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SC का बड़ा फैसला: सरकारी कर्मचारी लेबर एक्ट के दायरे में रहेंगे, स्कूल-हॉस्पिटल कर्मचारियों को भी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी विभागों, स्कूलों और अस्पतालों के कर्मचारियों को राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि श्रम कानूनों के तहत लंबित मामलों में 1978 के उद्योग संबंधी फैसले और ट्रिपल टेस्ट को आधार बनाया जा सकता है।
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SC का बड़ा फैसला: सरकारी कर्मचारी लेबर एक्ट के दायरे में रहेंगे, स्कूल-हॉस्पिटल कर्मचारियों को भी राहत
सरकारी कर्मचारी लेबर एक्ट के दायरे में रहेंगे

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी विभागों, स्कूलों और अस्पतालों में काम करने वाले कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऐसे कर्मचारी श्रम कानूनों के दायरे से बाहर नहीं होंगे और मौजूदा मामलों में 1978 में तय किए गए सिद्धांतों के आधार पर विवादों का निपटारा किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ में से 6 जजों ने माना कि इस मामले की सुनवाई संविधान पीठ द्वारा किया जाना उचित था। कोर्ट ने उद्योग की पहचान के लिए 1978 में दिए गए फैसले में तय किए गए 'ट्रिपल टेस्ट' को समय की कसौटी पर खरा माना है। हालांकि, पीठ ने कहा कि इस टेस्ट के कुछ हिस्सों को मौजूदा परिस्थितियों के हिसाब से और स्पष्ट करने की जरूरत है।

1978 में 'उद्योग' की व्यापक परिभाषा हुई थी तय

सुप्रीम कोर्ट ने 1978 में एक अहम फैसले में 'उद्योग' की व्यापक परिभाषा तय की थी। इसके तहत केवल सामान बनाने वाली फैक्ट्रियों या व्यावसायिक संस्थानों तक ही उद्योग की अवधारणा सीमित नहीं रही बल्कि कई सरकारी विभागों, स्कूलों और अस्पतालों जैसी संस्थाओं को भी इसके दायरे में माना गया। इस फैसले के बाद ऐसी संस्थाओं में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले अधिकारों का रास्ता खुला। हालांकि समय के साथ कई राज्य सरकारों और सरकारी विभागों ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट से 1978 के फैसले की समीक्षा और इसमें बदलाव की मांग की थी।

क्या है ट्रिपल टेस्ट?

उद्योग की पहचान के लिए 1978 के फैसले में एक ट्रिपल टेस्ट निर्धारित किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब कहा है कि यह टेस्ट अभी भी उपयोगी है लेकिन इसके कुछ पहलुओं को स्पष्ट किया जाना जरूरी है। इससे यह तय करने में मदद मिलती है कि किसी संस्था या गतिविधि को श्रम कानूनों के तहत 'उद्योग' माना जाएगा या नहीं।

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पुराने फैसलों पर नहीं पड़ेगा असर

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मामलों में अंतिम फैसला हो चुका है, उन्हें इस फैसले के आधार पर दोबारा नहीं खोला जाएगा। वहीं Industrial Disputes Act के तहत अदालत, ट्रिब्यूनल या Labour Authority के सामने लंबित मामलों का फैसला 1978 के सिद्धांतों के आधार पर किया जा सकता है। इससे पहले से चल रहे श्रम विवादों के निपटारे का रास्ता साफ हो गया है।

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सरकारी कर्मचारियों और संस्थानों के लिए क्यों अहम है फैसला?

इस फैसले का असर सरकारी विभागों के साथ-साथ स्कूलों, अस्पतालों और ऐसी कई संस्थाओं के कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जहां कर्मचारी और प्रबंधन के बीच सेवा संबंध मौजूद हैं। सुप्रीम कोर्ट की इस व्यवस्था से लंबित श्रम विवादों में कर्मचारियों को अपने अधिकारों के लिए कानूनी संरक्षण मिलता रहेगा। हालांकि कोर्ट ने ट्रिपल टेस्ट के कुछ हिस्सों को नए तरीके से समझाने की बात कही है। विस्तृत फैसले में इसकी व्याख्या से यह और स्पष्ट होगा कि अलग-अलग संस्थाओं और गतिविधियों को 'उद्योग' की श्रेणी में किस तरह देखा जाएगा।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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