किसानों के समर्थन में उतरे Gen-Z :भोपाल में आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार, सरकार ने बातचीत के दिए संकेत

भोपाल। मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीदी, ई-टोकन व्यवस्था और किसानों की अन्य मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन अब और तेज हो गया है। नर्मदापुरम से निकली 'किसान क्रांति पदयात्रा' भोपाल पहुंच गई है। बड़ी संख्या में किसान रानी कमलापति (RKP) रेलवे स्टेशन के पास धरने पर बैठे हैं और मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने की तैयारी कर रहे हैं।
भोपाल में हाई अलर्ट, कई रास्तों पर बैरिकेडिंग
किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी भोपाल में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। होशंगाबाद रोड, मुख्यमंत्री आवास और रानी कमलापति रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले कई मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई है। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया है। प्रशासन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर यातायात व्यवस्था में और बदलाव किए जाएंगे।
आंदोलन में Gen-Z की एंट्री
इस आंदोलन की खास बात यह है कि अब बड़ी संख्या में युवा भी किसानों के समर्थन में सामने आए हैं। Gen-Z के युवा हाथों में तख्तियां और पोस्टर लेकर प्रदर्शन में शामिल हुए। कई युवा पोस्टरों पर नारे लिखते और किसानों के साथ धरने में बैठते नजर आए। इससे आंदोलन को नया समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है।
भजन-कीर्तन और किसान गीतों से गूंजा धरना स्थल
धरना स्थल पर किसानों ने भजन-कीर्तन किया और किसान हितों से जुड़े लोकगीत गाए। प्रदर्शन के दौरान "जय जवान, जय किसान" और किसानों की मांगों के समर्थन में लगातार नारे लगाए गए। किसानों का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है।
क्या हैं किसानों की प्रमुख मांगें?
किसानों का कहना है कि ई-टोकन व्यवस्था और सीमित खरीदी के कारण बड़ी संख्या में किसान अपनी मूंग की फसल नहीं बेच पाए हैं। उनकी मुख्य मांगें हैं-
- ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीदी की मात्रा बढ़ाई जाए।
- ई-टोकन व्यवस्था खत्म की जाए या इसमें सुधार किया जाए।
- सभी पात्र किसानों की उपज की सरकारी खरीदी सुनिश्चित की जाए।
- किसानों से जुड़े लंबित मामलों का जल्द समाधान किया जाए।
हरदा में रोकने की कोशिश, फिर भी भोपाल पहुंचे किसान
भोपाल आने से पहले हरदा जिले में पुलिस ने कई किसानों और आम किसान यूनियन के पदाधिकारियों को गंजाल पुल के पास रोक लिया। किसान नेताओं का आरोप है कि करीब 25 किसानों को हिरासत में लेकर अस्थायी जेल में रखा गया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
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रिहाई के बाद किसान दोबारा आंदोलन में शामिल हुए और औबेदुल्लागंज पहुंचकर नर्मदापुरम से आई पदयात्रा में शामिल हो गए। किसानों ने कहा कि प्रशासनिक कार्रवाई से उनका आंदोलन नहीं रुकेगा।
सरकार पर किसानों की आवाज दबाने का आरोप
आम किसान यूनियन के नेता राम इनानिया ने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन किसानों की आवाज दबाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं किसान नेताओं दिनेश लेगा और केदार सिरोही ने कहा कि जगह-जगह बैरिकेडिंग के बावजूद किसान अलग-अलग रास्तों से भोपाल पहुंचने में सफल रहे।
आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन
किसान आंदोलन को कांग्रेस नेताओं का भी समर्थन मिला है। टिमरनी विधायक अभिजीत शाह ने किसानों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की। हरदा विधायक डॉ. आर.के. दोगने ने भी कहा कि यदि किसानों के साथ अन्याय हुआ तो वे भी धरने पर बैठेंगे।
CM मोहन यादव बोले- बातचीत से निकलेगा समाधान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार किसानों के हितों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि किसानों से बातचीत के लिए मंत्रियों की एक समिति बनाई गई है। कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना, मंत्री विश्वास सारंग और कृष्णा गौर किसानों से संवाद करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के सुझावों का स्वागत है, लेकिन आंदोलन के कारण आम लोगों को परेशानी न हो, इसका भी ध्यान रखा जाना चाहिए। सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास करेगी।
स्थिति पर प्रशासन की लगातार नजर
भोपाल में पुलिस और प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। मुख्यमंत्री आवास और प्रमुख सरकारी इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। फिलहाल किसान अपनी मांगों पर अड़े हैं, जबकि सरकार बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की कोशिश कर रही है। अब सभी की नजरें सरकार और किसानों के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी हैं।











