दुनिया में सबसे पहली एंटीबायोटिक दवा किसने बनाई? मेडिकल साइंस की यह कहानी जानकर रह जाएंगे हैरान

दुनिया की पहली मशहूर एंटीबायोटिक पेनिसिलिन की खोज किसने की थी? जानिए कैसे इस दवा को विकसित किया। पढ़िए पेनिसिलिन की खोज से जुड़ी पूरी दिलचस्प कहानी और मेडिकल साइंस पर इसका असर।
दुनिया में सबसे पहली एंटीबायोटिक दवा किसने बनाई? मेडिकल साइंस की यह कहानी जानकर रह जाएंगे हैरान
दुनिया की पहली एंटीबायोटिक दवा के जनक कौन थे और यह अद्भुत खोज कैसे हुई, आइए जानते हैं।

आजकल लोग किसी भी बीमारी या एलर्जी में एंटीबायोटिक दवा जरूर लेते है, एंटीबायोटिक दवाओं ने गंभीर बैक्टीरियल संक्रमणों के इलाज को आसान बनाया, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी शुरुआत कैसे हुई? कहां से आई एंटीबायोटिक दवा...दुनिया की सबसे प्रसिद्ध शुरुआती एंटीबायोटिक पेनिसिलिन की खोज ब्रिटिश वैज्ञानिक सर अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने 1928 में की थी। हालांकि, इसे प्रभावी दवा के रूप में विकसित करने में वैज्ञानिक हावर्ड फ्लोरे और अर्न्स्ट चेन की भी बड़ी भूमिका रही।

एक प्लेट पर दिखी हैरान करने वाली चीज

साल 1928 में अलेक्जेंडर फ्लेमिंग बैक्टीरिया पर रिसर्च कर रहे थे। उनकी लैब में बैक्टीरिया से भरी एक कल्चर प्लेट पर गलती से एक तरह की फफूंद उग गई। फ्लेमिंग ने देखा कि जहां यह फफूंद थी, उसके आसपास बैक्टीरिया बढ़ नहीं रहे थे। फ्लेमिंग ने इस घटना को नजरअंदाज नहीं किया। उन्होंने फफूंद पर आगे रिसर्च की और पाया कि यह एक ऐसा पदार्थ पैदा करती है, जो कई तरह के बैक्टीरिया की ग्रोथ को रोक सकता है। उन्होंने इस पदार्थ का नाम पेनिसिलिन रखा, क्योंकि फफूंद पेनिसिलियम समूह की थी।

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क्या फ्लेमिंग ने ही दवा बनाई थी?

यहां एक बात समझना जरूरी है। फ्लेमिंग ने पेनिसिलिन की खोज की थी, लेकिन उस समय इसे आसानी से शुद्ध करके बड़ी मात्रा में दवा बनाना संभव नहीं था। पेनिसिलिन अस्थिर थी और उसे शुद्ध रूप में तैयार करना काफी मुश्किल था। इसके बाद ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की टीम ने इस दिशा में काम आगे बढ़ाया। हावर्ड फ्लोरे, अर्न्स्ट चेन और उनके साथियों ने 1940 के दशक की शुरुआत में पेनिसिलिन को शुद्ध रूप में तैयार करने और इसे ज्यादा मात्रा में बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया। इसके बाद यह एक प्रभावी दवा के रूप में इस्तेमाल होने लगी।

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तीन वैज्ञानिकों को मिला नोबेल पुरस्कार

पेनिसिलिन की खोज और उसके संक्रमणों के इलाज में उपयोग को देखते हुए 1945 में अलेक्जेंडर फ्लेमिंग, हावर्ड फ्लोरे और अर्न्स्ट चेन को संयुक्त रूप से फिजियोलॉजी या मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार दिया गया। दिलचस्प बात यह है कि फ्लेमिंग की खोज काफी हद तक एक अचानक हुई वैज्ञानिक घटना से शुरू हुई थी। लेकिन उस घटना को पहचानना और उसके पीछे की वजह को समझना ही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक था। पेनिसिलिन ने मेडिकल साइंस की दिशा बदलने में बड़ी भूमिका निभाई और आगे चलकर एंटीबायोटिक दवाओं के विकास का रास्ता मजबूत हुआ।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...Read More

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