Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

एमबी थर्मल पॉवर प्लांट ने लगाई बिजली रेट बढ़ाने की पिटीशन, 945 करोड़ की FGD यूनिट लगाई, बिजली 25 पैसे महंगी करने की तैयारी

Follow on Google News
एमबी थर्मल पॉवर प्लांट ने लगाई बिजली रेट बढ़ाने की पिटीशन, 945 करोड़ की FGD यूनिट लगाई, बिजली 25 पैसे महंगी करने की तैयारी

संतोष चौधरी, भोपाल। मप्र का निजी क्षेत्र का एमबी थर्मल पॉवर प्लांट विषैली गैस (सल्फर डायऑक्साइड) के प्रभाव को कम करने के लिए 945 करोड़ रुपए का फ्यूल गैस डीसल्फराइजेशन (एफजीडी) यूनिट लगाने की भरपाई अब बिजली उपभोक्ताओं से करने की तैयारी में है। कंपनी ने एफजीडी के एवज में मप्र विद्युत नियामक आयोग में सप्लीमेंट्री टैरिफ पिटीशन दायर कर बिजली महंगी करने की अनुमति मांगी है। यदि आयोग अनुमति देता है तो प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 25 पैसे अधिक चुकाने पड़ सकता है।

केंद्र सरकार ने करीब एक दशक पहले देशभर के सभी 600 थर्मल पॉवर प्लांट के लिए एफजीडी यूनिट लगाना अनिवार्य किया था, ताकि विषैली गैसों का प्रभाव कम किया जा सके।

सूत्रों के अनुसार, एमबी पॉवर प्लांट लिमिटेड ने 21 और 31 मार्च 2024 को अनूपपुर स्थित 600-600 यूनिट वाली अपनी दोनों इकाइयों में चीन से आयात की गई एफजीडी यूनिट लगाई थी। मप्र पॉवर मैनेजमेंट लि. इस पॉवर प्लांट की कुल बिजली में से 35 प्रतिशत खरीदती है। अब प्लांट ने फिक्स चार्ज और एनर्जी चार्ज के बतौर हर साल 50 करोड़ रुपए की डिमांड की है।

वहीं, इस संबंध में ऊर्जा विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि जब आयोग हमें बुलाएगा तो हम अपना पक्ष रखेंगे। पॉवर मैनेजमेंट कंपनी प्लांट के जीवनकाल तक इस राशि का भुगतान करती रहेगी।

16 जुलाई को होगी जनसुनवाई

नियामक आयोग ने एमबी पॉवर प्लांट की पिटीशन पर 30 जून तक दावे-आपत्तियां मंगाई हैं। इस पर 16 जुलाई को जनसुनवाई होगी। इसके बाद आयोग इस कंपनी की पिटीशन पर निर्णय लेगा। इधर, जेनको के पूर्व अतिरिक्त एडिशनल मुख्य अभियंता राजेंद्र अग्रवाल ने इस याचिका पर लिखित आपत्ति आयोग में पेश की है।

केंद्र की कमेटी ने उठाए सवाल

इधर, केंद्र सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार अजय सूद की अध्यक्षता वाली हाई पॉवर कमेटी ने एफजीडी यूनिट की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाया है। कमेटी ने जून 2025 में अपनी रिपोर्ट में कहा- थर्मल पॉवर प्लांट में एफजीडी लगाना आवश्यक नहीं है। इसे लगाने से पर्यावरण सुधार के बजाय कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा बढ़ जाएगी।

देशभर की स्थिति

  • भारत के सिर्फ 8 प्रतिशत थर्मल पॉवर प्लांट में ही एफजीडी यूनिट हैं।
  • नियामक आयोगों में बिजली कंपनियों की ऐसी याचिकाएं लगातार बढ़ रही हैं।

उपभोक्ताओं पर असर

एमबी पॉवर से खरीदी जाने वाली बिजली मप्र पॉवर मैनेजमेंट कंपनी द्वारा वितरित की जाती है। यदि 25 पैसे प्रति यूनिट वृद्धि स्वीकृत हुई, तो घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं पर सीधा असर होगा।  यह कंपनी का पूंजीगत निवेश है, जिसका असर कंज्यूमर पर होगा।

एमबी पॉवर लि. का तर्क

एमबी पॉवर लिमिटेड दिल्ली मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार ने थर्मल पॉवर प्लांट में एफजीडी लगाना अनिवार्य किया है। इसी कारण हमने भी यह यूनिट लगाई है। हमने नियामक आयोग में टैरिफ को लेकर याचिका लगाई है।

केंद्र सरकार की हाई पॉवर कमेटी ने एफजीडी की स्थापना को अनावश्यक करार दिया है। आयोग में प्रस्तुत याचिका से निजी विद्युत कंपनी से खरीदी जा रही बिजली की कीमत 25 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ जाएगी। – राजेंद्र अग्रवाल, पूर्व अतिरिक्त एडिशनल मुख्य अभियंता, जेनको और याचिकाकर्ता

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

Latest Posts