हर रात खर्राटे? कहीं शरीर चुपचाप किसी बीमारी दे रहा है संकेत! वजह जानकर हो जाएंगे हैरान

हेल्थ। रात को सोते समय खर्राटों की आवाज सुनाई देना कई घरों में सामान्य बात है। कोई इसे थकान का असर मानता है तो कोई मजाक में टाल देता है। लेकिन हर खर्राटा सामान्य नहीं होता। जब सांस लेते समय गले के आसपास की मांसपेशियां ढीली पड़ती हैं और हवा का रास्ता संकरा हो जाता है, तब कंपन की वजह से खर्राटे पैदा होते हैं। कभी-कभी यही आवाज नींद में सांस की गंभीर रुकावट से भी जुड़ी हो सकती है। खासकर अगर खर्राटों के साथ अचानक सांस रुकना, हांफना या दिनभर नींद आना जैसी समस्या हो, तो इसकी वजह समझना जरूरी है।
खर्राटे आखिर आते क्यों हैं?
जब हम सोते हैं तो गले और जीभ की मांसपेशियां कुछ ढीली हो जाती हैं। अगर इस दौरान नाक या गले से हवा का रास्ता संकरा हो जाए, तो हवा तेजी से गुजरते समय आसपास के टिश्यू में कंपन पैदा करती है। यही कंपन खर्राटों की आवाज बनता है। नाक बंद होना, वजन बढ़ना, पीठ के बल सोना, शराब का सेवन और धूम्रपान जैसी चीजें कुछ लोगों में खर्राटे बढ़ा सकती हैं। उम्र बढ़ने के साथ गले की मांसपेशियों में बदलाव भी इसका एक कारण हो सकता है।
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हर खर्राटा बीमारी नहीं होता
दिलचस्प बात यह है कि खर्राटे लेने वाला हर व्यक्ति स्लीप एपनिया से पीड़ित नहीं होता। कई लोगों में यह केवल सोने की स्थिति, नाक बंद होने या गले की बनावट के कारण हो सकता है। लेकिन बहुत तेज और लगातार खर्राटों के साथ अगर व्यक्ति नींद में बार-बार जागता है या सांस लेने के लिए हांफता है, तो मामला अलग हो सकता है। स्लीप एपनिया में नींद के दौरान सांस बार-बार रुक सकती है और फिर दोबारा शुरू होती है। कई बार व्यक्ति को खुद इसका पता भी नहीं चलता।
एक अनजाना असर: दिन में भी दिख सकता है
खर्राटों की समस्या का असर केवल रात तक सीमित नहीं रह सकता। अगर नींद बार-बार टूट रही है, तो सुबह उठने के बाद भी शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिलता। इसका असर दिनभर की ऊर्जा, ध्यान और काम करने की क्षमता पर पड़ सकता है। कुछ लोगों को सुबह मुंह सूखने, सिरदर्द या चिड़चिड़ापन जैसी परेशानी महसूस हो सकती है। दिन में जरूरत से ज्यादा नींद आना भी रात की खराब नींद का संकेत हो सकता है।
पार्टनर की नींद भी हो सकती है प्रभावित
खर्राटों का एक कम चर्चित असर साथ सोने वाले व्यक्ति पर पड़ता है। लगातार तेज आवाज के कारण पार्टनर की नींद बार-बार टूट सकती है। लंबे समय तक ऐसा होने पर दोनों लोगों की नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है यानी खर्राटे सिर्फ खर्राटे लेने वाले व्यक्ति की समस्या नहीं रह जाते। इसका असर पूरे कमरे की नींद पर पड़ सकता है।
कब इसे गंभीरता से लेना चाहिए?
अगर खर्राटे कभी-कभार आते हैं तो आमतौर पर चिंता की वजह नहीं होती। लेकिन अगर हर रात तेज खर्राटे आते हैं और साथ में नींद में सांस रुकने, घुटन या हांफने की आवाज आती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। दिन में बहुत ज्यादा नींद आना भी ध्यान देने योग्य संकेत है। स्लीप एपनिया का पता लगाने के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार नींद से जुड़ी जांच की सलाह दे सकते हैं। सही कारण पता चलने के बाद ही उचित इलाज या बदलाव तय किया जाता है।
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खर्राटों को हल्के में न लें
खर्राटे कभी सामान्य आवाज हो सकते हैं, लेकिन कुछ मामलों में वे शरीर की तरफ से दिया गया संकेत भी होते हैं। सोने की स्थिति, वजन, नाक की समस्या और जीवनशैली जैसे कारणों पर ध्यान देना मददगार हो सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि लगातार तेज खर्राटों के साथ सांस रुकने जैसे संकेत दिखाई दें, तो इसे केवल आदत मानकर नजरअंदाज न करें।




















