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PU Special :मुश्किलों को मात देकर मुकाम तक पहुंचे इंदौर के दिव्यांग विक्रम, पैरों से लिखकर की पीएचडी, कार भी करते हैं ड्राइव !

सात साल की उम्र में हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से दोनों हाथ गंवाने वाले विक्रम अग्निहोत्री ने पैरों से लिखकर अर्थशास्त्र में पीएचडी हासिल की है। उन्होंने दिव्यांग विद्यार्थियों की आर्थिक स्थिति पर शोध किया। 5 अक्टूबर को दीक्षांत समारोह में उन्हें पीएचडी की उपाधि दी जाएगी।
मुश्किलों को मात देकर मुकाम तक पहुंचे इंदौर के दिव्यांग विक्रम, पैरों से लिखकर की पीएचडी, कार भी करते हैं ड्राइव !
विक्रम अग्निहोत्री

प्रभा उपाध्याय, इंदौर। सात साल की उम्र में एक हादसे ने विक्रम अग्निहोत्री के दोनों हाथ छीन लिए थे। तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही बच्चा एक दिन पैरों को अपनी कलम बनाएगा और उन्हीं पैरों से लिखकर अर्थशास्त्र में पीएचडी हासिल करेगा। जिंदगी ने हाथों का साथ जरूर छोड़ा, लेकिन विक्रम ने हौसले का साथ नहीं छोड़ा। अर्थशास्त्र विषय में उन्होंने “समाज में विशेष रूप से सक्षम विद्यार्थियों की आर्थिक स्थिति” विषय पर पीएचडी पूरी की है। अब 5 अक्टूबर को दीक्षांत समारोह में उन्हें पीएचडी की उपाधि दी जाएगी।

कैसे हुआ हादसा, कौन बना सहारा

विक्रम अग्निहोत्री ने बताया कि बचपन में हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से उनके दोनों हाथ काटने पड़े थे। इसके बाद माता-पिता के सहयोग से उन्होंने पैरों से लिखना सीखा। लिखने से लेकर कंप्यूटर पर टाइपिंग तक का काम वे पैरों से ही करते हैं।

पीएचडी के दौरान क्या रही चुनौती

विक्रम अग्निहोत्री ने बताया कि पीएचडी के दौरान सबसे बड़ी चुनौती दिव्यांग विद्यार्थियों से जुड़े विश्वसनीय आंकड़े जुटाना रही। विक्रम के अनुसार, इस वर्ग से संबंधित आंकड़े आसानी से उपलब्ध नहीं हैं और उपलब्ध जानकारी भी पूरी तरह व्यवस्थित नहीं है। उन्होंने विभिन्न संस्थाओं और सामाजिक संपर्कों के माध्यम से प्राथमिक स्तर के आंकड़े जुटाकर शोध को आगे बढ़ाया।

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शोध में क्या सामने आया

विक्रम के मुताबिक शोध में सामने आया कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षा और रोजगार के अवसर हासिल करने में सबसे अधिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। सरकारी योजनाओं का लाभ तभी प्रभावी ढंग से पहुंच सकता है, जब उनका जमीनी स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन हो। उनका सुझाव है कि दिव्यांग बच्चों को शुरुआती स्तर से ही शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। 

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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