अनुसार उपभोक्ताओं और कंपनियों में बांटा जाएगा।

    सरकारी दावे 

    सरकार का दावा है कि पूर्व क्षेत्र में 6 लाख 8 हजार 544 स्मार्ट मीटर और मध्य क्षेत्र में करीब 25 हजार स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। विद्युत हानि के  संबंध में एसीएस (ऊर्जा)नीरज मंडलोई से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

    इन वजहों से हो रहा नुकसान  

    जब तक बिजली चोरी और अनियमितिताओं पर सख्त कार्रवाई, अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और जमीनी स्तर पर निगरानी नहीं बढ़ाई जाएगी, तब तक विद्युत हानि पर नियंत्रण संभव नहीं है।

    राजेंद्र अग्रवाल, बिजली मामलों के जानकार, जबलपुर

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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