Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

आधुनिक डिजिटल क्लॉक बताएगी भारतीय परंपरा के अनुसार ‘आठ पहर’ का समय

आरआईई के रिसर्चर की ‘आठ पहर’ वाली डिजिटल क्लॉक को मिला पेटेंट, डिजिटल वॉल क्लॉक गणितीय शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा का संयुक्त निचोड़
आधुनिक डिजिटल क्लॉक बताएगी भारतीय परंपरा के अनुसार ‘आठ पहर’ का समय
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल। आधुनिक दौर में जहां डिजिटल घड़ियां सेकंड तक का समय बताती हैं, वहीं क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (आरआईई), भोपाल की नई डिजिटल वॉल क्लॉक भारतीय समय-गणना की प्राचीन परंपरा के अनुसार ‘आठ पहर’ में समय बताएगी। ‘आठ पहर’ की अवधारणा पर आधारित इस डिजिटल वॉल क्लॉक के डिजाइन को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से डिजाइन पेटेंट मिल चुका है। भारतीय पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का यह प्रयोग आरआईई के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रजत कौशिक, मनीष कुशवाहा और उनके सहयोगी विवेक यादव ने किया है।

    भारतीय समय-ज्ञान को आधुनिक रूप देने का प्रयास

    ‘आठ पहर’ भारतीय पारंपरिक समय-विभाजन की प्राचीन अवधारणा है। दिन और रात के 24 घंटों को अलग-अलग पहरों में बांटकर समय को समझने की यह परंपरा भारतीय ज्ञान प्रणाली का हिस्सा रही है। इसी अवधारणा को आधुनिक डिजिटल क्लॉक के रूप में प्रस्तुत करना इस डिजाइन की खासियत है। डिजाइन तैयार करने वाले डॉ. रजत कौशिक और मनीष कुशवाहा के अनुसार, इसका उद्देश्य केवल समय बताने वाली घड़ी तैयार करना नहीं, बल्कि भारतीय पारंपरिक समय-ज्ञान को आधुनिक शैक्षिक और तकनीकी माध्यम से लोगों तक पहुंचाना है।

    ये भी पढ़ें: बाबड़िया भाऊ में निकली डोल यात्रा, सुसज्जित विमान में भगवान श्रीकृष्ण ने किया पूरे गांव का भ्रमण

    गणित और एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग में होगी मदद

    ‘आठ पहर’ आधारित डिजिटल घड़ी का डिजाइन गणित की अवधारणाओं को समझने, एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग और नए शैक्षिक संसाधन विकसित करने में उपयोगी हो सकता है। इसके माध्यम से विद्यार्थी पारंपरिक समय-विभाजन, गणितीय गणनाओं और आधुनिक समय-प्रणाली के बीच संबंध को आसानी से समझ सकेंगे।

    इनका कहना है

    “आधुनिक डिजिटल क्लॉक राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा, अनुभवात्मक शिक्षा और नवाचार की प्राथमिकता के अनुरूप है। इसके माध्यम से आधुनिक तकनीक के साथ भारतीय परंपरा को जोड़ने का प्रयास किया गया है।”

    -डॉ. रजत कौशिक, असिस्टेंट प्रोफेसर, क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (आरआईई), भोपाल

    ये भी पढ़ें: समुद्र में दो जहाजों की टक्कर, फिर मच गई चीख-पुकार, पलभर में बदला पूरा नजारा, देखें VIDEO

    Devendra shakya
    By Devendra shakya

    Latest Posts