मप्र के टाइगर रिजर्व में नए मिजाज की तैयारी, टूरिस्ट गाइड्स सीख रहे फर्राटेदार अंग्रेजी

भोपाल। मध्यप्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व और नेशनल पार्क 3 माह के मानसून ब्रेक के बाद एक अक्टूबर से दोबारा खुलने जा रहे हैं। इससे ठीक पहले पार्क प्रबंधन ने एक नवाचारी पहल की है। इस बार सफारी के दौरान सैलानी केवल बाघों का दीदार ही नहीं करेंगे, बल्कि उन्हें जंगल का इतिहास, वन्यजीवों का व्यवहार और पर्यावरण की बारीक जानकारी भी अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुरूप मिलेगी। इसके लिए प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व और सेंक्चुरीज में टूरिस्ट व नेचर गाइड्स, जिप्सी चालकों और मैदानी अमले को फर्राटेदार अंग्रेजी का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कान्हा, बांधवगढ़ और सतपुड़ा समेत सभी रिजर्वों में ट्रेनिंग
कान्हा, बांधवगढ़, सतपुड़ा, पेंच, पन्ना और संजय दुबरी सहित अन्य टाइगर रिजर्व में इस समय प्रशिक्षण सत्र चल रहे हैं। इनमें गाइड्स और सफारी जिप्सी चालकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। कान्हा और बांधवगढ़ में जहां विदेशी पर्यटकों की आवक काफी अधिक रहती है, वहां विशेष रूप से 'कम्युनिकेशन स्किल्स' (संवाद शैली) पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। सतपुड़ा जैसे जैव-विविधता से समृद्ध पार्क में गाइड्स को पक्षियों और पेड़-पौधों के वैज्ञानिक व अंग्रेजी नामों की जानकारी दी जा रही है।
प्रशिक्षण में क्या-क्या सिखाया जा रहा है
- विदेशी सैलानियों के साथ बेहतर समन्वय बनाने के लिए बुनियादी और धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलने का अभ्यास।
- पेड़-पौधों, पक्षियों, कीट-पतंगों और स्तनधारी जीवों के अंग्रेजी व वानस्पतिक नामों की जानकारी।
- विदेशी पर्यटकों के साथ एटीकेट और मेहमाननवाजी का तरीका।
- सफारी एथिक्स और सुरक्षा: जंगल के नियमों, आपातकालीन स्थितियों से निपटने के तौर-तरीकों और सफारी के दौरान अनुशासन।
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बच्चों के साथ कर रहा हूं प्रैक्टिस
हमें सैलानियों से संवाद के लिए विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है। घर जाकर बच्चों के साथ रोजाना दो घंटे अंग्रेजी बोलने का अभ्यास करता हूं और पार्क में साथियों के साथ। इस बार विदेशी मेहमानों से अंग्रेजी में ही बात करेंगे।
-लक्ष्मीनारायण माझी, गाइड, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व
पर्यटकों को नया और पेशेवर अनुभव मिलेगा
इस पहल का मकसद प्रदेश के वन्यजीव पर्यटन को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाना और स्थानीय गाइड्स का आत्मविश्वास बढ़ाकर उनकी आजीविका में सुधार करना है। 1 अक्टूबर से सफारी पर निकलने वाले सैलानियों को एक नया और बेहद पेशेवर अनुभव मिलेगा।
-डॉ. समीता राजौरा, पीसीसीएफ (वाइल्ड लाइफ)
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