CG NEWS:महासमुंद में 'मोर गांव मोर पानी 2.0' की बड़ी सफलता: 551 पंचायतों में जल संरक्षण, पहली बारिश में 31 करोड़ लीटर पानी हुआ संग्रहित

प्रेम कुमार, रायपुर। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में जल संरक्षण की अनूठी पहल अब परिणाम देने लगी है। 'मोर गांव मोर पानी 2.0' अभियान और मनरेगा के समन्वय से जिले की 551 ग्राम पंचायतों में बनाए गए लाखों जल संरक्षण ढांचे पहली ही बारिश में भर गए। जिला प्रशासन की जल संरक्षण पहल इस साल किसानों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है। सामान्य से कम बारिश के बावजूद केवल 15 दिनों की मेहनत से करीब 31 करोड़ लीटर वर्षा जल का संग्रह हुआ है। इसका असर खेतों की नमी, भू-जल स्तर और ग्रामीण जल स्रोतों से किसानों की उम्मीदों पर साफ दिखाई देने लगा है।
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गांव में रुका बारिश का पानी, किसानों को मिली राहत
महासमुंद जिले में इस वर्ष सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, लेकिन जिले के 1140 से अधिक गांवों के किसानों को इसका ज्यादा असर नहीं झेलना पड़ा। इसकी बड़ी वजह जिला प्रशासन की 'मोर गांव मोर पानी-2.0' पहल रही, जिसके तहत बड़े पैमाने पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं तैयार की गईं।
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15 दिन में बना जल संरक्षण का रिकॉर्ड
अभियान के दौरान जिले की 551 ग्राम पंचायतों में केवल 15 दिनों के भीतर 3.41 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं तैयार की गईं। इनमें रेन वॉटर हार्वेस्टिंग पिट, सोख्ता गड्ढे, ट्रेंच, चेक डैम, तालाब और कुएं शामिल हैं। इन संरचनाओं में शुरुआती बारिश के दौरान ही करीब 31 करोड़ लीटर वर्षा जल संरक्षित किया गया।
मनरेगा से मिला बड़ा सहारा
जल संरक्षण अभियान को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मनरेगा से जोड़ा गया। इसके तहत 36 हजार जल अवशोषण खंतियां, 30 हजार सतत कंटूर ट्रेंच, 8,200 स्टैगर्ड ट्रेंच, 800 आजीविका डबरी, 52 गेबियन, 51 डाइक, कुएं, बोरवेल रिचार्ज और अन्य संरचनाओं का निर्माण कराया गया।पहली ही बारिश में इन सभी में पानी भर गया, जिससे भू-जल पुनर्भरण की प्रक्रिया शुरू हो गई।
Gram panchayat parshada (B) mahasmoudजनभागीदारी बनी सबसे बड़ी ताकत
इस अभियान की खास बात यह रही कि ग्रामीणों ने श्रमदान के जरिए बड़ी संख्या में जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया। गांव-गांव में लोगों ने खुद आगे आकर बारिश के पानी को गांव में रोकने का संकल्प लिया, जिससे जल संरक्षण जन आंदोलन का रूप ले सका।
125 नोडल अधिकारियों ने संभाली निगरानी
महासमुंद जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हेमंत नंदनवार के अनुसार मई 2026 में शुरू हुए इस अभियान की निगरानी के लिए 125 नोडल अधिकारियों की टीम बनाई गई थी। इसमें पंचायत, वन विभाग, जल संसाधन, कृषि, राजस्व, जनपद और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल रहे।
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ऐसे निकाला गया 31 करोड़ लीटर पानी का आंकड़ा
प्रशासन के अनुसार हर जल संरक्षण संरचना की लंबाई, चौड़ाई और गहराई के आधार पर उसका जल भंडारण क्षमता का आकलन किया गया। इसके बाद सभी संरचनाओं के कुल जल संग्रहण को लीटर में परिवर्तित किया गया। अलग-अलग आकार के करीब 75 से 80 हजार सक्रिय स्ट्रक्चर में शुरुआती बारिश के दौरान लगभग 31 करोड़ लीटर पानी संग्रहित हुआ।
खेतों की नमी बढ़ी, फसलों को मिला सहारा
परसदा (ख) गांव के किसान नंदकुमार टांडे बताते हैं कि खेतों के ऊपरी हिस्से में बनाए गए रेन हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर से खेतों में लंबे समय तक नमी बनी रहेगी। इससे फसलों को सूखे का खतरा कम होगा और पशुओं को भी पानी के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।
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बढ़ा भूजल स्तर, कुएं हुए रिचार्ज
गांव के किसान लखन ध्रुव का कहना है कि पहले गांव में पानी की कमी रहती थी, लेकिन अब इन संरचनाओं की वजह से जल स्तर बढ़ा है। इससे छोटे पौधों को भी पर्याप्त नमी मिल रही है और गांव के कई कुएं दोबारा रिचार्ज होने लगे हैं।
Rain Water Harvesting system Mahasamundकलेक्टर बोले- गांव का पानी गांव में ही रहेगा
महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कहा कि अभियान का उद्देश्य गांव का पानी गांव में ही रोकना है। संरचनाओं में जमा पानी धीरे-धीरे जमीन में समाकर भूजल स्तर बढ़ाएगा और हर बारिश में यह प्रक्रिया दोहराई जाएगी। इससे भविष्य में जल संकट कम करने में मदद मिलेगी।
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प्रमुख उपलब्धियां
551 ग्राम पंचायतों में अभियान संचालित।
1140 गांवों में जल संरक्षण कार्य।
3.41 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं तैयार।
15 दिन में करीब 31 करोड़ लीटर वर्षा जल संरक्षित।
खेतों की नमी बढ़ी और कई कुएं रिचार्ज हुए।
ग्रामीणों के श्रमदान से बना सफल जल संरक्षण मॉडल।












