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रेप पीड़िता को गर्भपात की हाईकोर्ट से अनुमति, एक-दो दिन में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने अलीराजपुर की दुष्कर्म पीड़िता को गर्भपात की अनुमति दी है। कोर्ट ने एक-दो दिन में प्रक्रिया पूरी करने और डीएनए नमूना सुरक्षित रखने के निर्देश दिए।
रेप पीड़िता को गर्भपात की हाईकोर्ट से अनुमति, एक-दो दिन में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश
रेप पीड़िता को गर्भपात की हाईकोर्ट से अनुमति

इंदौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने अलीराजपुर की एक दुष्कर्म पीड़िता की गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति दे दी है। जस्टिस संदीप एन. भट्ट की एकलपीठ ने 21 सितंबर 2026 को स्वत: संज्ञान से दर्ज रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने संबंधित चिकित्सकों को पीड़िता की शारीरिक और मानसिक स्थिति का नए सिरे से परीक्षण करने के बाद गर्भपात की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि प्रक्रिया अधिमानतः एक से दो दिन के भीतर पूरी की जाए। साथ ही आपराधिक प्रकरण की जांच को ध्यान में रखते हुए भ्रूण के डीएनए नमूने सहित जरूरी फोरेंसिक साक्ष्य सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।

मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर लिया फैसला

कोर्ट के 19 सितंबर के पूर्व आदेश के पालन में सिविल सर्जन, जिला चिकित्सालय अलीराजपुर की मेडिकल बोर्ड ने 20 सितंबर को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। रिपोर्ट को अदालत ने रिकॉर्ड पर लिया। मेडिकल बोर्ड ने अपनी राय में कहा कि पीड़िता की गर्भावस्था को समाप्त किया जा सकता है और चिकित्सकीय दृष्टि से यह प्रक्रिया उचित है। इसी रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति दी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि प्रक्रिया विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में पूरी सावधानी के साथ की जाए और पीड़िता की शारीरिक तथा मानसिक फिटनेस का ताजा सत्यापन किया जाए।

24 सप्ताह से अधिक गर्भावस्था के मामलों के लिए एसओपी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 20 फरवरी 2025 को जारी अपनी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का भी उल्लेख किया। यह एसओपी दुष्कर्म या यौन उत्पीड़न के मामलों में 24 सप्ताह से अधिक की गर्भावस्था वाली पीड़िताओं के लिए प्रक्रिया तय करती है। इसके मुताबिक जब किसी दुष्कर्म पीड़िता की गर्भावस्था 24 सप्ताह से अधिक हो तो संबंधित थाना प्रभारी उसे तत्काल जिला न्यायालय या विशेष पॉक्सो न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की प्रक्रिया अपनाता है। इसके बाद अदालत बिना अलग आवेदन का इंतजार किए मामले को मेडिकल बोर्ड के पास भेज सकती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि गर्भावस्था समाप्त करना चिकित्सकीय रूप से संभव है या नहीं। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट मिलने के बाद पीड़िता और उसके परिजनों को इसकी जानकारी देकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम की मौजूदगी में प्रक्रिया पूरी की जाती है।

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डीएनए जांच के लिए भ्रूण का नमूना सुरक्षित रखने का आदेश

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि इस मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज है, इसलिए गर्भपात के दौरान प्राप्त होने वाले भ्रूण के नमूने को डीएनए जांच के लिए सुरक्षित रखा जाए। जरूरत पड़ने पर इसे अभियोजन को सौंपा जाएगा, ताकि आपराधिक मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में इसका इस्तेमाल किया जा सके। अदालत ने फोरेंसिक साक्ष्य को पॉक्सो नियम, 2020 के नियम 6(6) के अनुरूप सुरक्षित रखने के निर्देश भी दोहराए। इस तरह अदालत ने एक ओर पीड़िता की चिकित्सा जरूरत को ध्यान में रखा है, वहीं दूसरी ओर आपराधिक मामले से जुड़े साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी की है।

पीड़िता की निजता बनाए रखने पर जोर

कोर्ट ने पीड़िता की पहचान और निजता की सुरक्षा के निर्देश भी दिए हैं। गर्भपात की प्रक्रिया के दौरान चिकित्सकीय और प्रशासनिक स्तर पर उसके साथ संवेदनशील तरीके से व्यवहार करने तथा उसकी निजता बनाए रखने को महत्वपूर्ण माना गया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने फरवरी 2025 में दुष्कर्म के मामलों में गर्भावस्था से जुड़े मामलों के लिए विस्तृत प्रक्रिया तय की थी, जिसका उद्देश्य पीड़िताओं को समय पर कानूनी और चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना है।

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एमटीपी कानून में दुष्कर्म पीड़िताओं के लिए प्रावधान

अदालत के आदेश में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) एक्ट, 1971 के प्रावधानों का भी उल्लेख किया गया है। कानून और संबंधित नियमों के तहत निर्धारित परिस्थितियों में दुष्कर्म या यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं को गर्भावस्था समाप्त कराने के लिए कानूनी संरक्षण दिया गया है। अदालत ने प्रजनन संबंधी अधिकारों, निजता और शारीरिक स्वायत्तता से जुड़े पहलुओं को भी ध्यान में रखा। साथ ही इस तरह के मामलों में चिकित्सा विशेषज्ञों की राय और पीड़िता की स्थिति को महत्वपूर्ण माना गया है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब अलीराजपुर में संबंधित चिकित्सकीय टीम पीड़िता की फिटनेस का दोबारा परीक्षण करेगी और अदालत के आदेश के मुताबिक गर्भावस्था समाप्त करने की प्रक्रिया जल्द पूरी करेगी। साथ ही आपराधिक मामले की जांच के लिए आवश्यक डीएनए और अन्य फोरेंसिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाएगा।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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