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देखरेख की दरकार:उपेक्षा का शिकार कटनी की ऐतिहासिक धरोहर, बिलहरी के प्राचीन विष्णु वाराह मंदिर के पास गंदगी का अंबार

कटनी जिले के बिलहरी में स्थित प्राचीन विष्णु वाराह मंदिर आज उपेक्षा और बदहाली की तस्वीर बना हुआ है। कल्चुरी कालीन इस ऐतिहासिक धरोहर तक पहुंचने से पहले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को कचरे के ढेर और अतिक्रमण का सामना करना पड़ता है। भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) के संरक्षण में होने के बावजूद मंदिर की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
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उपेक्षा का शिकार कटनी की ऐतिहासिक धरोहर, बिलहरी के प्राचीन विष्णु वाराह मंदिर के पास गंदगी का अंबार
बिलहरी के प्राचीन विष्णु वाराह मंदिर के पास गंदगी का अंबार

कटनी। भारतीय समाज में जहां एक ओर किसी भी अनगढ़ पत्थर पर श्रद्धा व्यक्त कर पूजा-पाठ के लिए भीड़ जुट जाती है, वहीं सैकड़ों वर्ष पुराने ऐतिहासिक मंदिर उपेक्षा का शिकार बने हुए हैं। बिलहरी का विष्णु वाराह मंदिर इसका जीवंत उदाहरण है, जहां कचरा, अतिक्रमण और प्रशासनिक लापरवाही साफ दिखाई देती है। स्थानीय लोगों ने मंदिर मार्ग से अतिक्रमण हटाने, सफाई कराने और धरोहर के संरक्षण की मांग उठाई है। उनका कहना है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो इतिहास की यह अमूल्य धरोहर हमेशा के लिए नुकसान झेल सकती है।

बिलहरी का प्राचीन विष्णु वाराह मंदिर बदहाली की तस्वीर

कटनी जिले के बिलहरी में स्थित प्राचीन विष्णु वाराह मंदिर कल्चुरी कालीन अनूठे शिल्प को अपने भीतर समेटे हुए है। भारतीय समाज में जहां एक तरफ किसी भी अनगढ़ पत्थर पर श्रद्धा ज्ञापित कर पूजा-पाठ के लिए भीड़ लगा दी जाती है और प्रशासन भी बीच सड़क पर बने धर्मस्थलों को मान्यता देकर मजमा लगाने की छूट दे देता है, वहीं दूसरी ओर राजा-महाराजाओं और संपन्न लोगों द्वारा विधि-विधान से बनवाए गए ऐतिहासिक मंदिर आज उपेक्षा का शिकार हैं। यह मंदिर भी अपनी बदहाली पर मानो आंसू बहा रहा है। इसकी वर्तमान स्थिति ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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कचरे के ढेर और अतिक्रमण से बाधित हुआ मंदिर का रास्ता

कहने को तो यह मंदिर भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) के संरक्षण में है, लेकिन धरातल पर व्यवस्थाएं बेहद शर्मनाक नजर आती हैं। मंदिर तक पहुंचने का रास्ता एक संकरी गली से होकर गुजरता है, जहां स्थानीय निवासियों ने अवैध अतिक्रमण कर राह में अवरोध पैदा कर रखा है। मंदिर परिसर में प्रवेश करने से पहले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को कचरे के बड़े ढेर को पार करना पड़ता है। एक तरफ देश में पर्यटन और विरासतों को सहेजने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ बिलहरी की इस गौरवशाली विरासत को कचरे के हवाले कर दिया गया है।

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पुरातत्व विभाग, प्रशासन और पंचायत पर उठे सवाल

इस ऐतिहासिक धरोहर की दुर्दशा का सबसे बड़ा कारण जिम्मेदार विभागों की उदासीनता को माना जा रहा है। एएसआई का बोर्ड लगे होने के बावजूद विभाग का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी यहां व्यवस्थाएं देखने नहीं आता। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भी कभी मंदिर मार्ग से अतिक्रमण हटाने या सौंदर्यीकरण की दिशा में पहल नहीं की। वहीं स्थानीय ग्राम पंचायत भी इस पूरे मामले में पूरी तरह मौन बनी हुई है, जिससे सफाई व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है और मंदिर की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।

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इतिहास प्रेमियों ने संरक्षण और विकास की उठाई मांग

बिलहरी का यह परिसर कल्चुरी कालीन वास्तुकला का एक बेजोड़ नमूना माना जाता है। यहां स्थापित भगवान विष्णु के वाराह अवतार की प्रतिमा और अन्य शिल्प कलाएं भारतीय इतिहास और संस्कृति के स्वर्णिम काल की पहचान हैं। स्थानीय जागरूक नागरिकों और इतिहास प्रेमियों ने जिला प्रशासन और भारतीय पुरातत्व विभाग से मांग की है कि मंदिर मार्ग से तत्काल अतिक्रमण हटाया जाए, कचरे के ढेर साफ किए जाएं और इस ऐतिहासिक स्थल को एक व्यवस्थित पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। उनका कहना है कि अगर समय रहते संरक्षण के प्रयास नहीं किए गए तो इतिहास का यह अनमोल पन्ना हमेशा के लिए नष्ट हो सकता है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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