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Raipur:MBBS इंटर्न डॉक्टरों का पैदल मार्च, स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर सड़क पर उतरे

15,900 से 30 हजार करने की मांग, मेकाहारा से मुख्यमंत्री निवास तक मार्च,MBBS इंटर्न डॉक्टरों ने अपनी मांगों को शासन तक पहुंचाने के लिए मेकाहारा अस्पताल से मुख्यमंत्री निवास की ओर पैदल मार्च किया। प्रदर्शन को डॉक्टरों ने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन बताया। बड़ी संख्या में इंटर्न डॉक्टर इसमें शामिल हुए और स्टाइपेंड वृद्धि की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद की।
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MBBS इंटर्न डॉक्टरों का पैदल मार्च, स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर सड़क पर उतरे

रायपुर: राजधानी रायपुर में MBBS इंटर्न डॉक्टरों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शुक्रवार को शांतिपूर्ण पैदल मार्च निकाला। इंटर्न डॉक्टर वर्तमान करीब ₹15,900 मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30 हजार करने की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अस्पतालों में मरीजों की देखभाल, इमरजेंसी सेवाओं और स्वास्थ्य व्यवस्था में लगातार जिम्मेदारी निभाने के बावजूद उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है।

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मेकाहारा से मुख्यमंत्री निवास तक मार्च

MBBS इंटर्न डॉक्टरों ने अपनी मांगों को शासन तक पहुंचाने के लिए मेकाहारा अस्पताल से मुख्यमंत्री निवास की ओर पैदल मार्च किया। प्रदर्शन को डॉक्टरों ने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन बताया। बड़ी संख्या में इंटर्न डॉक्टर इसमें शामिल हुए और स्टाइपेंड वृद्धि की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद की।

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15,900 स्टाइपेंड से नाराजगी

इंटर्न डॉक्टरों के मुताबिक वर्तमान में उन्हें करीब ₹15,900 प्रतिमाह स्टाइपेंड मिल रहा है। उनका कहना है कि इंटर्नशिप के दौरान वे अस्पतालों में नियमित रूप से मरीजों की देखभाल के साथ इमरजेंसी सेवाओं और अन्य चिकित्सकीय कार्यों में जिम्मेदारी निभाते हैं। बढ़ती महंगाई और काम के दबाव को देखते हुए स्टाइपेंड ₹30 हजार प्रतिमाह किया जाना चाहिए।

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बैठक में क्या हुआ? प्रतिनिधियों ने जताई नाराजगी

इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधियों के अनुसार, दोपहर 12 बजे CME की ओर से विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न प्रतिनिधियों को बैठक के लिए बुलाया गया था। प्रतिनिधियों को उम्मीद थी कि बैठक में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर सकारात्मक चर्चा होगी, लेकिन उनका दावा है कि बातचीत के दौरान समाधान के बजाय फीस और कॉलेज बजट को लेकर सवाल उठाए गए।

हॉस्टल बजट हटा दूं क्या? बैठक पर सवाल

इंटर्न डॉक्टरों का दावा है कि बैठक में उनसे यह सवाल किया गया कि फीस कई समय से नहीं बढ़ी है, क्या उसे बढ़ा दिया जाए। साथ ही हॉस्टल बजट को लेकर भी सवाल किए गए। डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की बातचीत से उन्हें लगा कि उनकी मांग पर समाधान तलाशने के बजाय दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

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हम सुविधाएं बंद कराने नहीं आए

इंटर्न डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी कॉलेज की सुविधा बंद कराने या छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की नहीं है। उनका कहना है कि सरकार अपने बजट और नीतिगत स्तर पर ऐसा रास्ता निकाले, जिससे इंटर्न डॉक्टरों को उनके काम और जिम्मेदारियों के अनुरूप सम्मानजनक स्टाइपेंड मिल सके।

सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें

इंटर्न डॉक्टरों ने सरकार से वर्तमान 15,900 स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹30 हजार प्रतिमाह करने की मांग की है। इसके साथ ही समस्याओं पर दबाव के बजाय सकारात्मक संवाद, सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण तथा इंटर्न डॉक्टरों की मांगों पर जल्द निर्णय लेने की मांग रखी गई है।

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सेवा भी करेंगे, अधिकार की आवाज भी उठाएंगे

इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि वे मरीजों की सेवा से पीछे नहीं हटेंगे। उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि सम्मानजनक स्टाइपेंड, बेहतर कार्य वातावरण और अपने भविष्य को लेकर है। डॉक्टरों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग सरकार तक पहुंचाते रहेंगे।

PREM

मै People's Updates रायपुर,छग में CHIEF EDITOR के पद में कार्यरत हूँ।अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत...Read More

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