जबलपुर: कृषि विश्वविद्यालय में प्रशिक्षण, खेत में एआई की एंट्री आसान नहीं; मिट्टी से मौसम तक कई फैक्टर बन रहे चुनौती

जबलपुर। ऐसे में एआई से मिले सुझावों को खेत की स्थानीय परिस्थितियों से जोड़कर देखना जरूरी है। यह बात आणंद, गुजरात स्थित एक्सटेंशन एजुकेशन इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ डॉ. कुणाल गुलकरी ने पीपुल्स समाचार से खास बातचीत में कही। डॉ. गुलकरी जवाहरलाल नेहरू कृषि विवि में एक ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल होने आए थे।
एआई पर पूरी तरह निर्भर होना जरूरी नहीं
डॉ. गुलकरी ने कहा कि एआई पर पूरी तरह निर्भर होने के बजाय किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए इसका नॉलेज होना ज्यादा जरूरी है। भारत में अभी बड़ी संख्या में किसान एआई के कृषि उपयोग को लेकर पूरी तरह जागरूक नहीं हैं।
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कृषि अधिकारियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
किसानों में एआई के उपयोग को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए सरकार कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विभाग के अधिकारियों को एआई के उपयोग और इसकी संभावनाओं को लेकर प्रशिक्षित कर रही है। इससे कृषि क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
हर क्षेत्र में अलग होती हैं परिस्थितियां
उन्होंने बताया कि खेती में एआई का उपयोग किसी एक तकनीक या मॉडल तक सीमित नहीं किया जा सकता। अलग-अलग क्षेत्र में मिट्टी, मौसम, पानी और फसल की स्थिति बदलती रहती है। स्थानीय बाजार और किसानों के पास उपलब्ध संसाधन भी निर्णय को प्रभावित करते हैं।
महाराष्ट्र में गन्ने की खेती में उपयोग
डॉ. गुलकरी के अनुसार आणंद स्थित एक्सटेंशन एजुकेशन इंस्टीट्यूट के भारत सरकार के वेस्ट जोन में महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, गोवा और दादरा एवं नगर हवेली और दमन-दीव क्षेत्र शामिल हैं। इस जोन में कृषि विस्तार से जुड़ी गतिविधियों में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है और महाराष्ट्र में कृषि अधिकारी व किसान गन्ने की खेती में एआई का उपयोग कर रहे हैं।
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किसान की समझ के साथ तकनीक जरूरी
विशेषज्ञ के मुताबिक एआई किसान के अनुभव और कृषि विशेषज्ञ की सलाह का विकल्प नहीं, बल्कि सहयोगी तकनीक के रूप में अधिक उपयोगी हो सकता है। किसानों को एआई से मिलने वाली जानकारी को समझने, उसकी उपयोगिता परखने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इस्तेमाल करने की जानकारी देना जरूरी है, जिसमें कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र और विशेषज्ञों की भूमिका महत्वपूर्ण है।




















