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कश्मीर-ए-दास्तान 1947-2023 : जानिए आर्टिकल-370 लागू होने से हटने तक की पूरी कहानी...

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कश्मीर-ए-दास्तान 1947-2023 : जानिए आर्टिकल-370 लागू होने से हटने तक की पूरी कहानी...
नेशनल डेस्क। जम्मू-कश्मीर की कहानी वैसे तो सदियों पुरानी है, लेकिन इससे जुड़ी धारा 370 के आगाज से अंजाम के बीच महज आठ दशक पुराना ताना-बाना है। आजादी के साथ शुरू हुई धारा 370 के पक्ष और विपक्ष में अलग-अलग दावे किए गए, 76 साल तक चले इस आर्टिकल को लेकर राजनीति भी खूब परवान चढ़ी। इसका अंतिम परिणाम सुप्रीम कोर्ट के आज आए फैसले से आजाद हो गया, जिसे 5 जजों की संविधान बेंच के सामने 26 वकीलों की 16 दिनों तक चली सुनवाई के बाद 5 सितंबर को सुरक्षित रखा गया था। अब कश्मीर को लेकर जब सुप्रीम फैसला आ गया है तो जनते हैं, इस धारा से जुड़ी हर जानकारी को...

370 के मायने

संविधान में 17 अक्टूबर, 1949 को अनुच्छेद 370 जोड़ा गया। असल में ये एक प्रावधान था, जिसमें जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा हासिल था। इसके तहत भारतीय संविधान का दायरा राज्य में सीमित हो गया था जबकि राज्य की स्वायत्तता बढ़ गई थी। जम्मू-कश्मीर का अपना अलग संविधान था, इसके तहत केंद्र से राज्य में वित्तीय आपातकाल घोषित करने की ताकत छीन ली गई थी। जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा होने के कारण यहां संविधान की धारा 356 लागू नहीं थी और राष्ट्रपति के पास राज्य सरकार को बर्खास्त करने का अधिकार तक नहीं था। यही वजह थी कि कश्मीर में RTI और CAG के कानून लागू नहीं थे। यहां के नागरिकों को दोहरी नागरिकता मिलती थी और कश्मीर का बकायदा एक अलग ध्वज भी था। यहां जब तक धारा 370 लागू थी, तब तक यहां के लोगों के लिए तिरंगे का सम्मान जरूरी नहीं था। जम्मू-कश्मीर का खुद का अलग राष्ट्रगान भी था।

1947 से 2023 तक का सफर...

1947 : 26 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर के आखिरी शासक महाराजा हरि सिंह ने भारत में शामिल होने के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। महाराजा संसद की ओर से तीन विषयों पर शासन किए जाने पर सहमत हुए थे, लेकिन केंद्र की पॉवर को विदेशी मामलों, रक्षा और संचार तक सीमित कर दिया गया था। उस समय यहां मुस्लिम आबादी ज्यादा थी, जिसकी वजह से लोगों की भावनाएं पाकिस्तान में विलय की थीं। इसलिए लोगों को कई तरह की सहूलियतें दी गई थीं। 1950 : 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था। जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा आर्टिकल 370 ने दे दिया। इसके तहत राज्य सरकार के परामर्श के बिना भारत के राष्ट्रपति संविधान के किसी भी प्रावधान को जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं कर सकते थे। 1951 : 31 अक्टूबर, 1951 जम्मू-कश्मीर के संविधान का मसौदा तैयार करने को लेकर संविधान सभा की 75 सदस्यीय पहली बैठक हुई। सभी सदस्य श्रीनगर में जुटे। सभी सदस्य जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस से थे। उनका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के लिए संविधान का मसौदा तैयार करना था। 1952 : जम्मू-कश्मीर संविधान सभा में कश्मीर के नेताओं ने केंद्र के साथ चर्चा की। इसमें केंद्र और राज्य के संबंधों को लेकर एक समझौता हुआ। 1956 : जम्मू-कश्मीर ने 17 नवंबर 1956 में खुद को भारत का अभिन्न अंग घोषित कर दिया, लेकिन अपना संविधान अपनाया। 1962 : सुप्रीम कोर्ट ने माना कि राष्ट्रपति के पास जम्मू-कश्मीर में संवैधानिक प्रावधानों में संशोधन की व्यापक शक्ति हैं। 1972 : सुप्रीम कोर्ट ने माना कि अनुच्छेद 370 में राष्ट्रपति संशोधन कर सकते हैं। 1975 : इंदिरा गांधी और शेख अब्दुल्ला ने कश्मीर समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसमें आर्टिकल 370 और जम्मू-कश्मीर की स्थिति को भारत के अभिन्न अंग के रूप में फिर से पुष्टि की गई। 1980-90 : 80 और 90 के दशक में कश्मीर आतंकी गतिविधियों से जूझता रहा। इस दौरान कश्मीरी पंडितों का पलायन हुआ। इसके बाद से धारा 370 को हटाने की मांग जोर पकड़ने लगी।  2015 : मार्च 2015 में भाजपा ने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर में पहली बार सरकार बनाई। 2016 : साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने माना- संविधान सभा की सिफारिश के बाद ही अनुच्छेद 370 खत्म होगा। 2018 : 2018 में बीजेपी-पीडीपी गठबंधन टूट गया।  इसके बाद वहां राज्यपाल शासन लागू हुआ। जम्मू-कश्मीर के संविधान के अनुच्छेद 92 के तहत राज्यपाल शासन को छह महीने से ज्यादा नहीं बढ़ाया जा सकता है। इसी के चलते 19 दिसंबर 2018 को राज्यपाल का शासन समाप्त हो गया था। 2019 : 5 अगस्त, 2019 को जम्मू और कश्मीर से संविधान के आर्टिकल 370 को हटाने के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक बिल पेश किया। इसे, उसी दिन पारित कर दिया गया। 6 अगस्त 2019 को लोकसभा से भी इसे पारित कर दिया गया और 9 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई थी। जिसके बाद जम्मू-कश्मीर को दिया गया विशेष दर्जा हट गया।

इसके आगे क्या...

अनुच्छेदों को हटाए जाने के तुरंत बाद इसे चुनौती देते हुए कई याचिकाएं दायर की गईं। अगस्त 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को 5 जजों की बैंच के पास भेज दिया था। अदालत ने इस साल अगस्त में इस मामले की अंतिम दलीलें सुननी शुरू कीं। इस मामले में कुल 23 याचिकाएं दायर की गई थीं। सुनवाई के बाद आखिरकार अदालत ने साफ कर दिया कि धारा 370 को हटाने का फैसला सही था और इसे दोबारा लागू नहीं किया जा सकता। (इनपुट - सोनाली राय) ये भी पढ़ें - Article 370 पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला : बरकरार रहेगा राष्ट्रपति का जम्मू-कश्मीर से 370 हटाने का फैसला, CJI बोले- यह अस्थायी था, सरकार के हर फैसले को चुनौती नहीं दे सकते
Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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