भोपाल। मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर के भागीरथपुरा के दूषित पानी मामले को लेकर किए Water Audit के निष्कर्ष सार्वजनिक किए। एक प्रजेंटेशन के जरिए उन्होंने इंदौर के विभिन्न इलाके के पानी के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के स्वच्छता और विकसित भारत के दावे जमीनी हकीकत में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। नेता प्रतिपक्ष ने अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर इंदौर में स्वच्छ पानी सप्लाई करने की मांग की है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भगीरथपुरा से लेकर इंदौर के कई गरीब व मेहनतकश लोगों की बस्तियों में नलों से आ रहा दूषित, बदबूदार और सीवेज मिला पानी इस बात का प्रमाण है कि यह केवल एक इलाके की समस्या नहीं, बल्कि पूरे शहरी प्रशासन के सिस्टम का फेल्योर है।
नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि उन्होंने 6 जनवरी 2026 को भगीरथपुरा का दौरा किया। उन्होंने बताया कि स्थानीय नागरिकों और पत्रकारों के अनुसार, अब तक लगभग 20 मौतें हो चुकी हैं। पीड़ित इलाके में जाने से रोकने की कोशिश की गई; पुलिस बैरिकेडिंग कर नाकाबंदी करती रही। उन्होंने कहा कांग्रेस पार्टी कैमरे के लिए नहीं, बल्कि इंसानियत के नाते शोक-संतप्त परिवारों के साथ खड़े होने पहुंची थी। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार दबाव में दिखे, कई लोग खुलकर बोलने से डर रहे थे। लोगों ने मुआवजे, इलाज और भविष्य की सुरक्षा को लेकर पीड़ितों ने गंभीर शिकायतें दर्ज कराईं।

सिंघार ने 7 जनवरी 2026 को इंदौर के कई इलाक़ों में Water Audit किया। उन्होंने बताया यह कोई औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि नलों तक जाकर पानी की वास्तविक स्थिति देखने का प्रयास था। जिन क्षेत्रों का निरीक्षण किया गया उनमें मदीना नगर, खजराना, भूरी टेकरी, बर्फानी धाम, कृष्णा बाग, कनाडिया शामिल हैं। ये क्षेत्र भगीरथपुरा से 5 से 18 किलोमीटर दूर हैं। ये वे इलाके हैं जहां इंदौर के गरीब, मजदूर और मेहनतकश वर्ग के लोग रहते हैं।
मदीना नगर : बकाया के नाम पर भारी वसूली। नियमित बिल के बावजूद गंदे पानी की आपूर्ति। शिकायतों के बावजूद निगम व जनप्रतिनिधि नदारद
खजराना : नर्मदा जल में तेज़ बदबू और प्रदूषण। पानी पीने योग्य नहीं। समस्या पूरे क्षेत्र में, कार्रवाई सीमित।
भूरी टेकरी : पानी अत्यधिक दूषित और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक। भारी गंदगी और जलभराव। वर्षों से शिकायतें, स्थायी समाधान शून्य।
कृष्णा बाग : गटर के पास से गुजरती पेयजल पाइपलाइन। सीवेज मिलावट का स्पष्ट खतरा। बुनियादी मानकों की घोर अनदेखी।
बर्फानी धाम : दूषित पानी की आपूर्ति। अव्यवस्थित जल वितरण। प्रशासन की पूर्ण उदासीनता।
कनाडिया : पानी की गुणवत्ता बेहद खराब। हर जगह एक जैसे हालात। प्रशासनिक चुप्पी और कोई सुधार नहीं।