PU Special :लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू में जांच अधिकारियों की कमी, 7 हजार शिकायतों का दबाव; दो दर्जन से ज्यादा अफसरों की जरूरत

विजय एस. गौर, भोपाल। मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराधों के खिलाफ कार्रवाई करने वाली लोकायुक्त पुलिस और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) जांच अधिकारियों की कमी से जूझ रहे हैं। दोनों एजेंसियों को मिलाकर सालभर में औसतन करीब 7 हजार शिकायतें मिलती हैं। इनमें रिश्वत, भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग से जुड़ी शिकायतों के साथ सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों से संबंधित मामले भी शामिल होते हैं। जांच अधिकारियों की कमी का असर लंबित प्रकरणों की जांच पूरी करने और अदालत में चालान पेश करने की प्रक्रिया पर पड़ रहा है। लोकायुक्त पुलिस की विशेष स्थापना के लिए आवश्यक अमला पुलिस मुख्यालय से उपलब्ध कराया जाता है। लोकायुक्त के महानिदेशक योगेश देशमुख ने जांच अधिकारियों की कमी दूर करने के लिए पुलिस मुख्यालय को करीब आधा दर्जन पत्र लिखे हैं। इनमें खास तौर पर डीएसपी और इंस्पेक्टर स्तर के दो दर्जन से ज्यादा विवेचना अधिकारियों की जरूरत बताई गई है। योगेश देशमुख के मुताबिक जांच अधिकारियों की कमी के कारण प्रकरणों की विवेचना तेजी से पूरी करने में दिक्कत आ रही है। इसका सीधा असर चालानी प्रक्रिया पर भी पड़ रहा है।
लोकायुक्त को हर साल करीब 5 हजार शिकायतें
लोकायुक्त पुलिस को सालभर में औसतन करीब 5 हजार शिकायतें प्राप्त होती हैं। इनमें सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ रिश्वत, भ्रष्टाचार तथा पद के दुरुपयोग से संबंधित शिकायतें शामिल रहती हैं। कई मामलों में जनप्रतिनिधियों से जुड़ी शिकायतें भी लोकायुक्त तक पहुंचती हैं। रिश्वत से संबंधित शिकायतों में पहले शिकायत का सत्यापन कराया जाता है। शिकायत सही पाए जाने पर आगे ट्रैप की कार्रवाई की जाती है। इसके बाद मामले की विवेचना और न्यायालय में चालान पेश करने की प्रक्रिया होती है। जांच अधिकारियों की कमी के चलते इसी पूरी प्रक्रिया पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
ईओडब्ल्यू में भी स्वीकृत पदों का करीब एक चौथाई हिस्सा खाली
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) को भी हर साल औसतन करीब 2 हजार शिकायतें मिलती हैं। इनमें आर्थिक अनियमितता और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले शामिल होते हैं। कई शिकायतों में कार्रवाई शुरू करने से पहले गोपनीय सत्यापन करना जरूरी होता है। ईओडब्ल्यू में स्थिति यह है कि स्वीकृत बल के मुताबिक भी करीब एक-चौथाई पद खाली बताए जा रहे हैं। अमले की कमी की जानकारी सामान्य प्रशासन विभाग और पुलिस मुख्यालय को भी दी जा चुकी है। ईओडब्ल्यू के महानिदेशक उपेंद्र जैन के मुताबिक विभाग में फोर्स की कमी है और स्वीकृत बल के हिसाब से भी पूरा अमला उपलब्ध नहीं है। हालांकि उपलब्ध पुलिसकर्मियों और जांच अधिकारियों का बेहतर तरीके से उपयोग करने के लिए उन्हें प्रॉपर लाइनअप किया गया है। साथ ही मामलों को ऑनलाइन करने की व्यवस्था से भी काम में सुधार किया गया है।
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7 हजार शिकायतों का सालाना दबाव
लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू को मिलाकर हर साल औसतन करीब 7 हजार शिकायतें मिलती हैं। लोकायुक्त को करीब 5 हजार और ईओडब्ल्यू को करीब 2 हजार शिकायतें प्राप्त होती हैं। इन शिकायतों में सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और पद के दुरुपयोग के आरोप शामिल होते हैं। रिश्वत के मामलों में सत्यापन के बाद ट्रैप कार्रवाई की जाती है जबकि अन्य मामलों में जांच और दस्तावेजी सत्यापन के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है। इतनी बड़ी संख्या में शिकायतों के बीच पर्याप्त जांच अधिकारियों की उपलब्धता नहीं होने से लंबित मामलों का दबाव लगातार बना हुआ है।
लोकायुक्त ने पुलिस मुख्यालय को कई बार लिखा पत्र
लोकायुक्त के महानिदेशक योगेश देशमुख ने बताया कि विभाग में खासतौर पर डीएसपी और इंस्पेक्टर स्तर के विवेचना अधिकारियों की कमी है। उनके मुताबिक इसका असर जांचों को समय पर पूरा करने के साथ-साथ चालान पेश करने की प्रक्रिया पर भी पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस समस्या को लेकर पुलिस मुख्यालय को करीब आधा दर्जन बार पत्र लिखे जा चुके हैं। आखिरी पत्र भी करीब एक माह पहले भेजा गया था। पत्रों में जांच अधिकारियों की आवश्यकता और अमले की कमी को दूर करने का अनुरोध किया गया है।
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लोकायुक्त के लिए पांच इंस्पेक्टरों के आदेश
वहीं प्रशासनिक शाखा के स्पेशल डीजी आदर्श कटियार ने बताया कि लोकायुक्त पुलिस के लिए पांच इंस्पेक्टरों के आदेश किए गए हैं। उन्होंने कहा कि अमले की पूर्ति की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। आदर्श कटियार के अनुसार उपलब्ध अमले और संबंधित विभागों की डिमांड का परीक्षण करने के बाद जरूरत के अनुसार पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की पूर्ति की जाती है। इस तरह लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू दोनों एजेंसियों के सामने एक ओर भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराधों से जुड़ी हजारों शिकायतों की जांच का दबाव है वहीं दूसरी ओर पर्याप्त जांच अधिकारियों और स्वीकृत पदों के अनुसार बल की उपलब्धता चुनौती बनी हुई है। अब लोकायुक्त के लिए पांच इंस्पेक्टरों की पदस्थापना के बाद जांच व्यवस्था पर कितना असर पड़ता है, यह आने वाले समय में सामने आएगा।



















