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सीहोर का झरखेड़ा दुकान घोटाला फिर गर्माया, 6 माह से FIR का इंतजार! दो IAS के पत्र भी पुलिस कार्रवाई की राह देखते रहे

झरखेड़ा पंचायत की 17 दुकानों में नियमों के उल्लंघन और वित्तीय गड़बड़ी की जांच के बाद FIR के निर्देश दिए गए, लेकिन छह माह बाद भी केस दर्ज नहीं हुआ। पुलिस दस्तावेज अधूरे बता रही है।
सीहोर का झरखेड़ा दुकान घोटाला फिर गर्माया, 6 माह से FIR का इंतजार! दो IAS के पत्र भी पुलिस कार्रवाई की राह देखते रहे
फाइल फोटो

सीहोर। ग्राम पंचायत झरखेड़ा में 17 दुकानों के निर्माण और आवंटन से जुड़ा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। जांच में नियमों के उल्लंघन और वित्तीय अनियमितताओं के तथ्य सामने आने के बाद जिम्मेदारों के खिलाफ FIR कराने के निर्देश दिए गए, लेकिन कार्रवाई अब तक थाने की फाइलों से आगे नहीं बढ़ सकी है। जिला पंचायत की ओर से 2 मार्च 2026 को FIR के लिए पत्र भेजे जाने के करीब छह माह बाद भी दोराहा थाना में मामला दर्ज नहीं होने से पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जिला पंचायत सीहोर कार्यालय ने जनपद पंचायत सीहोर के CEO को भेजे पत्र में झरखेड़ा पंचायत में निर्मित 17 दुकानों के निर्माण एवं अंतरण के संबंध में जिम्मेदार तत्कालीन सरपंच और सचिव के खिलाफ संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने को कहा था। पत्र में जांच दलों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए की गई कार्रवाई से जिला पंचायत कार्यालय को अवगत कराने के निर्देश भी दिए गए थे।

दो जांच समितियों की रिपोर्ट में नियमों पर सवाल

जिला पंचायत के पत्र के अनुसार 21 अक्टूबर 2024 को गठित जिला स्तरीय जांच दल तथा 23 दिसंबर 2025 को गठित समिति की रिपोर्ट में अनियमितताएं सामने आईं। रिपोर्ट में मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 65 तथा मध्यप्रदेश पंचायत (स्थावर संपत्ति का अंतरण) नियम 1994 के नियम 4, 5, 6, 7 और 10 के उल्लंघन का उल्लेख किया गया है।

17 दुकानों का निर्माण, रसीदों पर भी उठे सवाल

झरखेड़ा पंचायत में 2017 से 2019 के बीच 17 दुकानों के निर्माण और आवंटन को लेकर मामला सामने आया था। जांच के दौरान आरोप सामने आए कि कुछ दुकानदारों से ली गई वास्तविक राशि की तुलना में कम राशि की रसीदें दी गईं। इससे पंचायत की आय और दुकानों के आवंटन की पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई। वर्ष 2024 में सामने आई रिपोर्टिंग में दुकानदारों ने अलग-अलग राशि लेने और कम राशि की रसीद देने के आरोप लगाए थे।

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शासकीय जमीन से लेकर मंजूरी तक सवालों की लंबी फेहरिस्त

मामले की जांच में दुकानों के निर्माण के लिए शासकीय भूमि आवंटन, राजस्व रिकॉर्ड, प्रशासकीय एवं तकनीकी स्वीकृति और मूल्यांकन संबंधी अभिलेखों को लेकर भी सवाल उठे। दुकानों के वितरण की प्रक्रिया और उससे जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात भी पूर्व की जांच रिपोर्टों में सामने आई थी।

पूर्व सरपंच-सचिव के कार्यकाल में हुआ निर्माण

मामला तत्कालीन सरपंच सविता विश्वकर्मा और सचिव मनोहर मेवाड़ा के कार्यकाल से जुड़ा बताया गया है। जांच से संबंधित रिपोर्टिंग में तत्कालीन सरपंच के पति एवं पंचायत पंच सुरेश विश्वकर्मा के कथित हस्तक्षेप का भी उल्लेख हुआ है। हालांकि किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही होगा।

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दो साल पहले भी उठी थी FIR की मांग

यह पहली बार नहीं है जब इस मामले में FIR के निर्देश दिए गए हों। पूर्व में तत्कालीन जिला पंचायत CEO आशीष तिवारी की ओर से भी पूर्व सरपंच और सचिव के खिलाफ FIR कराने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई थी। इसके बावजूद मामला आगे नहीं बढ़ा और बाद में दोबारा जांच व कार्रवाई की मांग उठती रही। अब जिला पंचायत की मौजूदा CEO सर्जना यादव द्वारा दोबारा FIR के लिए पत्र भेजे जाने के बाद मामला फिर चर्चा में आ गया है।

जांच एजेंसियों तक पहुंच चुका है मामला

झरखेड़ा पंचायत का यह मामला पहले भी प्रशासनिक स्तर से बाहर निकलकर जांच एजेंसियों और शिकायतों तक पहुंच चुका है। नवंबर 2024 की रिपोर्टिंग के अनुसार लोकायुक्त, EOW और संभागीय कमिश्नर कार्यालय की ओर से भी मामले से संबंधित जांच रिपोर्ट मांगे जाने की जानकारी सामने आई थी।

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जनपद CEO बोलीं- दस्तावेज थाना पहुंचाए

जनपद पंचायत सीहोर CEO नमिता बघेल के अनुसार मामले से संबंधित दस्तावेज दोराहा थाना को उपलब्ध करा दिए गए हैं और FIR के लिए लिखा गया है। उनके मुताबिक अब आगे की कार्रवाई थाना स्तर से की जानी है। दोराहा थाना प्रभारी राजेश सिन्हा के अनुसार जनपद कार्यालय से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में कमी है। अभियोजन का अभिमत लिया जाना बाकी है और मामले की जांच की जा रही है। ऐसे में जिला पंचायत की ओर से FIR के लिए स्पष्ट पत्र जारी होने के बावजूद कार्रवाई लंबित रहने का मुद्दा फिर चर्चा में है।

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अब सवाल कार्रवाई पर

झरखेड़ा की 17 दुकानों का मामला सिर्फ निर्माण और आवंटन तक सीमित नहीं है। जांच में नियमों के उल्लंघन, दस्तावेजों की कमी और राशि व रसीदों में अंतर जैसे गंभीर बिंदु सामने आने के बाद भी FIR लंबित है। अब सवाल यही है कि जब जांच रिपोर्ट और FIR के लिए पत्र मौजूद हैं, तो छह महीने बाद भी पुलिस कार्रवाई किस बिंदु पर अटकी हुई है? इसका जवाब संबंधित विभाग और पुलिस की अगली कार्रवाई से ही साफ होगा।

Sunil Sharma
By Sunil Sharma

सुनील शर्मा, सीहोर जिला ब्यूरो, पीपुल्स समाचार ढाई दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। दैनिक भास्कर, पत...Read More

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