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बार-बार हाथ-पैर में झुनझुनी को न करें नजरअंदाज, इन बीमारियों का हो सकता है संकेत!

सुबह उठते ही हाथ-पैर में सुन्नपन या झुनझुनी कई बार सामान्य कारणों से हो सकती है, लेकिन बार-बार होने पर यह डायबिटिक न्यूरोपैथी, B12 की कमी या दूसरी नसों से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकती है। जानिए कब हाथ-पैर का सुन्न होना स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति की चेतावनी हो सकता है और कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
बार-बार हाथ-पैर में झुनझुनी को न करें नजरअंदाज, इन बीमारियों का हो सकता है संकेत!
सुबह उठते ही हाथ-पैर पड़ जाते हैं सुन्न?

क्या आपको भी सुबह उठने पर हाथ-पैर में सुन्नपन या झुनझुनी महसूस होती है? कई लोग इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार यह सच में सामान्य कारणों से होता है, लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो रही है या लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

क्या है पैरेस्थीसिया?

हाथ-पैर में सुन्नपन या झुनझुनी महसूस होने की स्थिति को मेडिकल भाषा में पैरेस्थीसिया कहा जाता है। यह तब हो सकता है जब शरीर की नसों पर दबाव पड़ता है या कुछ समय के लिए उनमें रक्त का प्रवाह कम हो जाता है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने या सोने से भी नसों पर दबाव पड़ सकता है। दबाव हटने के बाद आमतौर पर रक्त संचार और नसों का काम सामान्य हो जाता है और कुछ ही समय में सुन्नपन खत्म हो जाता है।

कब सामान्य होती है समस्या?

अगर आप लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे हैं, पैर पर पैर रखकर बैठे हैं या सिर के नीचे हाथ रखकर सोए हैं, तो हाथ-पैर में झुनझुनी या सुन्नपन हो सकता है। ऐसे में शरीर की स्थिति बदलने और नसों पर दबाव कम होने के बाद यह समस्या कुछ मिनटों में ठीक हो जाती है। आमतौर पर ऐसी स्थिति चिंता का कारण नहीं होती।

बार-बार सुन्नपन हो तो रहें सावधान

अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार हाथ-पैर सुन्न होते हैं या झुनझुनी लंबे समय तक बनी रहती है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। ऐसा नसों, रीढ़ की हड्डी या मस्तिष्क से जुड़ी किसी समस्या के कारण भी हो सकता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी के अनुसार, बार-बार होने वाले या बढ़ते हुए सुन्नपन की चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है।

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ये लक्षण दिखें तो तुरंत लें मदद

अचानक शरीर के एक तरफ हाथ और पैर सुन्न हो जाएं और इसके साथ बोलने में परेशानी, देखने में दिक्कत या संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षण हों, तो यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। इसी तरह सुन्नपन के साथ मांसपेशियों में कमजोरी, चलने में परेशानी या गर्दन और पीठ में तेज दर्द हो तो इसे भी गंभीरता से लेना चाहिए।

डायबिटीज में भी हो सकता है सुन्नपन

डायबिटीज से पीड़ित लोगों में हाथ-पैर का लगातार सुन्न रहना डायबिटिक न्यूरोपैथी का लक्षण हो सकता है। लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहने से नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा विटामिन B12 की कमी, थायरॉयड और कुछ ऑटोइम्यून बीमारियों में भी हाथ-पैर में सुन्नपन और झुनझुनी हो सकती है।

मल्टीपल स्केलेरोसिस भी हो सकता है एक कारण

मल्टीपल स्केलेरोसिस (MS) एक ऑटोइम्यून न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मस्तिष्क और रीढ़ की नसों की सुरक्षात्मक परत को नुकसान पहुंचाती है। इसके शुरुआती लक्षणों में हाथ-पैर में सुन्नपन या झुनझुनी, धुंधला दिखाई देना, संतुलन बिगड़ना और मांसपेशियों में कमजोरी शामिल हो सकते हैं। कुछ लोगों में ये लक्षण कुछ समय बाद कम भी हो जाते हैं, जिसके कारण वे इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।

कब डॉक्टर से संपर्क करें?

अगर सुन्नपन कभी-कभार गलत मुद्रा में बैठने या सोने के बाद होता है और कुछ मिनटों में ठीक हो जाता है, तो आमतौर पर चिंता की बात नहीं होती। लेकिन यदि यह बार-बार हो, लगातार बना रहे, अचानक शुरू हो या इसके साथ कमजोरी, बोलने में परेशानी, देखने में दिक्कत या चलने में समस्या हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...

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